यूपी में ये कैसी मोदी हवा- 40 सीटों पर ”उधारी” राजनेताओं पर दांव

दिनेश शाक्य लखनऊ। नरेंद्र मोदी की हवा में तमाम राजनेता बिना हाथ पैर चलाये अपनी नैया पार करने की फिराक में हैं लेकिन इसके बावजूद भाजपा को उत्तर प्रदेश की 40 सीटों पर उधार के राजनेताओं पर दांव लगाना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि जब नरेंद्र मोदी की हवा …
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दिनेश शाक्य
लखनऊ। नरेंद्र मोदी की हवा में तमाम राजनेता बिना हाथ पैर चलाये अपनी नैया पार करने की फिराक में हैं लेकिन इसके बावजूद भाजपा को उत्तर प्रदेश की 40 सीटों पर उधार के राजनेताओं पर दांव लगाना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि जब नरेंद्र मोदी की हवा है तो फिर भाजपा अपने दल से 40 सीटों पर उम्मीदवार अपने दल से क्यों नहीं खोज पा रही है और दूसरे दलों के राजनेताओं पर भरोसा जता रही है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की गूँज बड़े पैमाने पर पूरे देश में सुनाई दे रही है और तमाम सर्वेक्षण उनको करीब-करीब प्रधानमंत्री बन जाने की घोषणाएं भी कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने उम्मीदवारों को अब तब तक तय नहीं कर पा रही है।
भाजपा के जिम्मेदार उच्च पदस्थ पदाधिकारियों की बात को मानें तो भाजपा 40 से अधिक लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को अब तक तय नही कर पा रही है। दूसरे शब्दो में कहें तो भाजपा दूसरे दलों के नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाने का दांव खेलने की तैयारी मे लगी हुई है।
जो खबरें भाजपाई कैंप से मिल रही हैं उनमें कहा जा रहा है कि भले ही नरेंद्र मोदी मीडिया प्रचार में सबसे आगे चल रहे हों लेकिन उनके दल यानि भाजपा के पास ऐसे राजनेताओं का बड़े स्तर पर अभाव देखा जा रहा है जिन पर दांव खेला जा सके।
इन्हीं भाजपाईयों के हवाले से कहा जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह अपनी गाजियाबाद सीट को छोड़ कर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से टिकट माँग रहे हैं। ऐसे मे सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिस दल के कमाण्डर की अगुवाई मे नरेंद्र मोदी का चुनाव होने वाला है जब वही अपनी सीट को छोड़ करके दूसरी जगह खोजने में लगा हुआ है तो जाहिर है कि दूसरे इलाकों का हाल क्या हो सकता है। भाजपा की ओर से राजनाथ सिंह के इस कदम को आलोचनात्मक कहा जा रहा है।
भाजपाईयों का दावा है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की सलेमपुर सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा के बेटे रवींद्र कुशवाहा, जिन्होंने हाल मे ही भाजपा ज्वाइन की है, उनको टिकट देने की तैयारी की जा रही है जब कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बड़े बेटे पंकज शेखर का नाम भी टिकट की दौड़ में शामिल है। पंकज के छोटे भाई नीरज शेखर मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी से सांसद हैं।
बुंदेलखंड की हमीरपुर सीट से बसपा के निलंबित सांसद विजय बहादुर सिंह को टिकट देने की कवायत की जा रही है, जिनको पिछले साल नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण बसपा से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। राजधानी लखनऊ से सटी मोहनलाल गंज सुरक्षित लोकसभा सीट से पूर्व कम्युनिस्ट कौशल किशोर सिंह को टिकट देने की भूमिका राजनाथ सिंह की ओर से पूरी तरह से बना ली गई है क्यों कि राजनाथ सिंह ने ही पिछले दिनों दिल्ली मे कौशल को भाजपा मे शामिल कराया है।
