भारत के पास नहीं है वायु को साफ करने के लिए कोई ठोस कार्य योजना : विशेषज्ञ

राष्ट्रीय स्तर की वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग और शहर के एक्शन प्लान साबित हुए हैं अप्रभावी, राज्यों के एक्शन प्लान नहीं किये गये हैं तैयार : लाइफ (Legal Intative for Forest and Environment)
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Air pollution news

India does not have any concrete action plan to clean the air: Experts

Noida is one of the ten most polluted cities of the world as per the 2019 World Air Quality Report by GA

राष्ट्रीय स्तर की वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग और शहर के एक्शन प्लान साबित हुए हैं अप्रभावी, राज्यों के एक्शन प्लान नहीं किये गये हैं तैयार : लाइफ (Legal Intative for Forest and Environment)

नई दिल्ली, 02 जुलाई 2021. लीगल इनिशिएटिव फॉर फॉरेस्ट एंड एनवीरोंमेंट (लाइफ) द्वारा किये गए एक नए विश्लेषण में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु योजना (NCAP), जिसे 2019 में 102 प्रदूषित शहरों में वायु में सुधार के लिए शुरू किया गया था, अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल होने की संभावना है

लाइफ ने पाया है कि राज्य-स्तरीय हस्तक्षेप—राज्य एक्शन प्लानों का मसौदा तैयार करना और उन्हें लागू करना—शुरू नहीं किया गया है। योजनाओं को तैयार करने के लिए केंद्र या राज्य सरकार द्वारा कोई क़दम नहीं उठाये गए हैं।

लाइफ के विश्लेषण में यह भी पाया गया कि ग्रामीण वायु प्रदूषण या स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर विचार न करके राष्ट्रीय और शहरी स्तर की कार्रवाइयों ने एक अवैज्ञानिक दृष्टिकोण का पालन किया। इन निष्कर्षों को NCAP पर छह-रिपोर्ट श्रृंखला में प्रकाशित किया गया है।

लाइफ के मैनेजिंग ट्रस्टी ऋत्विक दत्ता कहते हैं,

"हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के पास अभी तक वायु को साफ करने के लिए कोई कार्य योजना नहीं है। NCAP केवल नाम के लिए एक राष्ट्रीय कार्य योजना है—इसमें 5% से कम शहर शामिल हैं, ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ दिया गया है और पूरे के पूरे राज्य पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है। NCAP का प्रत्येक घटक अब तक या तो विफल रहा है - चाहे वह मॉनिटरिंग, सिटी एक्शन प्लान या राज्य एक्शन प्लान हो। यह तथ्य कि राज्य सरकार और यहां तक कि CPCB में से भी कोई राज्य एक्शन प्लान तैयार करने की वैधानिक आवश्यकता से अवगत नहीं है, सभी अधिकारियों के बेपरवाह दृष्टिकोण और गंभीरता की कमी को दर्शाता है। NCAP के कार्यान्वयन के पिछले ढाई वर्षों में जो कुछ हुआ है, उसकी व्यापक स्वतंत्र समीक्षा की आवश्यकता है।"

गुम योजनाएं

NCAP दस्तावेज़ के अनुसार, "वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए राज्य एक्शन प्लान" को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के साथ मिलकर उन 23 राज्यों द्वारा तैयार किया जाना था जिनके पास नॉन-अटेन्मेंट वाले शहर हैं।

लाइफ की रिपोर्ट में पाया गया है कि जिन 17 राज्यों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रश्न भेजे गए थे, उनमें से किसी ने भी इन योजनाओं को तैयार नहीं किया है, जिसकी समय सीमा 2020 थी। प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि किसी भी राज्य को यह जानकारी भी नहीं थी कि राज्य एक्शन प्लान तैयार होने थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, "चिंता का एक कारण यह है कि महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश को छोड़कर सभी ने राज्य एक्शन प्लान की व्याख्या अपने संबंधित नॉन-अटेन्मेंट शहरों के लिए तैयार की गई व्यक्तिगत शहर एक्शन प्लान के संकलन के रूप में की है।"

राज्य एक्शन प्लान के लिए दिशानिर्देश 2019 तक MoEFCC और CPCB द्वारा बनाए जाने थे। CPCB ने जून 2021 तक का समय गुज़र जाने पर कहा है कि दिशानिर्देश अभी तैयार किए जाने हैं। ये निष्कर्ष "नीदर एक्शन नार प्लान" ("न तो कार्रवाई और न ही योजना") रिपोर्ट में विस्तृत हैं।

