मोदी-राहुल-केजरीवाल से बीस सवाल

नई दिल्ली। आमूल व्यवस्था परिवर्तन की क्रांतिकारी राजनीति के लिए समर्पित दल समाजवादी जन परिषद ने भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के हाईकमान राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के सीईओ अरविंद केजरीवाल से पूछा है कि “आप तीनों प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। लेकिन आप जनता के असली मुद्दों पर बात क्यों …
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नई दिल्ली। आमूल व्यवस्था परिवर्तन की क्रांतिकारी राजनीति के लिए समर्पित दल समाजवादी जन परिषद ने भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस के हाईकमान राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के सीईओ अरविंद केजरीवाल से पूछा है कि “आप तीनों प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। लेकिन आप जनता के असली मुद्दों पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं ? गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, भुखमरी-कुपोषण, महंगाई, मजदूरों-किसानों का शोषण, शिक्षा और इलाज की बदहाली, दलितों-महिलाओं पर अत्याचार, फिरकापरस्ती जैसी गंभीर समस्याओं से क्या आपका कोई सरोकार नहीं है ? इन मुद्दों को छोड़कर शिगूफेबाजी और नौटंकियां क्यों कर रहे हैं ?”   
सजप ने 20 सवाल पूछकर जनता के असली मुद्दे उठाते हुए एक परचा जारी करते हुए अवाम से अपील की है कि वह इन सवालों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित-प्रसारित करे। इस पर्चे के साथ कुछ रेखा चित्र भी जारी किए हैं।
सजप द्वारा जारी सवाल निम्नवत् हैं –
जवाब दो, बहस करो
मोदी-राहुल-केजरीवाल से
बीस सवाल
1. जनता के असली मुद्दे
आप तीनों प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं। लेकिन आप जनता के असली मुद्दों पर बात क्यों नहीं कर रहे हैं ? गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन, भुखमरी-कुपोषण, महंगाई, मजदूरों-किसानों का शोषण, शिक्षा और इलाज की बदहाली, दलितों-महिलाओं पर अत्याचार, फिरकापरस्ती जैसी गंभीर समस्याओं से क्या आपका कोई सरोकार नहीं है ? इन मुद्दों को छोड़कर शिगूफेबाजी और नौटंकियां क्यों कर रहे हैं ?
2. बेरोजगारी
देश में जबरदस्त बेरोजगारी है। काम की तलाश में नौजवानों को घर छोड़कर सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसे आप कैसे दूर करेंगे ? वैश्वीकरण-उदारीकरण के दौर में लाखो छोटे व कुटीर उद्योग-धंधे बंद हो गए है। मशीनीकरण ने भी रोजगार नष्ट किए हैं। आप इस रोजगारनाशी विकास को पलटने के लिए तैयार हैं या नहीं ?
3. मजदूरी
मजदूरी घट रही है, महंगाई बढ़ रही है। मनरेगा में सरकार न्यूनतम मजदूरी भी देने को तैयार नहीं है। सरकारी काम हो या प्राईवेट, अब पक्की (स्थाई) नौकरी और पेंशन नहीं दी जा रही है। इस मामले में आप चुप क्यों हैं ? आम आदमी पारटी ने दिल्ली में वादा करके भी ठेका मजदूरी प्रथा खतम क्यों नहीं की?
4. सातवां वेतन आयोग
जब सरकार के पास पैसा कम है तो पांचवे और छठे वेतन आयोग ने अफसरों-प्रोफेसरों के वेतन बेतहाशा क्यों बढ़ाए ? फिर सांतवें वेतन आयोग की घोषणा क्यों ? देश के साधारण मेहनतकश लोगों (जिनकी मेहनत से देश चल रहा है) की आमदनी की परवाह आपको क्यों नहीं है ?
5. किसानों की बदहाली
किसान देश का अन्नदाता है। वह बदहाल क्यों है ? पिछले 19 सालों में देश के तीन लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। गुजरात में भी बड़ी तादाद में किसानों ने खुदकुशी की है। क्या इसके लिए आप सब अपराधी नहीं है ? देश की खेती-किसानी की बरबादी पर टिकी मौजूदा व्यवस्था को आप कैसे बदलेंगे ?
6. एक सी विकासनीति – अर्थनीति
गुजरात विकास मॉडल की पोल खुल चुकी है। लेकिन पूरे देश का मॉडल वही है। इस से ही तो देश की यह हालत हुई है। केजरीवाल जी ने यह नहीं बताया कि उनका मॉडल क्या है और वह कैसे मोदी-मनमोहन के मॉडल से अलग है?