कैसरगंज से समाजवादी पार्टी के सांसद बृजभूषण सिंह खुद अपने बेटे प्रतीक सिंह को अपनी सीट से लड़ाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं क्यों कि प्रतीक भाजपा में है और बृजभूषण सिंह समाजवादी पार्टी में ही हैं। बृजभूषण सिंह खुद अपने लिए गोंडा  या फैजाबाद से टिकट माँग रहे हैं। बताते चले कि बृजभूषण सिंह को पिछले दिनों समाजवादी पार्टी से टिकट दिया गया था लेकिन उन्होंने खुद ही टिकट वापस कर दिया।
सीतापुर से राजेश वर्मा को टिकट देने की फिराक में है भाजपा। जब कि राजेश वर्मा बसपा से दो बार सांसद रह चुके हैं। 2009 में बसपा से धौरहरा से लड़ चुके हैं लेकिन जितिन प्रसाद से चुनाव हार चुके हैं। राजेश वर्मा ने नई दिल्ली में राजनाथ सिंह के सामने भाजपा ज्वाइन कर ली। लेकिन जैसे ही उनकी खबर सीतापुर तक आई तो राजेश वर्मा का स्थानीय के साथ प्रदेश ईकाई भी विरोध पर उतर आई। सीतापुर के लोगों ने प्रदेश भाजपा कार्यालय पर जाकर विरोध भी किया।
आंवला से भाजपा सांसद मेनका गांधी को टिकट देने बजाय पीलीभीत से दिया जा रहा है जब कि आंवला से धर्मेंद कश्यप पर भाजपा दांव लगा रही है जो 2009 मे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर मेनका गांधी से चंद वोटो से हार गये थे।
भाजपा हरदोई से अंशुल वर्मा को टिकट देने की तैयारी में है, यह सपा के गोपामऊ विधायक श्यामप्रकाश के भतीजे हैं। इनका नाम स्थानीय भाजपा ईकाई ने पहले नंबर पर पैनल मे डाल करके रखा हुआ है जब कि दूसरे नंबर है प्रभाष कुमार का जो ब्लॉक प्रमुख हैं। प्रभाष कुमार बसपा सरकार मे मंत्री रहे रामपाल वर्मा के भतीजे और मिश्रिख से बसपा सांसद अशोक रावत के चचेरे भाई हैं। तीसरे पर अशोक वर्मा हैं जो पिछले विधानसभा चुनाव में पीस पार्टी से चुनाव मैदान में उतर चुके हैं।
मिश्रिख सीट से गृह राज्य मंत्री रहे रामलाल राही के बेटे सुरेश राही, दो बार बसपा के विधायक रहे और 2012 में सपा के टिकट पर चुनाव लडने वाले सतीश वर्मा की बीबी अंजूबाला, जो मल्लांवा ब्लाक प्रमुख हैं, मोहनलाल गंज से सांसद रही पूर्णिमा वर्मा भाजपा के टिकट की दावेदार बनी हुई हैं।
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के जिले इटावा की सीट की बात करें तो यहाँ पर भी अन्य जगह की ही तरह से बसपा सरकार मे मंत्री रहे अशोक दोहरे को भाजपा मे शामिल करने के बाद से लगातार विरोध इस बाबत जारी है। अगर उनको टिकट दिया गया तो भाजपाई बड़े पैमाने पर अशोक दोहरे को हराने का काम करेंगे। फिर भी अशोक दोहरे पर ही भाजपा के कुछ बड़े राजनेता दांव खेलने का मन बनाये हुए हैं और हाईकमान को इस बात के लिए मनाने में भी लगे हुए हैं कि अशोक दोहरे ही मुलायम गढ़ में कामयाब हो सकते है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. रामगोपाल यादव पहले ही कह चुके है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ टीवी पर नजर आते हैं जमीन पर हकीकत में ऐसा नही है जैसा टीवी पर छाया रहता है। उनकी बात को काफी हद तक इसलिए सही भी माना जा सकता है।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क