NCAP वायु प्रदूषण में कमी के लिए नॉन-अटेन्मेंट शहरों को लक्षित करता है। यह अधिकांश प्रदूषित शहरों और लैंडस्केपों को योजना के दायरे से बाहर कर देता है। यही कारण है कि राज्य एक्शन प्लान महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

ख़राब कार्रवाई

जबकि राज्य एक्शन प्लान तैयार नहीं किये गए हैं, जो एक्शन शुरू किए गए हैं, वे अपने दृष्टिकोण में मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं। NCAP के तहत एक प्रमुख हस्तक्षेप पूरे भारत में वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग को बढ़ाना था। इसमें 4000 शहरों में मैन्युअल मॉनिटरिंग स्टेशनों को 703 से बढ़ाकर 1500 करना, इंडो गंगेटिक प्लेन (भारत-गंगा के मैदानों) में 45-50 शहरों में 150 रीयल-टाइम निरंतर मॉनिटरिंग स्टेशनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 100 स्टेशनों को जोड़ना शामिल था।

"Up in the Air" Report

लाइफ की "अप इन द एयर" रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युअल मॉनिटरिंग स्टेशनों पर खर्च अनुचित है। इसमें कहा गया है कि, “मैन्युअल मॉनिटरिंग सिस्टम डाटा को कम बार रिकॉर्ड करता है और इसमें ग़लती और देरी की संभावना अधिक होती है। अधिक कुशल CAAQMS (कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन) टेक्नोलॉजी के बावजूद, सरकार पुराने मैन्युअल मॉनिटरिंग ऑपरेशन पर आवंटित धन की एक बड़ी राशि खर्च करने की योजना बना रही है।”

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के समान उच्च स्तर के बावजूद, शहरी क्षेत्रों को मॉनिटरिंग में अन्यायपूर्ण प्राथमिकता दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में आवश्यक 42 के बजाय 48 मॉनिटरिंग स्टेशन हैं जबकि भारी प्रदूषित वाले कोरबा (छत्तीसगढ) में कोई नहीं है। इसके अलावा, NCAP ने ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 100 स्टेशनों की योजना बनाई है जहां भारत की कुल आबादी का लगभग 66.7% निवास करता है।

अप इन द एयर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों को अनदेखा करना पर्यावरणीय अन्याय है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा,

 "यह एक दुखद सच्चाई है कि मौजूदा लगभग 800 स्टेशनों में से अधिकांश से मैन्युअल रूप से मॉनिटर किया गया वायु गुणवत्ता डाटा संबंधित SPCBs और अन्य एजेंसियों द्वारा एक सुसंगत और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं कराया गया है और कम से कम लैग (अंतराल) के साथ इस डाटा के एकत्रीकरण के लिए किसी भी सामान्य मंच की कमी है। प्रदूषण मॉनिटरिंग एजेंसियों से NAMP (नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम) डाटा के लिए डाटा पारदर्शिता पर ख़राब प्रदर्शन के मद्देनज़र, अधिक रियल टाइम और पारदर्शी डाटा संग्रह स्थापित करना और साझाकरण प्रोटोकॉल स्थापित करना महत्वपूर्ण हो जाता है जो केवल CAAQMS के देश भर में व्यापक नेटवर्क के साथ ही संभव हो सकता है।”

पहचाने गए नॉन-अटेन्मेंट शहर, जहां प्रदूषण का स्तर राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों, 2009, और NCAP के तहत संबंधित शहर एक्शन प्लान के मसौदे, से अधिक है। पांच शहरों के प्लान—गाजियाबाद, नोएडा, पुणे, कोलकाता, गुवाहाटी— की समीक्षा में उनमें भारी कमी पाई गई है। चार रिपोर्टों में प्रकाशित, लाइफ के विश्लेषण ने निष्कर्ष निकाला है कि किसी भी प्लान ने पालिसी (नीतिगत) एक्शन को तैयार करते समय शहर-विशिष्ट प्रदूषण स्रोतों को ध्यान में नहीं रखा है। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए एक आयर्स अपपोरशंमेंट स्टडी (स्रोत विभाजन अध्ययन) ने प्रदूषण पैदा करने वाली गतिविधियों पर महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि दी, लेकिन शहर के एक्शन प्लान उन पर ध्यान नहीं देते हैं। इसके अलावा, अधिकांश प्लान लक्षित और सूक्ष्म हस्तक्षेपों के बजाय मौजूदा नीतियों को दोहराते हैं।

