जानिए भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए, धारा-120 ए और 120 बी के बारे में

Know about Section-153A, Section-120A and 120B of Indian Penal Code भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। धारा 153 (ए) के तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना …
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जानिए भारतीय दंड संहिता की धारा-153 ए, धारा-120 ए और 120 बी के बारे में

Know about Section-153A, Section-120A and 120B of Indian Penal Code

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) आईपीसी की धारा 153 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जो धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। धारा 153 (ए) के तहत 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। अगर ये अपराध किसी धार्मिक स्थल पर किया जाए तो 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।

भारतीय दंड संहिता, 1860 में धारा 34 | Section 34 of the Indian Penal Code, 1860 in Hindi

आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया कृत्यों [अधिनियम – एक आपराधिक कृत्य सभी की आम इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जब यह लड़का उसके द्वारा किया गया है, जैसे कि ऐसे व्यक्तियों में से प्रत्येक में एक ही तरीके है कि अधिनियम के लिए उत्तरदायी है।]

भारतीय दंड संहिता धारा 3 | Indian Penal Code Section 3 in Hindi

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 3 ऐसे अपराधो की सजा के बारे में है, जो कि भारत से बहार किए गए हैं, पर कानून के अनुसार उन्हें भारत में ही पेश किया जायेगा व यहीं उनकी सुनवाई होगी. इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिसपर यह दंड संहिता लागू होती है, द्वारा किए गए किसी भी अपराध के बारे में, भले ही वोह भारत से बहार किए गए हों, की सुनवाई व सजा भारत में होगी।

भारतीय दंड संहिता की धारा-120 ए और 120 बी | Section 120A and 120B of the Indian Penal Code in Hindi

किसी भी अपराध को अंजाम देने के लिए साझा साजिश यानी कॉमन कॉन्सपिरेसी का मामला गुनाह की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 120ए और 120बी का प्रावधान है। जिस भी मामले में आरोपियों की संख्या एक से ज्यादा होती है, तो पुलिस की एफआईआर में आमतौर पर धारा 120ए का जिक्र जरूर होता है। यह जरूरी नहीं है कि आरोपी खुद अपराध को अंजाम दे। किसी साजिश में शामिल होना भी कानून की निगाह में गुनाह है। ऐसे में साजिश में शामिल शख्स यदि फांसी, उम्रकैद या दो वर्ष या उससे अधिक अवधि के कठिन कारावास से दंडनीय अपराध करने की आपराधिक साजिश में शामिल होगा, तो धारा 120 बी के तहत उसको भी अपराध करने वाले के बराबर सजा मिलेगी। अन्य मामलों में यह सजा छह महीने की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

भारतीय दंड संहिता की धारा-186 | Indian Penal Code Section-186 in Hindi

अगर कोई शख्स सरकारी काम में बाधा पहुंचाता है तो उस पर आईपीसी की धारा 186 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। उसे तीन महीने तक की कैद और 500 रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है।

( नोट – यह समाचार किसी भी हालत में कानूनी परामर्श नहीं है। यह सिर्फ जनहित में एक जानकारी मात्र है। कोई निर्णय लेने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें।)

स्रोत- देशबन्धु