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मानवाधिकार जन निगरानी समिति ( PVCHR ) धर्म परिवर्तन करने का दंश झेल रही महजबीन उर्फ मेघा के साथ मजबूती से खड़ी है। आपने हमने धर्म परिवर्तन के लिए राजनीति और सामाजिक सत्ता की ओर से व्यक्ति और समूह के प्रति होने वाले अत्याचारों के बारे में बहुत सुना होगा। पर बिना मां वाली घर में अकेली बेटी पर बाप के जुल्मो सितम के इंतहा हो जाने की वजह से धर्म परिवर्तन की यह अत्यंत दर्दनाक दास्तान है। मानवाधिकार जन निगरानी समिति टीम ने इस सच को बेनकाब करके बेसहारा बेटी का साथ निभाने का बीड़ा उठाया है। हम जानते हैं कि इस देश के ज्यादातर मुसलमान मूलनिवासी अस्पृश्यों के ही वंशज है, जिन्हें बौद्ध धर्म के अवसान और मनुस्मृति व्यवस्था की सत्ता से बचने के लिए इस्लाम की शरण लेनी पड़ी। आजादी के बाद हिंदुत्व अब अंध राष्ट्रवाद की शक्ल में मुंह बांए खडा है। पहले जो लड़की पिता के अत्याचारों से परेशान थी, अब वह पूरे समाज के मुकाबले एकदम अकेली खड़ी है। क्या मानवाधिकार जन निगरानी समिति उसकी जिजीविषा को क्रोमिन देने के लिए पर्याप्त है?
मानवाधिकार जन निगरानी समिति के मुताबिक महजबीं उर्फ मेघा नागर उम्र 18 वर्ष] पिता क नाम अभय राम नागर, सुदामापुर, बज़रडीहा, वाराणासी की रहने वाली है। उसके पिता स्टेट बैंक आफ इंडिया मे असिस्टेंट मैनेजर हैं। जब वह लगभग पांच-छः वर्ष की ही थी, तब उसकी मां की मृत्यु हो गयी। घर मे कोई भाई बहन नही था। वह अप्ने माता-पिता की इकलौती संतान है। तब से आज तक की उसकी जिन्दगी अकेलेपन और दुःखो के बीच बीतती रही। घर मुस्लिम बहुल इलाके मे था और उसके पिता घोर मुस्लिम विरोधी। लिहाजा पास पड़ोस से बातचीत और किसी तरह के संबंध की कोई गुंजाइश नही थी। बहुत बन्धन मे रहना पडता था। जैसे–जैसे वह बडी होती गयी, पिता का व्यवहार उसके प्रति और भी कठोर होता गया। उसके पिता बहुत ही गुस्से वाले आदमी! छोटी-छोटी बातों को लेकर गाली गलौज, मार-पीट शुरू कर देते। उनकी उससे बातचीत बहुत ही कम होती थी। उनके इस व्यवहार से उसके मन मे भी धीरे-धीरे उनके लिये एक कठोरता आती गयी और उसने तय कर लिया कि वह अपनी जिन्दगी इनकी मर्जी से नहीं जियेगी। 2010 में उसने इंटर पास किया। इसी बीच अपने मुस्लिम दोस्तों से मुस्लिम धर्म के बारे मे जानने को मिला। फैजुर्रहमान उर्फ राजू पुत्र लियाकत गनी अंसारी, जिसका घर उसके घर के सामने ही है, उसके परिवार के साथ उसकी अच्छी बनने लगी थी। जाहिर है कि उसके पिता को यह बिल्कुल पसन्द नहीं था। लेकिन मेघा ने उनकी गाली गलौज व मार पीट को नजरअन्दाज करना शुरू कर दिया था। वह अपने पिता के साथ बिल्कुल भी नहीं रहना चाहती थी। उनका व्यवहार उसके प्रति लगातार कठोर और असहनीय होता जा रहा था। कभी-कभी मारने पीटने के बाद कई कई दिनों तक उसे भूखा रखा जाता था। उसके ताऊ जो उसके साथ ही घर में रहते हैं, हमेशा उसके पिता को उसके खिलाफ भडकाते रहते, तब उसने तय कर लिया कि अब और अधिक सहन नहीं कर सकती। 7 मई 2011 को काजी-ए-शहर मुफ्ती गुलाम यसीन से फैजुर्रहमान (राजू) की सहायता से उसने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया। यह बिना दबाव के लिया गया उसका निजी फैसला था।
यह घटना काफी समय तक उसने अपने पिता और परिवार से छुपाये रखी। काफी हिम्मत कर उसने यह बात एक दिन अपने पिता के सामने तब रखी, जब उसने 7 अगस्त 2011 को अखबार में छपने के लिये इश्तिहार दे दिया। उसके बाद उसके पिता, ताऊ व पूरे परिवार वालों ने उसे बहुत मारा-पीटा। कई दिन तक उसे भूखा रखा। उसके पिता ने खुदा को व उसके फैसले को बहुत गाली दी। लिहाजा अब महजबीं उर्फ मेघा उनके साथ रहने के लिये बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। वह पुलिस चौकी बज़रडीहा अपनी शिकायत दर्ज कराने गयी तो थाना इंचार्ज ने उसे समझाया कि इतनी रात को कहा जाओगी, सुबह चली जाना। अभी घर जाओ। अगले दिन उसके पिता पुलिस चौकी गये और उनके कहने पर थानेदार ने महजबीं को फोन कर कहा कि अब तुम्हारे पिता तुम्हें परेशान नहीं करेंगे। हमने उन्हे समझा दिया है। अब तुम शिकायत लिखवाकर क्या करोगी?
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जो पिता अपनी दूसरी शादी नहीं करता और अपने छोटे छोटे बच्चों को पालता है , वह ज़ालिम और जो पड़ोसी अपने पड़ोसी की बिन माँ की बच्ची को बहला फुसला कर अपने बेटे से शादी और उसका धर्म परिवर्तन करवाता है वह उदार और सही ? ऐसे लेखक क्या अपने पाठकों को बेअक्ल समझते हैं ?
यह साफ़ उदाहरण है कि यदि मुसलमान मुहल्ले मे भी बहुसंख्यक हैं तो वे पड़ोसी का धर्म परिवर्तन एन केन प्रकारेण करवाने की कोशिश करेंगे क्योकिं इससे उन्हें ज़न्नत मिलेगी | यही भारत से पाकिस्ताण सब जगह हो रहा है |
आप जैसे न्याय प्रिय इसे सही और धर्मनिरपेक्ष मानते है तो बताइये कि पिटा गाली देता था तो इसका हल धर्म परिवर्तन है | इस तरह की बोगस दलीलों के सामने कब तक हम अपने बच्चों को इन धर्मान्धो की ज़न्नत की चाहत पूरी करने का माध्यम बनने देगें |
भाई यदि कोई मुस्लिम स्त्री इस्लाम से परेशान होकर अपना धर्म परिवर्तन करना चाहे तो देश के संविधान की क्या स्थिति है? क्या इसमें मुस्लिम लॉ का कोई हस्तक्षेप रहेगा? कृपया रोशनी और रोशनाई दोनो डालनें का कष्ट करें ।
सादर
डॉ.रूपेश श्रीवास्तव