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<title><![CDATA[hastakshep | हस्तक्षेप]]></title>
<description><![CDATA[हस्तक्षेप एक स्वतंत्र हिंदी न्यूज़ पोर्टल है जो समसामयिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक मुद्दों पर समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यहाँ दलित, वंचित, आदिवासी, महिला व छात्र अधिकारों को विशेष महत्व दिया जाता है।]]></description>
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<title>hastakshep | हस्तक्षेप</title>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:21:36 GMT</pubDate>
<lastBuildDate>Fri, 03 Apr 2026 18:21:36 GMT</lastBuildDate>
<copyright><![CDATA[Hastakshep]]></copyright>
<language><![CDATA[hi]]></language>
<managingEditor><![CDATA[anushka@blinkcms.ai (Hastakshep)]]></managingEditor>
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<title><![CDATA[क्या आप जानते हैं: महिलाओं को क्यों है रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) का अधिक खतरा?]]></title>
<description><![CDATA[महिलाओं में एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का खतरा अधिक क्यों है? जानिए जेंडर असमानता, हिंसा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का संबंध।]]></description>
<tags>antibiotics,Antimicrobial resistance,anti-microbial-resistance,संक्रमण,महिला सशक्तिकरण</tags>
<link>https://hastakshep.com/gender-justice/mahilaon-mein-amr-ka-jyada-khatra-kyon-293547</link>
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<category><![CDATA[Breaking News,दुनिया,देश,समाचार,स्वास्थ्य,जेंडर जस्टिस]]></category>
<dc:creator><![CDATA[Hastakshep]]></dc:creator>
<pubDate>Thu, 02 Apr 2026 05:20:16 GMT</pubDate>
<imagecaption><![CDATA[Women’s health in Hindi]]></imagecaption>
<image><![CDATA[https://hastakshep.com/wp-content/uploads/2025/02/CHMMt57NdiBepS5sORZ9.jpg]]></image>
<content:encoded><![CDATA[<img src='https://hastakshep.com/wp-content/uploads/2025/02/CHMMt57NdiBepS5sORZ9.jpg' /><h2 style="text-align: justify; "><b>रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
</b></h2><ul class="hocalwire-editor-list"><li style="text-align: justify;"><b>दवाओं के दुरुपयोग से कैसे बढ़ रहा है एएमआर संकट
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>महिलाओं पर एएमआर का खतरा अधिक क्यों?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>जेंडर असमानता और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>टीकाकरण, संक्रमण और महिलाओं की बढ़ती संवेदनशीलता
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>हिंसा, भेदभाव और एएमआर के बीच गहरा संबंध
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>ग्रामीण महिलाओं और स्वास्थ्य असमानता की जमीनी हकीकत
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>एएमआर से जंग: समाधान क्या हैं?
</b></li><li style="text-align: justify;"><b>स्वास्थ्य न्याय और जेंडर समानता की अनिवार्यता
</b></li></ul><p style="text-align: justify; "><b>क्या महिलाओं को दवा-प्रतिरोधक संक्रमण का खतरा ज्यादा है? जेंडर असमानता, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक कारणों की गहराई से पड़ताल।
</b></p><h3 style="text-align: justify; "><b>क्या आप जानते हैं कि महिलाओं को रोगाणुरोधी प्रतिरोध का अधिक है खतरा
</b></h3><p style="text-align: justify; ">पुरुष हो या महिला या ट्रांसजेंडर व्यक्ति, यदि उसको दवा-प्रतिरोधक संक्रमण हो जाए तो सामान्य दवाएँ कार्य नहीं करेंगी। यह बात पशु या पौधों पर भी लागू होती है यदि उनको ऐसा संक्रमण हो जो दवा-प्रतिरोधक हो - सामान्य दवाएं कार्य नहीं करेंगी।
</p><h4 style="text-align: justify; "><b>एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस या एएमआर या रोगाणुरोधी प्रतिरोध किसे कहते हैं
</b></h4><p style="text-align: justify; ">दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग के कारण, रोग पैदा करने वाले जीवाणु, दवा प्रतिरोधक हो जाते हैं जिसे एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस या एएमआर या रोगाणुरोधी प्रतिरोध कहते हैं। 
</p><p style="text-align: justify; ">दवा प्रतिरोधकता के बाद दवाएं काम नहीं करती, रोग का इलाज मुश्किल हो जाता है (नई दवाएँ चाहिए होती हैं जो अत्यंत सीमित हैं और महँगी हैं या हैं ही नहीं) और रोग लाइलाज तक हो सकता है। 
</p><p style="text-align: justify; ">एक जटिल समस्या यह भी है कि दवाओं का दुरुपयोग सिर्फ मानव स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, खाद्य और कृषि वर्गों में भी चिंताजनक स्तर तक व्याप्त है। पर्यावरण तक एएमआर पहुंचना (नदी आदि में) अत्यंत गंभीर बात है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>महिलाओं को एएमआर का खतरा ज्यादा क्यों होता है ?
