कांग्रेस के 9 मुस्लिम उम्मीदवारों पर पड़ेगा भारी एक अष्टभुजा तिवारी

उत्कर्ष सिन्हा लखनऊ। सूबे के मुसलमानों को अपने पक्ष में करने की होड़ चुनाव की घोषणा के साथ ही तेज़ हो गयी है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को रिझाने में लगी है और राहुल गांधी संघ को जहरीला बताते नहीं थक रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में घोषित 49 उम्मीदवारों में से …
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उत्कर्ष सिन्हा
लखनऊ। सूबे के मुसलमानों को अपने पक्ष में करने की होड़ चुनाव की घोषणा के साथ ही तेज़ हो गयी है। कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को रिझाने में लगी है और राहुल गांधी संघ को जहरीला बताते नहीं थक रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में घोषित 49 उम्मीदवारों में से 9 टिकट मुसलमानो को दिए गए हैं। सहारनपुर से ले कर गोरखपुर तक पार्टी ने जिन मुस्लिम चेहरों को चुनावी समर में उतारा है उनमे सलमान खुर्शीद, जफ़र अली नकवी, नवाब काजिम अली, सलीम शेरवानी जैसे पुराने नेता हैं तो वही इमरान मसूद, वैशाली अली, मक़सूद खान, सरताज आलम और क्रिकेटर मोहम्मद कैफ सरीखे नए चेहरों पर भी भरोसा जताया है। मगर इस सारी कवायद पर कांग्रेस का एक उम्मीदवार भरी पड़ रहा है।
गोरखपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने जिन अष्टभुजा तिवारी को उम्मीदवार बनाया है वो पूर्वांचल के सबसे कुख्यात सांप्रदायिक दंगे का अभियुक्त रह चुके हैं। जनता पार्टी से सियासी सफ़र शुरू करने के बाद जनता दल, भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का सफ़र तय कर चुके अष्टभुजा तिवारी अब कांग्रेस की नाव पर सवार हैं। मगर गोरखपुर के मुसलमान उन्हें कबूलने के लिए तैयार नहीं है और उनकी उमीदवारी के विरोध में आला कमान को चिट्ठियां भेजे जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
पंचरुखिया काण्ड पूर्वांचल के इतिहास में एक धब्बे कि तरह है। इसी कांड से योगी आदित्यनाथ ने कट्टर हिंदूवादी की छवि हासिल की थी और इसी के बाद हिन्दू युवा वाहिनी नाम का संगठन बना था. जो योगी कि निजी सेना की तरह काम करता है। महाराज गंज के पंचरुखिया गाँव में मुस्लिम कब्रिस्तान पर कब्जे के लिए संघर्ष हुआ था और हिन्दू कट्टरपंथियों के पक्ष में योगी आदित्यनाथ खड़े हुए थे। विवाद के बढ़ने के बाद फायरिंग हुयी और कई मुसलमानों को गोलियां लगीं। इस फायरिंग में कांग्रेसी नेता तलत अज़ीज का गनर मारा गया था। महाराजगंज कोतवाल के द्वारा लिखाई गयी ऍफ़ आई आर में अष्टभुजा तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया था। इस कांड ने पूर्वांचल में सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत किया था। बाद में तत्कालीन कल्याण सिंह सरकार ने सी बी सी आई डी जांच के आदेश दिए जिसमे मुख्य अभियुक्तों को क्लीन चिट मिल गयी मगर मुस्लिम समुदाय के लोगो ने इसके खिलाफ कोर्ट में अपील दायर कर रखी है। तलत अजीज भी अभी कांग्रेस की महासचिव हैं। और सूत्र बताते हैं की वे इस टिकट से खुश नहीं हैं। अष्टभुजा तिवारी के भाई पप्पू तिवारी अभी कल तक इस हिन्दू युवा वाहिनी के प्रमुख नेताओं में से एक थे और कल उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता स्वीकार कर ली।
गोरखपुर मंडल के आसपास योगी का बहुत प्रभाव है और कांग्रेस के बड़े नेता आर पी एन सिंह की सीट भी गोरखपुर के बगल की ही है। इस इलाके में अभी यही सीट कांग्रेस के पास है। कभी योगी के नजदीकी रहे अष्टभुजा के कांग्रेस उम्मीदवार बनाने से कम से कम इस मंडल में तो कांग्रेस को मुस्लिम वोट मिलाने मुश्किल ही हो जायेंगे।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क