गैस मूल्य वृद्धि के खिलाफ लखनऊ में शुरू हुआ जन हस्ताक्षर अभियान

नागरिक परिषद ने जनपथ, टैंपो स्टैंड, लखनऊ से शुरु किया जन हस्ताक्षर अभियान गैस मूल्य वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया तो नागरिक आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे सरकार लखनऊ, 13 मई 2014। आगामी 17 मई को गैस मूल्यों में होने वाली वृद्धि के खिलाफ नागरिक परिषद ने लखनऊ में जनपथ, टैंपो …
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नागरिक परिषद ने जनपथ, टैंपो स्टैंड, लखनऊ से शुरु किया जन हस्ताक्षर अभियान
गैस मूल्य वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया तो नागरिक आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे सरकार
लखनऊ, 13 मई 2014। आगामी 17 मई को गैस मूल्यों में होने वाली वृद्धि के खिलाफ नागरिक परिषद ने लखनऊ में जनपथ, टैंपो स्टैंड से शुरू किया जनहस्ताक्षर अभियान। नागरिक परिषद व विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गैस मूल्य वृद्धि वापस लो, रिलायंस के खातों की जांच कराओ, रिलायंस से तेल-गैस क्षेत्र छीनना होगा, अंबानी को गैस-तेल क्षेत्र से बाहर करो, रिलायंस से तेल-गैस के कुएं जबत करो आदि नारे लिखी तख्तियों लेकर पर्चों और स्टीकर के माध्यम से जनजागरुकता करते हुए जनपथ, टैंपो स्टैंड, लखनऊ पर हस्ताक्षर अभियान चलाया।
गैस मूल्य वृद्धि के खिलाफ नागरिक आंदोलन के संयोजक रामकृष्ण ने कहा कि अंबानी के दबाव में पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस के दाम दोगुना करने का जो निर्णय लिया है उससे पूरे आम जनमानस का जीना दूभर हो जाएगा। चुनाव के दौरान बढ़ी बेतहाशा महंगाई की वजह से जहां जनता पहले से ही परेशान है वहां गैस मूल्य वृद्धि के सरकार के जनविरोधी निर्णय का दिखने वाला असर सबसे पहले कस्बाई-शहरी क्षेत्रों में चलने वाले आटो-टैक्सी चालकों व यात्रियों पर पड़ेगा। ऐसे में हमने आज जनपथ टैंपो स्टैंड पर इस अभियान की शुरूआत की।
नागरिक परिषद के केके शुक्ला ने कहा कि अंबानी जैसे पूंजीपति को लाभ पहुंचाने के लिए जिस तरह सरकार ने गैस मूल्यों में दोगुना वृद्धि करने का निर्णय लिया है उससे साफ हो जाता है कि हमारी सरकारें आम जनता के प्रति नहीं बल्कि अंबानी जैसे पूजिपतियों की हितैषी है। उन्होंने कहा कि दोगुना गैस मूल्य वृद्धि का सीधा असर रासायनिक खाद जैसे उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ेगा।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब और फहीम सिद्दीकी ने कहा कि हमारे देश का किसान मौजूदा दौर की रासायनिक खाद के मूल्य को वहन नहीं कर पा रहा है, इस निर्णय के बाद जब गैस के दाम दोगुना हो जाएंगे तो उसे मजबूरन खेती छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ गैस मूल्य वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के किसानों को खेती से अलग करने का षडयंत्र भी है, जिससे बड़े-बड़े मल्टीनेशनल्स अपने फार्म हाउस बनाकर खेती करें। गैस मूल्य वृद्धि का यह निर्णय किसान को मजबूर कर मजदूर बनाने का निर्णय है।
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा सिंह और ज्योति राय ने कहा कि जनअभियान में टैंपो संचालकों से मिल रहे समर्थन और आम जनमानस में सरकार के गैस मूल्य वृद्धि के निर्णय के खिलाफ बढ़ रहे असंतोष ने अस्पष्ट कर दिया है कि अगर सरकार गैस मूल्य वृद्धि का निर्णय नहीं वापस लेती तो एक बड़े जनांदोलन का सामना करने के लिए तैयार हो जाए। क्योंकि अंबानी जैसे पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए जनता अपनी आहूति नहीं देगी बल्कि इन कारपोरेट के साम्राज्य को ध्वस्त करने में भूमिका निभाएगी।
आज के अभियान में एमके सिंह, ओपी सिन्हा, अरुणा सिंह, फहीम सिद्दिकी, केके शुक्ला, मोहम्मद शुएब, विनीत मिश्रा, ज्योती राय, रीतेश मिश्रा, लता राय, रोहित कुमार, सत्येन्द्र कुमार, महेश देवा, रीता सिंह, अखिलेश सक्सेना, वीरेन्द्र त्रिपाठी और राजीव यादव आदि शामिल रहे।