कोरोना के आयुर्वेदिक उपचार पर शोध के लिए नयी साझेदारी : केरल का कमाल

New partnership for research on Ayurvedic treatment of Corona नई दिल्ली, 4 जनवरी 2021 : कोरोना संक्रमण से उपजी महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए जहां देश में वैक्सीन का ट्रायल द्रुत गति से चल रहा है, वहीं अन्य उपायों से भी इस बीमारी को मात देने के उपाय निरंतर खोजे जा रहे हैं। इस …
 | 
कोरोना के आयुर्वेदिक उपचार पर शोध के लिए नयी साझेदारी : केरल का कमाल

New partnership for research on Ayurvedic treatment of Corona

नई दिल्ली, 4 जनवरी 2021 : कोरोना संक्रमण से उपजी महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए जहां देश में वैक्सीन का ट्रायल द्रुत गति से चल रहा  है, वहीं अन्य उपायों से भी इस बीमारी को मात देने के उपाय निरंतर खोजे जा रहे हैं। इस दिशा में एक नयी पहल के अंतर्गत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) से संबद्ध हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला सेंटर फॉर सेल्युलर ऐंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) और आर्य वैद्यशाला (एवीएस), कोट्टकल के बीच एक नयी साझेदारी की घोषणा की गई है। दोनों संस्थान मिलकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आयुर्वेदिक नुस्खों की प्रभावोत्पादकता का परीक्षण (कोरोना के आयुर्वेदिक उपचार) करेंगे। 

Corona virus In India | COVID-19 In India

केरल के कोट्टकल स्थित आर्य वैद्यशाला (एवीएस) आयुर्वेदिक औषधियों के मामले में एक विश्वसनीय नाम है, जो विगत 118 वर्षों से आयुर्वेदिक औषधियों के उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में सक्रिय है। एवीएस 500 से अधिक आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन करता है। वहीं, सीसीएमबी देश का अग्रणी जैव विज्ञान पर केंद्रित शोध संस्थान है, जो अपनी प्रयोगशालाओं में कोरोना से जुड़े विभिन्न प्रयोगों-परीक्षणों में निरंतर जुटा हुआ है।

इस साझेदारी में एवीएस मानक आयुर्वेदिक नुस्खे (फॉर्मूलेशन) उपलब्ध कराएगा। वहीं, सीसीएमबी उस दवा का प्रयोगशाला में विकसित कोरोना वायरस रूपों के खिलाफ परीक्षण कर उसकी वायरस-प्रतिरोधी (एंटी-वायरल) क्षमताओं की पड़ताल करेगा।

कोरोना के आयुर्वेदिक उपचार पर शोध की पहल पर क्या बोले सीसीएमबी के निदेशक

इस पहल पर सीसीएमबी के निदेशक राकेश मिश्रा ने कहा है कि “यदि अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं, तो यह परियोजना भारत में दवा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगी। भारत के पास प्राचीन ज्ञान का अपार भंडार है, परंतु उन प्राचीन ग्रंथों के आधार पर उनकी परख के लिए नियामक दायरे में उपयुक्त प्रक्रियाओं का अभाव है। ऐसे में कोरोना वायरस के खिलाफ मौजूदा लड़ाई में विभिन्न उपचार पद्धतियों का व्यापक परीक्षण अनिवार्य हो गया है। सीसीएमबी में, हमने प्रयोगशाला में विकसित कोरोना वायरस के खिलाफ विकसित की जा रही दवाओं एवं उपकरणों के परीक्षण की व्यवस्था की है, और इसमें आयुर्वेदिक दवाओं के प्रभाव को भी परखा जा सकता है।”

Recognition of ancient classical knowledge of Ayurveda as modern science

एवीएस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सीटी सुलेमान ने कहा है कि

“सीसीएमबी के साथ हमने इसी उद्देश्य से हाथ मिलाया है कि आयुर्वेद के प्राचीन शास्त्रीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की मान्यता मिल सके। हमें उम्मीद है कि यह अध्ययन वर्तमान परिस्थितियों में उपयुक्त उपचार तलाशने में सहायक होगा। इस दिशा में सकारात्मक संकेत भी मिले हैं।” (इंडिया साइंस वायर)

पाठकों से अपील

Donate to Hastakshep

नोट - 'हस्तक्षेप' जनसुनवाई का मंच है। हम किसी भी राजनीतिक दल या समूह से संबद्ध नहीं हैं। हमारा कोई कॉरपोरेट, राजनीतिक दल, एनजीओ, कोई जिंदाबाद-मुर्दाबाद ट्रस्ट या बौद्धिक समूह स्पाँसर नहीं है, लेकिन हम निष्पक्ष या तटस्थ नहीं हैं। हम जनता के पैरोकार हैं। हम अपनी विचारधारा पर किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए, यदि आप हमारी आर्थिक मदद करते हैं, तो हम उसके बदले में किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार नहीं करेंगे।

OR

भारत से बाहर के साथी Pay Pal के जरिए सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं।

Subscription