साम्प्रदायिक दंगे व्यावसायिक लोग करवाते हैं

ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम का 13वां राष्ट्रीय अधिवेशन             23-24 मार्च 2014 नवसाधना – वाराणसी                प्रथम दिवस (23-03-2014) सेन्टर फॉर हारमोनी एण्ड पीस एवं ऑक्सफ़ेम इण्डिया द्वारा आयोजित ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम का ’’13वां राष्ट्रीय अधिवेशन’’ 23 और 24 मार्च 2014 को नवसाधना के सà¤à¤¾à¤—ार में सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय अधिवेशन में 14 राज्यों सिक्किम, …
 | 

ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम का 13वां राष्ट्रीय अधिवेशन
             23-24 मार्च 2014 नवसाधना – वाराणसी
                प्रथम दिवस (23-03-2014)
सेन्टर फॉर हारमोनी एण्ड पीस एवं ऑक्सफ़ेम इण्डिया द्वारा आयोजित ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम का ’’13वां राष्ट्रीय अधिवेशन’’ 23 और 24 मार्च 2014 को नवसाधना के सभागार में सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय अधिवेशन में 14 राज्यों सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेष, छत्तीसगढ़, ओडीषा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखण्ड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
 अधिवेशन के प्रथम सत्र की शुरुआत करते हुये ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम (यू0 पी0) एवं अधिवेशन के संयोजक डा0 मोहम्मद आरिफ़ ने 14 राज्यों से आये हुये प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुये अधिवेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि आज ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम का अधिवेशन ऐसे समय में हो रहा है, जब साम्प्रदायिक ताक़तें राज्य सत्ता पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही हैं। साम्प्रदायिकता बुरी चीज़ है पर उससे भी बुरी है साम्प्रदायिक राजनीति। बनारस में इस अधिवेशन के आयोजन का महत्व इसलिये भी है, कि नरेन्द्र मोदी यहाँ से भाजपा के प्रत्याशी हैं और वे वाराणसी को भी साम्प्रदायिकता का गढ़ बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस अधिवेशन में आये हुये प्रतिनिधियों को इस समस्या को समझना होगा तथा इसका हल निकालना होगा कि साम्प्रदायिक ताक़तों को किस प्रकार उखाड़ फेंका जाये। और उन्होंने आशा की, कि वाराणसी के अधिवेशन के बाद जो कार्यक्रम बनेगा उससे देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से निपटने की संभावना बढ़ेगी।
  फ़ोरम के राष्ट्रीय संयोंजक एल0 एस0 हरदेनिया ने बताया कि 2001 में मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल पचमढ़ी में फोरम का गठन किया गया था। पचमढ़ी में देश के विभिन्न भागों से आए हुये प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। एक लंबे विचार-विमर्श के बाद यह तय किया गया कि देश की धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता है। यह आम राय थी कि देश के सेक्युलर ढांचे को बचाने के लिये और उसे मजबूत करने के लिये एक मंच की आवश्यकता थी। तदानुसार मंच का गठन किया गया। उसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में मंच की शाखाएं गठित की गयीं। पिछले वर्षों में मंच के अधिवेशन विभिन्न राज्यों में आयोजित किए गए। मंच के तत्वावधान में अनेक कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित किए गए। 2002 के गुजरात में हुई हिंसा और उसके बाद मंच ने रचनात्मक भूमिका निभाई। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। वाराणसी में आयोजित इस अधिवेशन में देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर विचार किया जाएगा और इनका निदान खोजा जाएगा।
