घोड़ों से जुड़े रोचक तथ्य : घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है?

These Are Most Amazing Horse Facts | Amazing Facts about Horse in Hindi यह सब जानते हैं कि घोड़े समय-समय पर नाक से फुर्र-फुर्र की आवाज़ निकालते हैं। किंतु घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है, इसके बारे में जानकारों की अलग-अलग राय है। घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है, के बारे में जानकारों की राय …
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घोड़ों से जुड़े रोचक तथ्य : घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है?

These Are Most Amazing Horse Facts | Amazing Facts about Horse in Hindi

यह सब जानते हैं कि घोड़े समय-समय पर नाक से फुर्र-फुर्र की आवाज़ निकालते हैं। किंतु घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है, इसके बारे में जानकारों की अलग-अलग राय है।

घोड़ा फुर्र-फुर्र क्यों करता रहता है, के बारे में जानकारों की राय

कुछ लोग मानते हैं कि वे केवल अपनी नाक साफ करने के लिए ऐसा करते हैं – जैसा इंसान करते हैं। कुछ अन्य लोग मानते हैं कि यदि घोड़ा दुखी या नाराज़ हो तो वह ऐसी आवाज़ करता है। तीसरा समूह मानता है कि घोड़ा खुश होने पर फुर्र-फुर्र करता है।

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बीते दिनों फ्रांस के रेने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं (research on horses done at rene university in france) ने इस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास किया है। कुछ घोड़े हमेशा समूहों में खुले चरागाहों में रहते हैं जबकि सवारी के काम आने वाले घोड़े हमेशा संकरे अस्तबलों में अकेले रहते हैं। खुली हवा में रहने वाले घोड़े अधिक बार फुर्र-फुर्र की आवाज़ करते हैं।

अध्ययन में शामिल 48 घोड़ों को अस्तबल से चारागाह में ले जाया गया और उनके फुर्र-फुर्र करने की संख्या गिनी गई। यह देखा गया कि अस्तबल की तुलना में खुली हवा में घोड़े अधिक बार फुर्र-फुर्र करते हैं। इसके विपरीत, खुली हवा में रहने वाले घोड़े अस्तबल में रखे जाने पर कम बार फुर्र-फुर्र करते थे।

घोड़ों के मूडका एक अन्य लक्षण (Another symptom of horses ‘mood’) उनके कानों की स्थिति होती है। खुश होने पर उनके कान सामने की ओर झुके होते हैं।

इससे पहले एक अध्ययन घोड़ों की एक-दूसरे को पहचानने की क्षमता पर किया गया था।

समूह में रहने वाले 24 घोड़ों को इस अध्ययन में शामिल किया गया। एक घोड़े के सामने से उसके अपने समूह के एक परिचित घोड़े को एक अवरोध के पीछे से निकाला गया। दस सेकंड के बाद उस घोड़े को उसी या किसी दूसरे घोड़े की हिनहिनाहट की रिकार्डिंग सुनाई गई।

जब आवाज़ उस घोड़े की आवाज़ से मेल नहीं खाती थी जिसे उसने देखा था तो प्रयोग वाला घोड़ा चौंक गया और आवाज़ की दिशा में अधिक समय तक देखता रहा, मानो कह रहा हो कि मैंने इसे देखा तो था लेकिन इसकी आवाज़ को क्या हुआ?

इससे यह संकेत मिलता है कि हर घोड़े की हिनहिनाहट अलग होती है और वे एक दूसरे को आवाज़ से पहचान लेते हैं।

अरविंद गुप्ते

(देशबन्धु में प्रकाशित खबर का संपादित रूप साभार)