विशेष रूप से, शहर के प्लान वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विकेन्द्रीकृत दृष्टिकोण अपनाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं, जहां क्षेत्रीय/स्थानीय स्तर के कारक और अंतर्दृष्टि एक्शन को निर्देशित कर सकते हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि इस अवसर का उपयोग नहीं किया गया था। उदाहरण के लिए, सभी पाँच शहर एक्शन प्लान पड़ोसी क्षेत्रों से औद्योगिक प्रदूषण, जो शहर के प्रदूषण में महत्वपूर्ण वृद्धि करते हैं, को ध्यान में रखने में विफल रहे। इसके अलावा, जबकि अधिकांश शहरों के लिए अपपोरशंमेंट स्टडीज़ अध्ययन या अन्य स्रोतों के माध्यम से प्रदूषक प्रोफाइल की जानकारी तो है लेकिन इन जानकारी के अनुरूप ज़रूरी करवाई नहीं हुई है। इसलिए अधिकांश प्लानों को अवैज्ञानिक बताया जा सकता है।

लाइफ के विश्लेषण के अनुसार, पांच शहरों में से किसी ने भी निर्माण से संबंधित प्रदूषण और कचरे के बारे में विस्तार से नहीं बताया है। इसके बजाय, वे निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के कार्यान्वयन को उस मोर्चे पर एक एक्शन के रूप में बताते हैं। यह न केवल यह दर्शाता है कि प्लान ख़राब तरीके से डिज़ाइन किये गए हैं बल्कि यह भी है कि लगभग छह साल पुराने नियमों का पालन नहीं किया गया है।

लाइफ रिपोर्ट में कहा गया है कि, "जो देश विश्व स्तर पर अपनी ख़राब वायु गुणवत्ता के लिए जाना जाता है, उसमें NCAP दुर्भाग्य से दुनिया में सबसे कम महत्वाकांक्षी सफाई कार्यक्रमों में से एक है। यदि सभी लक्ष्य पूरे कर लिए जाते हैं, तब भी NCAP भारत के अधिकांश शहरों और लैंडस्केपों में वायु की गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं लाएगा। लेकिन इन बहुत मामूली लक्ष्यों को भी पूरा करने की संभावना नहीं है। यह NCAP लक्ष्यों को पूरा करने में सभी कार्यान्वयन एजेंसियों की ओर से गंभीरता की कमी के कारण है।"

कुछ शहरों पर केन्द्रित निष्कर्ष :

·     पुणे के मामले में, पड़ोसी पिंपरी-चिंचवाड़ क्षेत्र कई प्रदूषणकारी उद्योगों का घर है और उत्सर्जन सीधे पुणे में प्रवाहित होता है। यह शहर के प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा है और इसलिए इसे एक्शन प्लान में संबोधित किया जाना चाहिए था।

·     इसी तरह गुवाहाटी में, प्लान खुद को गुवाहाटी शहर की सीमाओं तक सीमित रखता है, जब कि मेघालय के कामरूप ज़िले और आसपास के ज़िले औद्योगिक और खनन गतिविधियों के केंद्र हैं और इस वजह से वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत हैं। औद्योगिक क्षेत्र के ट्रकें भी शहर की सड़कों पर प्रदूषण का कारण हैं, लेकिन शहर में ट्रकों के प्रवेश पर कोई विनियमन प्रस्तावित नहीं किया गया है।

·     कोलकाता का एक्शन प्लान पहले से मौजूद ट्राम रेल सिस्टम का फ़ायदा उठाने का अवसर चूकता है, जो कि सार्वजनिक परिवहन का एक उत्सर्जन-मुक्त तरीका है। इसके बजाय, इसके सार्वजनिक परिवहन हस्तक्षेप GPS और IT-आधारित फ़्लीट (बेड़े की) मॉनिटरिंग को जोड़ने के रुझानों का पालन करते हैं।

·     गाजियाबाद और नोएडा, दोनों बड़े महानगरीय क्षेत्रों के प्लान लगभग समान हैं। दोनों शहरों के लिए समान एक्शन दिए गए हैं, जिसका अर्थ है कि उनकी विशिष्ट प्रदूषण प्रोफाइल को बिल्कुल भी ध्यान में नहीं रखा गया है। दोनों प्लानों में प्रदूषण को घटाने के लिए विशिष्ट लक्ष्यों की कमी है।

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