7. कंपनी राज  
हर सरकार कंपनियों की खुशामद कर रही है, उनके लिए किसानों – आदिवासियों को उजाड़ रही है, जंगल, नदियों व पर्यावरण को नष्ट कर रही है और बड़े-बड़े घोटाले कर रही है। कंपनियां बड़ी हैं या देश की जनता ? केजरीवालजी ने केवल एक कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला है। बाकी कंपनियांे में उन्हें कोई दोष क्यों नजर नहीं आता ?
8. विदेशी पूंजी
जिस आजादी को हमारे पुरखों ने इतने बलिदान से हासिल किया, उसको गंवाते हुए सारी सरकारें विदेशी कंपनियों को बुला रही हैं, देश का जल-जंगल-जमीन-खनिज, देश का श्रम और देश के बाजारों को लूटने की छूट दे रही है। क्या यह देश के साथ गद्दारी नहीं है ? केजरीवालजी, आपका भी क्या कहना है ? साफ करें।
9. सबसे बड़ा घोटाला
भारत सरकार ने पिछले आठ सालों में 4 केन्द्रीय करों में कंपनियों और अमीरों को 31,88,752 करोड़ रु. (करीब 319 खरब रुपए) की छूट एवं माफी दी है। इसके अलावा राज्य सरकारों द्वारा करमाफी, अनुदान, सस्ती जमीन-पानी-बिजली-ख्निज-कर्ज के उपहार अलग हैं। यह इस गरीब देश के खजाने की एक बड़ी लूट है। देश के इस सबसे बड़े महाघोटाले में या तो आप शामिल हैं या इस पर चुप हैं। क्यों ?
10. पर्यावरण रक्षा
गंगा या दूसरी नदियों को बचाने की बात आप करते हैं। लेकिन इनकी बरबादी की जड़ तो आधुनिक विकास, शहरीकरण और औद्योगीकरण में हैं, उस पर आप कुछ क्यों नहीं बोलते ? जंगल, जमीन, हवा, जीवों को बचाने की कोई चिंता आपके एजेण्डे में क्यों नहीं है ? जीन-परिवर्तित बीजों और परमाणु बिजली जैसी खतरनाक तकनालाजी पर पूरी पाबंदी आप क्यों नहीं चाहते?
11. शिक्षा का व्यापार 
आज 100 में से 11 बच्चे ही कालेज पहुंच पाते है। 62 बच्चे 10 वीं के पहले पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। भारतीय संविधान में दी गई जिम्मेदारी से भागते हुए, सरकारों ने शिक्षा का काम निजी मुनाफाखोरो के हवाले कर दिया है। इसका मतलब है कि केवल पैसे वालों को ही शिक्षा मिलेगी, वह भी बाजारू शिक्षा। वह दिन कब आएगा जब देश के हर बच्चे को बिना भेदभाव के अच्छी, सार्थक शिक्षा मिलेगी ? पड़ोसी स्कूल पर आधारित साझा-समान स्कूल प्रणाली से ही पूरा देश शिक्षित हो सकेगा। आप इसे मानते है या नहीं ?
12. इलाज नहीं 
इसी तरह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को बरबाद करते हुए, डॉक्टरों, निजी अस्पतालों और दवा कंपनियों को जनता को लूटने की पूरी छूट क्यों दी गई है ? इलाज के अभाव में देश के लोग तड़प-तड़प के मरें या नीम-हकीमों या तंत्र-मंत्र के चक्कर में ठगे जाते रहें, क्या यही आपका सुशासन और स्वराज है ?
13. अंगरेजी की गुलामी    
अंगरेज चले गए, लेकिन आज भी अंगरेजी का राज देश में हर जगह बना हुआ है। इससे करोड़ों बच्चे-नौजवान कुंठित होते हैं, ऊपर बैठे मुट्ठी भर लोगों का राज और एकाधिकार चलता रहता है और पूरा देश नकलची बना रहता है। इस बारे में आप लोगों ने क्यों कुछ नहीं किया ? चुप क्यों हैं ?
14. महिलाओं-दलितों को न्याय   
शूद्रों और महिलाओं को नीचा दर्जा देने वाली मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ आप कुछ बोलते-करते नहीं। जाति व्यवस्था का विनाश और पुरुष प्रधान ढांचे को बदलना आपका लक्ष्य नहीं दिखाई देता। तब क्या महिलाओं, दलितों, पिछड़ों की आपकी बातें ढकोसला नहीं हैं ? व्यवस्था-परिवर्तन नहीं, केवल सत्ता-परिवर्तन की जुगाड़ में आप लगे हैं, क्या यही माना जाए ?
15. नशाखोरी
महिलाओं पर अत्याचारों, अपराधों और परिवारों की बरबादी का एक बड़ा कारण बढ़ती नशाखोरी है। फिर हर सरकार शराब, गुटके, सिगरेट बिक्री को खूब बढ़ावा क्यों दे रही है ?
