Hastakshep.com-देश-Haryana-haryana-Indian National Lok Dal-indian-national-lok-dal-Politics of Haryana-politics-of-haryana-इंडियन नेशनल लोकदल-inddiyn-neshnl-lokdl-तीन लालों की धरती-tiin-laalon-kii-dhrtii-राजनीति में परिवारवाद-raajniiti-men-privaarvaad-हरियाणा की राजनीति-hriyaannaa-kii-raajniiti-हरियाणा-hriyaannaa

चंडीगढ़ से जग मोहन ठाकन हरियाणा (Haryana) में मौसमी तापमान के साथ-साथ राजनैतिक पारा भी चुनावी गर्माहट का अहसास करा रहा है। तीन लालों की धरती हरियाणा में लोक सभा चुनाव 2019 आगामी 12 मई को होंगे। कभी बंसीलाल, देवीलाल तथा भजन लाल के इर्द-गिर्द घूमने वाली राजनीति आज एक नए लाल, भाजपा के वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल की परिक्रमा करती नज़र आ रही है। चाहे कांग्रेस हो, जेजेपी हो या पारिवारिक लड़ाई में धरातल खो चुकी इंडियन नेशनल लोकदल (Indian National Lok Dal) पार्टी या अन्य छिट-पुट पार्टी हो, सभी का जनता के सामने प्रस्तुत व प्रचारित किया जा रहा एक ही मुख्य टारगेट दिखता है – वर्तमान लाल यानि भाजपा को हराना। यह बात इतर है कि कुछ पार्टियों के खाने के दांत अलग हैं और दिखाने के अलग।

कभी हरियाणा की राजनीति (Politics of Haryana) के धुरंधर रहे दिवंगत नेताओं के तीसरी व चौथी पीढ़ी के वंशज अपने खुद के कार्यों एवं गुणों की बजाय अपने दादाओं और परदादाओं के नाम पर आज भी लोक सभा की सीढियों पर चढ़ने को प्रयासरत हैं और अपने भाषणों में अपने पूर्वजों के यशोगान व बलिदानों की कहानियां सुनाकर चुनाव की वैतरणी पार करना चाह रहे हैं, उन्हें कितनी सफलता मिलेगी, यह तो 23 मई को ही पता चलेगा।

कुल दस लोकसभा सीटों में से आठ  सीटों पर पुराने धुरंधरों के ग्यारह वंशज लिगेसी के दम पर ताल ठोक रहे हैं। हालांकि भारतीय राजनैतिक क्षितिज पर जब भी कोई वंशवाद / परिवारवाद के नाम पर टीका –टिप्पणी होती है तो केवल नेहरू –गाँधी परिवार का ही नाम उभारा जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हर प्रदेश व हल्का स्तर तक वंशवाद के नाम पर राजनैतिक फायदा उठाने में कोई भी दल पीछे नहीं है।

वंशवाद

के आसरे वोट बटोरने हेतु  कांग्रेस ने  भिवानी (श्रुति चौधरी –बंशीलाल ), रोहतक व सोनीपत (दीपेंदर हुडा / भूपेंदर हुडा –चौधरी रणबीर सिंह), हिसार ( भव्य बिश्नोई-भजन लाल ), अम्बाला ( कुमारी शैलजा –दल बीर सिंह ), करनाल ( कुलदीप शर्मा पुत्र चिरंजीलाल शर्मा )  ; भाजपा ने हिसार ( ब्रिजेंदर सिंह –बिरेंदर सिंह / चौधरी छोटूराम ), गुरुग्राम ( राव इन्दर जीत सिंह –राव बिरेंदर सिंह ) ; इंडियन नेशनल लोकदल ने कुरुक्षेत्र ( अर्जुन चौटाला –ओमप्रकाश चौटाला/ चौधरी देवीलाल ) तथा जन नायक जनता पार्टी ने हिसार (दुष्यन्त चौटाला –ओमप्रकाश चौटाला /चौधरी देवीलाल ) तथा सोनीपत (दिग्विजय चौटाला -–ओमप्रकाश चौटाला /चौधरी देवीलाल ) लोकसभाई क्षेत्रो से पुराने राजनैतिक घरानों के पहलवान मैदान में उतारे हैं।

सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एवं उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के वंशजों ने कमर कसी है। देवीलाल के तीन प्रपोत्र –दुष्यन्त हिसार से, दिग्विजय सोनीपत से तथा अर्जुन चौटाला कुरुक्षेत्र से महाभारत का युद्ध लड़ रहे हैं।

देवीलाल के इन वंशजों में सत्ता हासिल करने की इतनी ललक जगी है कि उन्होंने अपनी दादा-परदादा की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल को विभाजित कर एक अन्य नए दल जननायक जनता पार्टी, जे जे पी, का गठन तक कर डाला।

हरियाणा की कुल दस लोकसभा सीटों में से तीन सीटों पर चौधरी देवीलाल के वंशज चुनाव मैदान में उतरे हैं।

