चर्च पर हमले- आईएसआईएस के सरगना भी खुश थे कि उनकी बिरादरी का डीएनए मिल गया भारत में

चर्च पर हमले – हमलावर होना हिन्दुत्व की विशेषता है। हमलावर हाथ हिन्दुत्व के साथ, हिन्दू बनो संविधान तोड़ो हिसार में चर्च पर हमले से दो काम हुए हैं, पहला 1857 के शहीदों का अपमान हुआ है, दूसरा धार्मिक हमलावरों की अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में हमलावरसेना शामिल हुई है। 
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प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी

चर्च पर हमले – हमलावर होना हिन्दुत्व की विशेषता है।

हमलावर हाथ हिन्दुत्व के साथ, हिन्दू बनो संविधान तोड़ो

हिसार में चर्च पर हमले से दो काम हुए हैं, पहला 1857 के शहीदों का अपमान हुआ है, दूसरा धार्मिक हमलावरों की अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में हमलावरसेना शामिल हुई है। अब उनके आईएसआईएस और अलकायदा के बराबर दर्जा मिलने की संभावनाएं बढ़ गयी हैं। सारी दुनिया में मीडिया गौरवगुरु का पद उनको मिल गया है। अब वे अलकायदा आदि के बराबर 56 इंच का सीना तानकर खड़े हो सकते हैं> चर्च पर हमले करके और इन हमलों की स्पीड बढ़ाकर सारी दुनिया में भारत का टखना ऊँचा किया है। अमेरिका के घृणा उद्योग के मालिक खुश हैं उनके भारतीय बटुक ठीक दिशा में काम कर रहे हैं। आईएसआईएस के सरगना भी कल खुश थे कि उनकी बिरादरी का भारत में डीएनए मिल गया है। चर्च पर हमले, नन के साथ बलात्कार ये दो डीएनए रिपोर्ट हैं जो हमें याद दिला रही हैं कि हम अब एकदम सुरक्षित हाथों में हैं। इन हमलावरों के हाथ अनेक और विशाल हैं। हर हाथ काम पर लगा है, हमलावर है। हमलावर होना हिन्दुत्व की विशेषता है।

ये हमलावर एक हाथ से हमला करते हैं, दूसरे से रेप, तीसरे से किताबें छीनते हैं,चौथे से बाइबिल छीनते हैं, पांचवें से किसानों की जमीन छीनते हैं, छठे हाथ से अमीरों को सब्सिडी देते हैं, सातवें हाथ से हिन्दुओं को खूब बच्चे पैदा करो की अपील जारी करते हैं, आठवें हाथ से पद्म इनाम छीनते हैं। हमलावर खुश हैं कि उनके सारे हाथ व्यस्त हैं और सबके पास काम है। उनके आका मोहनजी भी खुश हैं कि सारे हाथ काम कर रहे हैं, कोई ठलुआ नहीं बैठा है। हर हाथ हमलावर बने यही तो देश की शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
हमलावर हाथ जितनी जल्दी चलेंगे देश उतनी ही जल्दी हिन्दू बनेगा। हमारा तो एक ही नारा है हमलावर हाथ हिन्दुत्व के साथ, हिन्दू बनो संविधान तोड़ो। हिन्दू बनो नागरिकता छोड़ो। नागरिक -नागरिक कहकर देश का साठ साल से अपमान हुआ है, हम नागरिकों को हिन्दू बनाकर ही दम लेंगे। हमने गाएं सुरक्षित कर ली हैं, अब देश में दूध ही दूध होगा, मंदिर ही मंदिर होंगे, कहीं पर न कोई मसजिद होगी और न गिरिजाघर होगा। हम होंगे, भगवा झंड़े होंगे, मस्तान टोलियां होंगी, बत्रा-सत्रा-आगवत-भागवत के सुभाषित होंगे, देशी गाय का दूध होगा, पानी की नदियां गाय की दूध की नदियों में बदल दी जाएंगी, क्योंकि हमारे पास भगीरथ जैसा नायक है। नायक होगा, हम होंगे, फेसबुक भक्त होंगे, जय श्री मोहन जयश्री मोहन, जै भगीरथ जै भगीरथ का जयघोष होगा।

प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी की 17 मार्च 2015 की एफबी पोस्ट साभार

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