नेता जी का स्वागत और शहीद-ए-आजम के गले में फंदा !

शहीद-ए-आजम की प्रतिमा का सपा कार्यकर्ताओं पर अपमान का लगा आरोप सहारनपुर। एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव स्वतन्त्रता आन्दोलन में अमर शहीदों और उनकी कुरबानी को सम्मान देने और उनसे सीख लेने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके कार्यकर्ता और नेतागण अपने नेता जी को प्रधानमंत्री बनाने के …
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शहीद-ए-आजम की प्रतिमा का सपा कार्यकर्ताओं पर अपमान का लगा आरोप
सहारनपुर। एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव स्वतन्त्रता आन्दोलन में अमर शहीदों और उनकी कुरबानी को सम्मान देने और उनसे सीख लेने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनके कार्यकर्ता और नेतागण अपने नेता जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए जोश में होश खोकर जंगे आज़ादी के नायकों का सरेआम अपमान कर रहे हैं।
दरअसल मंगलवार दिनाँक 11 फरवरी 2014 को सहारनपुर में सपा की महारैली थी। इस अवसर पर सहारनपुर शहर के मुख्य घन्टाघर चौक पर शहीदे-आजम भगत सिंह की रखी गयी मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं।
सपा ने अपनी रैली के प्रचार-प्रसार में झंडियों से शहीद-ए-आजम की मूर्ति को गले एवं शरीर से बाँधकर बिजली के खम्भे की तरह इस्तेमाल किया। अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन ने ऐसे चित्र जारी करते हुये कहा है कि ये सरासर बेहूदगी का नजारा है जो अमर शहीदों के प्रति उनका अपमान सुलभ बर्ताव है, इन्हें इस बात की कोई फ्रिक नहीं है कि शोषित-वंचित खासकर के नौजवानों में महान क्रान्तिकारी का एक विशेष दर्जा है जिन्हें वो अपना आदर्श मानते हैं।
अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के महासचिव अशोक चौधरी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अपने नेताओं को चमकाने के लिये शहीदों की मूर्तियों का बिजली के खम्भे की तरह इस्तेमाल करना आज की राजनैतिक पार्टियों की बेहूदा कार्यवाही है। उन्होंने कहा कि केवल सपा ही नहीं लगभग सभी राजनैतिक व गैर राजनैतिक पार्टियाँ इसी तरह शहीदों का अपमान करती रहती हैं। अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन इस घिनौने कार्य की निन्दा करती है। उन्होंने माँग की कि जनता के सामने इस निन्दनीय काम के लिये समादवादी पार्टी माफी माँगें। चुनाव व सरकार तो आती जाती रहेगी, लेकिन इन शहीदों का बलिदान आज भी अमर है।