  इसके बाद एल0 एस0 हरदेनिया ने फ़ोरम कार्यकर्ताओं के कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विगत वर्ष फ़ोरम का कार्य सराहनीय रहा और फ़ोरम ने धर्मनिरपेक्षता और प्रजातान्त्रिक मूल्यों के लिये सतत संघर्ष किया फिर भी अभी हम अपने उद्देश्यों को पूरा नही कर पाये। हमारी उपस्थिति अनेक राज्यों में उल्लेखनीय नहीं है, हमें और संघर्ष करने की आवश्यकता है, जिससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त हों सके तथा एक समता मूलक समाज और खुशहाल राष्ट्र का निर्माण कर सकें।
   राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन करते हुये मुख्य अतिथि प्रो0 दीपक मलिक ने अपने सारगर्भित भाषण में कहा कि वाराणसी एक रण क्षेत्र बन गया है। यहां हमें एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ना है। वाराणसी में कुछ लोग सर्वधर्मसमभाव के ढांचे को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों का नेतृत्व इन काली ताकतों ने नरेन्द्र मोदी के हाथों में सौंपा है। इस समय वाराणसी में अत्यधिक जहरीला वातावरण बनाने का प्रयास जारी है। न सिर्फ वाराणसी में वरन पूरे देश में मीडिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा सफेद झूठ फैला रहा है। तथाकथित ओपीनियन पोल के माध्यम से प्रतिक्रियावादियों की ताकत को बढ़ाचढ़ा कर बताया जा रहा है। जो ताकतें सत्ता पर काबिज होना चाहती हैं वे सत्ता में आकर भारत के वर्तमान ढांचे को तोड़ना चाहती हैं। इन ताकतों का भरोसा है कि मोदी का तानाशाही व्यक्तित्व यह काम कर सकेगा। देश के बड़े-बड़े कार्पोरेट घराने मोदी का साथ दे रहे हैं। अंबानी ने तो अपना खजाना उनके लिये खोल दिया है। क्या इस बात को भुलाया जा सकता है कि कांग्रेस ने ही अंबानी को बढ़ाया है। हमें इस बात का संतोष है कि हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष ताकतें मजबूत हो रही हैं। मैं बांग्लादेश गया था, वहां मैंने धर्मनिरपेक्षता की बढ़ती हुई ताकतों को स्वयं देखा। उन्होंने अंत में कहा कि हमारी लड़ाई देश को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि वाजपेयी, आडवाणी ने तो कुछ हद तक संविधान को स्वीकार किया था परंतु मोदी से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि यह ऐतिहासिक लड़ाई हमें लड़ना है भले ही हमारे कंधे कितने ही कमजोर हों। आप सब देश की साईलेंट मेजोरिटी के प्रतिनिधि हैं। अंत में प्रोफेसर मलिक ने सम्मेलन की सफलता की कामना की।
    अधिवेशन के दूसरे सत्र को सम्बोधित करते हुये उ0 प्र0 के प्रतिनिधि प्रो0 आनन्द दीपायन ने कहा कि देश में साम्प्रदायिक ताक़तों का उभार तीव्र गति से हो रहा है। ऐसे में लोकतन्त्र की रक्षा के लिये, फासीवादी ताक़तों को परास्त करने के लिये, धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को मज़बूती से खड़ा होना होगा। आज साम्प्रदायिक ताक़तों के हौसले बुलन्दी पर हैं। चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिये साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। जैसा हमेशा होता आया है कि कुछ राजनैतिक दल साम्प्रदायिकता व झूठी अफ़वाहों का सहारा लेकर जनता मे उन्माद पैदा कर राज्य पर कब्ज़ा करना चाहते हैं। उनके फासीवादी मन्सूबों को ध्वस्त करने के लिये जनता को आगे आना होगा। उन ताक़तों को जो धर्मनिरपेक्ष है, लोकतन्त्र के लिये प्रतिबद्ध हैं उन्हें फासीवादी ताक़तो से लड़ना होगा।
  पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि ईमानुलहक़ ने पश्चिम बंगाल में साम्प्रदायिक ताकतों के उभार पर चर्चा करते हुये कहा कि दंगों का असर प्रदेश या राज्य स्तर तक नही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर तक पड़ता है। दंगे में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग भी शामिल होते हैं और दंगों में पुलिस हमेशा मूक दर्शक बनी रहती है। इस संदर्भ में हमें साम्प्रदायिकता के खिलाफ़ एक बहुत ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
     पश्चिम बंगाल के सुमन भट्टाचार्य का कहना था कि बंगाल में वामपंथ खतरे में है, और प्रतिक्रियावादी ताकतों का खतरा उत्तरप्रदेश से ज्यादा है। हम चाहते हैं कि वहां वामपंथ जीतें। ममता बेनर्जी कौनसी करवट लेगी यह नहीं कहा जा सकता।