</b></p><p style="text-align: justify; ">हिंसा समेत अनेक प्रकार की महिला असमानता, एएमआर का खतरा बढ़ाते हैं। ग्लोबल एएमआर मीडिया अलायन्स की अध्यक्ष शोभा शुक्ला ने कहा कि परिवार में कोई भी अस्वस्थ्य हो, उसकी देखभाल करने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं की ही होती है। संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण अत्यंत असंतोषजनक है, भले ही वह स्वास्थ्य व्यवस्था हो, या सामुदायिक स्थान या घर। यदि आंकड़ें देखें तो अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर जाने वालों को संक्रमित होने का खतरा अधिक है - और इनमें से अनेक संक्रमण दवा प्रतिरोधक होते हैं। 
</p><p style="text-align: justify; ">अनेक शोध दिखाते हैं कि विश्व स्तर पर बच्चों के टीकाकरण में लड़कों को टीके लगने का अनुपात, लड़कियों से कहीं अधिक है। ऐसे में, लड़कियों और महिलाओं को ऐसी बीमारियां होने का खतरा भी अधिक हो जाता है जिनसे टीके के ज़रिए पूर्णत: बचाव मुमकिन है।
</p><p style="text-align: justify; ">जेंडर असमानता के कारण रोग होने पर महिलायें अक्सर देरी से जांच-इलाज पाती हैं। महिला हिंसा भी महिलाओं को अनेक संक्रमण की ओर धकेलती है - इनमें एचआईवी और अन्य यौन संक्रमण शामिल हैं।
</p><p style="text-align: justify; "><b>कैसे रुके एएमआर या रोगाणुरोधी प्रतिरोध
</b></p><p style="text-align: justify; ">भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की पूर्व महानिदेशक और विश्व स्वास्थ्य संगठन की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि यदि एएमआर या रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर अंकुश लगाना है तो महिला हिंसा और अन्य प्रकार की जेंडर असमानता को भी दूर करना होगा क्योंकि इनके कारण महिलाएं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रह जाती हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">यौन संक्रमण, मूत्र मार्ग में संक्रमण, या प्रजनन मार्ग में संक्रमण, या श्रोणि (पेल्विक) सूजन की बीमारी, सभी महिला हिंसा से जुड़ी हुई हैं और इनके कारण एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग भी होता है। 
</p><p style="text-align: justify; ">यदि महिला स्वास्थ्य केंद्र से मदद ले तो अक्सर वह आवश्यकतानुसार नहीं आ पाती। इसके कारण दवाओं को पूरी अवधि में अक्सर नहीं ले पाती या खुराक सही नहीं ले पाती। 
</p><p style="text-align: justify; ">जो महिलायें अनियोजित गर्भावस्था या असुरक्षित गर्भपात से गुज़रती हैं उनको भी एएमआर का ख़तरा अत्याधिक है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>शोषण और भेदभाव से बढ़ोतरी पर है एएमआर
</b></p><p style="text-align: justify; ">भक्ति चवन, एएमआर से अपने जीवन में संघर्ष कर चुकी हैं और सफलतापूर्वक उन्होंने एएमआर को हराया। उन्हें सबसे गंभीर किस्म की दवा प्रतिरोधक टीबी (एक्सडीआर-टीबी) हो गई थी। उन्हें पहले कभी टीबी नहीं हुई थी तो संभवत: पर्याप्त संक्रमण नियंत्रण के अभाव में, उन्हें किसी से एक्सडीआर-टीबी संक्रमण हो गया। अत्यंत संघर्ष के बाद उन्हें एक्सडीआर-टीबी को हराया और एएमआर जागरूकता में अपने जीवन को समर्पित किया। जो लोग एएमआर से अपने जीवन में संघर्षरत रहे हैं, उनकी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विशेष टास्क फोर्स बनायी है जिसकी भक्ति भी सदस्य हैं।