16. फिरकापरस्ती
देश में भाई-भाई को लड़ाने वाली और नफरत का जहर फैलाने वाली फिरकापरस्ती को लोगों के दिलो-दिमाग से हटाने के लिए आपने क्या किया ? मोदी तो उसी की उपज हैं, लेकिन राहुल-केजरीवाल जी आपको भी जवाब देना होगा। बगल में मुजफ्फरनगर में भीषण मारकाट हुई, लेकिन दिल्ली चुनाव में आम आदमी पारटी इस पर चुप रही। केजरीवाल जी गुजरात गए, मोदी को चुनौती दी, लेकिन 2002 की भयानक हिंसा पर नहीं बोले। क्या ऐसी मौकापरस्ती और समझौतावाद से देश में धर्मांधता और कट्टरपंथ के राक्षस से लड़ा जा सकता है ?
17. पैराशूट उम्मीदवार
सारी पारटियां इस चुनाव में अचानक ऊपर से लाकर हाई-फाई उम्मीदवार (फिल्मी सितारे, रिटायर्ड अफसर, कंपनी मेनेजर, क्रिकेट खिलाड़ी) आसमान से टपका रही है। दलबदलुओं और पैसे वालों को टिकिट दे रही हैं। क्या आप लोगों का कोई ईमान-धरम नहीं है ? जमीन की राजनीति, लोगों की भागीदारी, पारदर्शिता, स्वच्छ राजनीति की बड़ी-बड़ी बातों का क्या हुआ ?
18. कथनी-करनी में फरक
कभी आप मेट्रो या लोकल ट्रेन में चलने का कार्यक्रम करते हैं और कभी चार्टर्ड विमान से जाते हैं। एक आदमी के लिए पूरा हवाईजहाज जाने में कितना खरचा हुआ होगा, कितना पेट्रोल जला होगा, कितना कार्बन फुटप्रिंट छोड़ा होगा, क्या आपने सोचा है? कभी आप आम आदमी की बात करते हैं और कभी 20 हजार रु. वाला डिनर आयोजित करते हैं। क्या ये नौटंकियां नहीं हैं ?
19. व्यक्ति-पूजा
भारतीय राजनीति की एक बड़ी बीमारी है कि यहां नेता, दल और सिद्धांत से बड़े हो जाते हैं। उन्हें चमत्कारिक पुरुष के रूप में पेश किया जाता है। मानो उनके प्रधानमंत्री बनते ही देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी। यह ठीक वैसा ही है जैसे सामाजिक जीवन में बाबाओं और गुरुओं के चमत्कारों से सब कुछ ठीक होने का भरोसा पैदा किया जाता है। भारतीय राजनीति में इस अवतारवाद, बाबावाद, चमत्कारवाद, व्यक्ति-पूजा और विचारहीनता को बढ़ाने के लिए क्या आप तीनों दोषी नहीं है?
अंत में
20. नरेन्द्र मोदी जी       
आप में जबरदस्त कंपनीपरस्ती, सांप्रदायिक कट्टरता और तानाशाही तीनों का मेल दिखाई दे रहा है। क्या आप देश को हिटलरशाही के रास्ते पर नहीं ले जा रहे हैं, जिसके भयानक नतीजे होंगे ? आप पूरे देश को गुजरात बनाना चाहते हैं, तो क्या पूरे देश में 2002 जैसी भयानक मारकाट होगी, फर्जी मुठभेड़ों की बाढ़ लाएंगे और किसानों की जमीन छीनकर कंपनियों को देंगे ?
राहुल गांधी जी  
पिछले तेईस साल से निजीकरण-उदारीकरण-वैश्वीकरण की घोर जन-विरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार कांग्रेस राज रहा है। पिछले दस सालों में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार बेतहाशा बढ़ते गए, तब आप कहां थे ? अब जनता कांग्रेस को वोट क्यों दे ?
अरविंद केजरीवाल जी  
आपसे देश को बड़ी उम्मीद थी। लेकिन आपने पचास दिन भी सरकार नहीं चलायी और ‘रणछोड़दास’ क्यों बन गए ? क्या केवल लोकपाल कानून से देश की समस्याएं हल हो जाएंगी ? कांग्रेस और भाजपा की नीतियों से आपकी नीतियां कहां अलग हैं ? जिस पूंजीवाद ने दुनिया में नए-नए संकट खड़े किए और जो आज खुद संकट में हैं, उसके समर्थक बनकर आप कौन सी नई राजनीति कर रहे हैं ?
यदि देश की जनता के इन ज्वलंत सवालों का आप जवाब नहीं देते हैं, तो माना जाएगा कि आपके इरादे नेक नहीं है।
घिरे हैं हम सवालों से, हमें जवाब चाहिए
समाजवादी जन परिषद
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