हिसार सीट से देवीलाल के प्रपोत्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र वर्तमान सांसद दुष्यन्त चौटाला (जेजेपी) दुबारा संसद में जाने को लालायित हैं। उनका मुकाबला भी पुराने राजनीतिज्ञों के वंशजों से है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के पौत्र भव्य बिश्नोई (कांग्रेस ) तथा आजादी से पूर्व के संयुक्त पंजाब में ताकतवर मंत्री तथा किसान नेता रहे चौधरी छोटू राम के दोहते एवं वर्तमान में केंद्र में भाजपा सरकार में मंत्री बिरेंदर सिंह, के पुत्र हाल में आईएएस की नौकरी को तिलांजलि दे राजनीति के माध्यम से समाज सेवा का सपना पालने वाले ब्रिजेंदर सिंह (भाजपा ) दुष्यन्त की सीट छीनने को आतुर हैं। हिसार की यह सीट तय कर देगी कि किसकी लिगेसी आज भी कायम है।

गुरुग्राम सीट से हरियाणा के मात्र आठ माह ( 24.03.1967 से 02.11.1967 ) मुख्यमंत्री रहे राव बिरेंदर सिंह के पुत्र राव इंद्र जीत सिंह, जो 1998, 2004, 2009 में कांग्रेस के सांसद रहे हैं, 2014 में पाला बदल कर भाजपा से सांसद बने और अब पुनः 2019 के चुनाव में भाजपा की टिकट पर सांसद बनने का प्रयास कर रहे हैं।

राव बिरेन्द्र सिंह के बाद हरियाणा की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 22.11.68 से 30.11.1975, 05.07.85 से 19.06.87 तथा 11.05.96 से 23.07.99 के दौरान तीन बार काबिज रहे चौधरी बंशीलाल की पौत्री तथा पूर्व सांसद सुरेन्द्र सिंह एवं वर्तमान में तोशाम (भिवानी) से कांग्रेस विधायक किरण चौधरी की पुत्री श्रुति चौधरी भिवानी –महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से अपने दादा व पिता के राजनैतिक विरोधी एवं वर्तमान सांसद धर्मवीर सिंह से कड़े मुकाबले में जीत के लिए आतुर हैं। 2014 में धर्मवीर से हुई अपनी हार का श्रुति चौधरी इस बार बदला हर हाल में लेना चाहती हैं।

सोनीपत एवं रोहतक की दो सीटों पर तो बाप व बेटा चुनाव मैदान में हैं।

कभी संविधान सभा के सदस्य तथा सांसद व विधायक रहे चौधरी रणबीर सिंह के पुत्र एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुडा (कांग्रेस ) सोनीपत से देवीलाल के प्रपोत्र से मुकाबला कर रहे हैं तो वहीँ रोहतक सीट से भूपेन्द्र हुडा के पुत्र एवं पूर्व में तीन बार सांसद रह चुके दीपेन्द्र हुडा (कांग्रेस ) अपनी ही पुरानी सीट पर पुनः काबिज होने के लिए लंगोट कसे हुए हैं।

भूपेन्द्र सिंह हुडा वर्ष 2005 से 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री तथा 1991, 1996, 1998 तथा 2004 में रोहतक से लोक सभा सदस्य रह चुके हैं और उसके बाद 2005, 2009 तथा 2014 में उनके पुत्र दीपेन्द्र हुडा यहाँ से सांसद बने हैं। रोहतक की सीट पर हुडा परिवार का एक तरफ़ा वर्चस्व माना जाता है, हरियाणा की बिग गन चौधरी देवीलाल को भूपेंदर हुडा तीन बार रोहतक से हरा चुके हैं।

एक और पुराने धुरंधर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिवंगत चौधरी दलबीर सिंह(1967, 1971,1980 एवं 1984 में चार बार कांग्रेस के सांसद ) की पुत्री एवं वर्तमान राज्य सभा सांसद कुमारी शैलजा (कांग्रेस ) अम्बाला रिज़र्व सीट से पुनः जीत का स्वाद चखना चाहती हैं। कुमारी शैलजा 2004 तथा 2009 में अम्बाला से और 1991 व 1996 में सिरसा से कांग्रेस पार्टी की टिकट पर सांसद रह चुकी हैं।

करनाल सीट पर चार बार ( 1980 1984 1989, 1991) लगातार कांग्रेसी सांसद रह चुके धुरंधर ब्राह्मण नेता पंडित चिरंजीलाल के पुत्र एवं पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा,हालाँकि अपने पुत्र चाणक्य को टिकट दिलाकर अगली पीढ़ी को आगे लाना चाहते थे, कांग्रेस के प्रत्यासी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

लोकसभा की दस में से आठ  सीटों पर ग्यारह वंशज मैदान में हैं, इनमे से तीन वंशजों (हिसार सीट पर तीन में से दो तथा सोनीपत सीट पर दो में से एक ) का हारना तो तय है ही। अगर इन सीटों पर एक एक वंशज चुनाव जीतता है, तो हरियाणा की अस्सी  प्रतिशत सीटों पर वंशज ही राज करेंगे। वर्तमान हालात में छह वंशजों का जीतना लगभग तय लग रहा है। पर यदि ऐसा होता है तो काफी चिंतनीय विषय है कि फिर आम आदमी कैसे पहुँच पायेगा संसद तक ? अब देखना यह है कि अपने पूर्वजों की वंशबेल के सहारे कितने वंशज लोकसभा की सीढियाँ चढ़ पाते हैं ? और हरियाणा की जनता इन वंशजों को हराकर इनके लिगेसी के दावे को कितना धराशाही करती है ?

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