गांधी को हमने राष्ट्र की सीमा में बांध दिया, जबकि वह किसी भी सीमा से परे थे-प्रकाश भाई शाह

गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थानों में जन भागीदारी की वकालत की थी, जन को जोड़ने की उन्होंने पूरी कोशिश भी की, लेकिन सरकारों ने इसके उलट काम किया। परिणामस्वरूप आज संस्थान बेजान बन कर रह गए हैं
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गांधी को हमने राष्ट्र की सीमा में बांध दिया, जबकि वह किसी भी सीमा से परे थे-प्रकाश भाई शाह

नई दिल्ली। प्रख्यात गांधीवादी प्रकाश भाई शाह (Eminent Gandhian Prakash Bhai Shah) ने कहा है कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) किसी भी सीमा से परे थे, और हमने उन्हें राष्ट्र के दायरे में बांध दिया, जो कि एक भारी भूल थी। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने लोकतांत्रिक संस्थानों में जनभागीदारी की वकालत की थी, जिसे हम आज तक नहीं कर पाए।
प्रकाश भाई शाह रविवार को यहां गांधी जयंती के अवसर पर गांधी शांति प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे।

व्याख्यान का विषय था ‘गांधी आज से, हमसे आगे’।

जयप्रकाश नारायण के करीबी रहे प्रकाश भाई ने कहा,

“गांधी को हमने राष्ट्र की सीमा में बांध दिया। जबकि वह किसी भी सीमा से परे थे। उन्होंने सारी सीमाएं तोड़ी, उन्होंने प्रेम, शांति अहिंसा का ऐसा प्रयोग किया, जो पूरी दुनिया के दायरे को समेटता है। वह तब की दुनिया से और आज की दुनिया से भी आगे हैं। और हम उन्हें सीमा में बांध कर पीछे रह गए। यह हमारी बहुत बड़ी भूल थी।”

वयोवृद्ध गांधीवादी अध्येता व पत्रकार प्रकाश भाई ने कहा,

“गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थानों में जन भागीदारी की वकालत की थी, जन को जोड़ने की उन्होंने पूरी कोशिश भी की, लेकिन सरकारों ने इसके उलट काम किया। परिणामस्वरूप आज संस्थान बेजान बन कर रह गए हैं।”

गुजरात से संबंध रखने वाले प्रकाश भाई जीवन के शुरुआती दिनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे, और आरएसएस की शाखाओं में भी जाते थे। लेकिन बाद में उन्होंने आरएसएस के खिलाफ जमकर कलम चलाई। एक गांधीवादी पत्रकार के रूप में उन्होंने सद्भाव की पुरजोर वकालत की।

उन्होंने आगे कहा,

“गांधी का प्रेम, शांति, और अहिंसा का प्रयोग जनभागीदारी के बगैर संभव नहीं है, और इन तत्वों के बगैर किसी समाज के स्थायित्व की कल्पना संभव नहीं है। गांधी आज इसीलिए प्रासंगिक हैं, और हमेशा प्रासंगिक रहेंगे।”

प्रारंभ में गांधी स्मारक निधि के मंत्री, वयोवृद्ध गांधीवादी, रामचंद्र राही ने प्रकाश भाई को शाल और प्रतीकचिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया।

प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने व्याख्यान माला के महत्व पर प्रकाश डाला और कार्यक्रम के अंत में संस्था के सचिव अशोक कुमार ने आगंतुकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।


स्रोत- देशबन्धु

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