</p><p style="text-align: justify; ">टीबी हो या एचआईवी, अनेक रोगों के साथ शोषण और भेदभाव समाज में व्याप्त है। महिलाओं के लिए यह शोषण और भेदभाव अत्याधिक हो जाता है। 
</p><p style="text-align: justify; ">जो महिलायें टीबी या एचआईवी से संक्रमित हुई हैं अनेक को 'परिवार को शर्मिंदा' करने जैसे शोषणात्मक बातों से जूझना पड़ता है। उन पर निजी लांछन लगाएं जाते हैं, शादी की संभावना कुंठित होती है और अनेक प्रश्नों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए महिलायें अक्सर अपना रोग छुपाने को विवश हो जाती हैं और यदि यह ख़तरा हो कि परिवार को उनके इलाज के बारे में पता चल जाएगा तो वह इलाज तक छोड़ देती हैं - जिससे एएमआर की समस्या जनती है।
</p><p style="text-align: justify; ">दक्षिण अफ्रीका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ केप टाउन की शोधकर्ता डॉ एस्मिता चरानी (<b><a href="https://www.liverpool.ac.uk/people/esmita-charani" target="_blank">Esmita Charani</a></b>, Associate Professor at the University of Cape Town) ने कहा कि महिला असमानता के कारण एएमआर का खतरा बढ़ता है - और इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ साल पहले एक रिपोर्ट भी जारी की थी।
</p><p style="text-align: justify; ">डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने एक महिला किसान का उदाहरण दिया जो ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, और पशुधन या मवेशी को सँभालने के साथ वह खेत-मजदूर भी है और परिवार भी संभालती है। उसका पति, प्रवासीय श्रमिक है। इन्हीं कारणों की वजह से वह स्वास्थ्य सेवा से कम लाभान्वित होती है। पित्तरात्मकता के चलते जो भी पैसा वह कमाती है उसपर उसका नियंत्रण सीमित रहता है और पुरुष का अधिक। ऐसे में संक्रमण या रोग को नज़रंदाज़ करने की संभावना बढ़ जाती है, एएमआर का खतरा बढ़ जाता है।
</p><p style="text-align: justify; "><b>एएमआर और अन्य स्वास्थ्य समस्यों से निबटना है और सतत् विकास पर खरा उतरना है तो जेंडर समानता ज़रूरी है।
</b></p><p style="text-align: justify; ">ग्लोबल एएमआर मीडिया अलायन्स की शोभा शुक्ला (Shobha Shukla of Global AMR Media Alliance) ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को नारीवादी होना पड़ेगा जिससे कि जेंडर समानता के साथ स्वास्थ्य न्याय सबका अधिकार बन सके। शोभा शुक्ला का मानना है कि महिलाओं को बराबरी से सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय, ज़मीन अधिकार, आदि मिलने होंगे जिससे कि वह भी सतत विकास से पूर्णत: लाभान्वित हो सकें।
</p><p style="text-align: justify; "><b><span style="font-size: 30px;">बॉबी रमाकांत</span> 
</b></p><p style="text-align: justify; "><b>(बॉबी रमाकांत, विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक द्वारा पुरस्कृत सीएनएस के संपादकीय से जुड़े हैं।
</b></p>]]></content:encoded>
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