लखनऊ, 07 अक्तूबर 2020. कर्बला की यादगार सत्य और न्याय के लिए सब कुछ निछावर कर देने की प्रेरणा देती है। हमारे देश में मोहर्रम और सफर (चेहल्लुम) के माह में कर्बला की याद में निकलने वाले जुलूस (Processions in memory of Karbala) ख़ास तौर पर अवध, लखनऊ के जुलूस, देश के एक धार्मिक समुदाय की धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत हैं।
इस वर्ष करोना वायरस महामारी की वजह से मोहर्रम के माह में कोई जुलूस नहीं जा सका, परंतु अब जब कार्य व्यवस्था पुनः अपनी यथास्थिति पर आ रही है, बाजार खुल चुके हैं, यातायात चल रहा है, परीक्षाएं संपन्न कराई जा रही हैं, ऐसे में चेहल्लुम जुलूस (chehlum juloos) को भी फिजिकल डिस्टेंसिंग व अन्य सावधानियों के साथ संपन्न कराया जा सकता है।
इसी विषय में तंजीम अली कांग्रेस की अध्यक्षता में विभिन्न वर्गों और धर्मों के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं व सम्मानित नागरिकों द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन देने वालों मे वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद हसीन अब्बास रिजवी, एडवोकेट असकरी अनवर, हुसैन रिजवी एडवोकेट, सैयद ज़हीर हुसैन एडवोकेट, समाजिक कार्यकर्ता इमरान अहमद, अली कांग्रेस अध्यक्षा सु रुबीना जावेद मुर्तुज़ा, बहार अख्तर ज़ैदी, डॉ अनूप कुमार, डॉ दुर्गेश सोनकर, रेहान अंसारी, लवी नवाब, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता एस एन लाल,
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि कोरोना महामारी का ख़तरा सभी जगह है और कोई भी ज़रा सी लापरवाही से इसका शिकार हो सकता है, इससे बचने के लिए बतायी गयी सावधानियों का पालन करना सभी का कर्तव्य है। परन्तु यह भी सच है कि अब यह बीमारी हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा है जब तक इसकी वैकसीन नहीं आ जाती, जीवन के सभी कार्य इस बीमारी से बचने के लिए उचित सावधानियों के अनुसार ही करने होंगे। इन्ही बातों मद्देनज़र रखते हुए प्रशासन से चेहल्लुम के जुलूस के उचित प्रबंध की मांग की गई है।
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