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जलवायु संकट पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चेतावनी: तत्काल सुधार की आवश्यकता

  • गुटेरेस का वैश्विक शासन व्यवस्था पर संकट का खुलासा
  • जी20 देशों से जलवायु वित्त और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की अपील
  • जलवायु संकट से निपटने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती की आवश्यकता

अवि शिवराज

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जी20 शिखर बैठक में जलवायु संकट पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इस संबंध में पढ़ें संयुक्त राष्ट्र समाचार की ख़बर

जी20: जलवायु हालात दरकने के कगार पर, 'पुरानी व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार ज़रूरी'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ब्राज़ील के रियो डी जनेरियो शहर में जी20 समूह की शिखर बैठक के दौरान विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं से तुरन्त जलवायु कार्रवाई करने व अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार लागू किए जाने का आग्रह किया है. उन्होंने अपनी पुरज़ोर अपील के साथ चेतावनी भी दी है कि मौजूदा व्यवस्थाएँ, वैश्विक चुनौतियों से निपटने में विफल साबित हो रही हैं.

यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने मंगलवार को, विश्व अर्थव्यवस्था के 85 फ़ीसदी की हिस्सेदारी वाले जी20 समूह की शिखर बैठक को सम्बोधित किया, जिसमें 19 देश व योरोपीय संघ शामिल हैं.

उन्होंने आगाह किया कि हमारी जलवायु दरकने के कगार पर पहुँच चुकी है. “यदि हमने वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित नहीं रखा, तो तेज़ी से बढ़ती आपदाएँ हर अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगी.”

अज़रबैजान की राजधानी बाकू में यूएन के वार्षिक जलवायु सम्मेलन, कॉप29 की पृष्ठभूमि में, उन्होंने जलवायु जोखिमों

के प्रति सचेत करते हुए कहा कि विफलता का कोई विकल्प नहीं है.

महासचिव गुटेरेस ने ध्यान दिलाया कि यूएन जलवायु सम्मेलन की सफलता मोटे तौर पर जी20 सदस्यों के हाथों में है.

“जी20, वैश्विक उत्सर्जन के लिए 80 फ़ीसदी के लिए ज़िम्मेदार है. इसलिए, हमें आपकी अगुवाई की आवश्यकता है.” इस क्रम में, उन्होंने इस दशक में, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में हर वर्ष 9 फ़ीसदी की कटौती किए जाने की पुकार लगाई है.

महासचिव ने ब्राज़ील और ब्रिटेन द्वारा व्यक्त किए गए जलवायु संकल्पों का स्वागत किया और जलवायु परिवर्तन पर सूचना सत्यनिष्ठा के लिए एक नई वैश्विक पहल की घोषणा की.

इस पहल के अन्तर्गत, ब्राज़ील और संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) जानबूझकर ग़लत जानकारी फैलाए जाने के विरुद्ध एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे.

अगले वर्ष, ब्राज़ील द्वारा कॉप30 सम्मेलन की मेज़बानी की जाएगी, जिससे पहले जलवायु वित्त पोषण समझौतों पर सहमति की आवश्यकता पर बल दिया गया है.

“हमें बाकू में सफलता हासिल करनी होगी, भरोसे का निर्माण करना होगा और अगले वर्ष ऊँची महत्वाकाँक्षा वाली राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं की तैयारियों को प्रोत्साहन देना होगा.”

वैश्विक शासन व्यवस्था पर संकट

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि वैश्विक संस्थाओं के समक्ष मौजूद चुनौतियों की वजह से जलवायु संकट और जटिल हो गया है. साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के लिए भी मुश्किले हैं.

“हमारे सामने वैश्विक शासन व्यवस्था की कमी और वैश्विक भरोसे का अभाव है. निर्धनता, असमानता व जलवायु संकट बद से बदतर होते जा रहे हैं और शान्ति हमारी पकड़ से दूर हो रही है.”

उन्होंने क्षोभ जताया कि मासूम लोग युद्ध व हिंसक टकराव की भयावह क़ीमत चुका रहे हैं और सुरक्षा परिषद इन्हें रोक पाने में असमर्थ है.

इसके मद्देनज़र, उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार प्रक्रिया को दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाने की अपील की और कहा कि इसे कभी ना पूरी हो सकने वाली संभावना बनने से रोकना होगा.

सुधारों का समर्थन

एंटोनियो गुटेरेस ने जी20 देशों से मौजूदा अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में भी आमूल-चूल परिवर्तन का आग्रह किया, जोकि उनके अनुसार अब पुराना हो चुका है और न्यायोचित नहीं है.

वैश्विक चुनौतियो का सामना करने के नज़रिये से, अगले वर्ष जुलाई में स्पेन में ‘विकास के लिए वित्त पोषण’ यूएन सम्मेलन और फिर ब्राज़ील में कॉप30 अहम होंगे.

महासचिव ने दोहराया कि इन आगामी बैठकों की सफलता मोटे तौर पर जी20 समूह के नेतृत्व और सुधार प्रक्रिया के लिए उनकी प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है.

“हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम वैश्विक शासन व्यवस्था में इन आवश्यक सुधारों का समर्थन करें, चूँकि आज की दुनिया में भरोसे का फिर से निर्माण करने के लिए वे पूरी तरह से आवश्यक हैं.”

Web Title: Guterres appeals for climate reform at G20 summit