  फादर अजय ने उड़ीसा की स्थिति की बात करते हुये कहा कि वहां भी धर्म परिवर्तन संबंधी कानून बनाया गया है। कंधमाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुये उन्होंने कहा कि वहां ईसाई आज भी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
   छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मो0 जाफ़र ने बताया कि उनके राज्य में भी साम्प्रदायिकता को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। सोशल मीडिया के सहारे जिस प्रकार साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी के परिणाम स्वरुप देश के अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी साम्प्रदायिकता पनप रही है।
   फादर आनंद ने कहा कि ये हमारा सौभाग्य है कि हम सेक्युलर भारत में रह रहे हैं। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि बनारस में झूठा प्रचार किया जा रहा है। जैसे यह प्रचार किया जा रहा है कि मुस्लिम महिलाएं चाहती हैं कि मोदी बनारस से चुनाव लड़े। उन्होंने इस नारे पर एतराज किया कि हर-हर मोदी, घर-घर मोदी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सांस्कृतिक गतिविधियों से भी साम्प्रदायिकता के जहर से लड़ा जा सकता है।
  इसके बाद ओडीशा राज्य के प्रतिनिधि धीरेन्द्र पाण्डा ने अपने विचार रखते हुये कहा कि भारत की राजनीतिक पार्टियां धर्मनिरपेक्षता बचाने के लिये जितना किया जाना चाहिए, नहीं करती हैं। देश में शांति और सद्भाव व्याप्त रहे इसके लिये हमे निरन्तर प्रयास करना होगा। आज देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की अव्हेलना हो रही है जिससे साम्प्रदायिक शक्तियां सक्रिय हों रही है, उनके बढ़ते क़दम रोकने के लियेे अपने इस सद्भावना अभियान को जारी रखने के लिये हमें एकजुट होने की ज़रूरत है।
देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिनिधि डा0 सतिनाथ चौधरी ने अपने भाषण में कहा कि मोदी के नेतृत्व में यदि भाजपा केन्द्र में सत्ता में आती है तो वह देश के वर्तमान धर्मनिरपेक्ष समाजवादी ढांचे को बदलने का प्रयास करेगी। भारतीय संविधान को बदलने का प्रयास अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में भी किया गया था।
   असम राज्य के प्रतिनिधि हफ़ीज़ अहमद, ने विगत वर्ष असम (कोकराझार) में हुये साम्प्रदायिक दंगों की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि असम में मुसलमान अपने को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा के लिये बहुत कुछ किया जाना जरूरी है। और बताया कि मीडिया ने किस प्रकार इस दंगे को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया ताकि हिन्दुओं और मुसलमानों में बराबर तनाव बना रहे और वे अपना हित साधते रहें। इसी का फ़ायदा आज तथाकथित साम्प्रदायिक नेता और पार्टियां अपने हित साधन हेतु कर रही हैं। अतः हमें सावधान रहकर अपनी साझी विरासत की परम्परा को जीवित रखना होगा।
   डा0 राजेन्द्र फुले ने बताया कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में सरकार की कुछ योजनायें ऐसी हैं जिन्हें मुख्यमंत्री ने लागू किया है, लेकिन वो इन योजनाओं को अपने लिये जुटा रहे हैं। और आर0 एस0 एस0 राज्य का भगवाकरण करने पर उतारु है। ज़बरदस्ती ऐसे कानून जनता पर थोपे जा रहे हैं जिनसे जनता परेशान है।
  वार्ता को गति देते हुये पश्चिम बंगाल से सैयद तनवीर नसरीन ने कहा कि पिछले कई सालों से पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों के विकास को ले कर कोई काम नही हुआ चाहे वो शिक्षा का क्षेत्र हो या स्वास्थ्य या फिर रोज़गार। कभी मंदिर के नाम पर कभी योजना के नाम पर हमें छला जा रहा है। इसलिये आज हमें बहुत ज़्यादा सक्रिय हो कर काम करने की ज़रुरत है।
   अधिवेशन के अंतिम सत्र में बिहार राज्य के प्रतिनिधि विनोद रंजन ने कहा कि व्यावसायिक लोग साम्प्रदायिक दंगे करवाते हैं। साम्प्रदायिक शक्तियां बिहार मे तेजी से बढ़ रही है। राज्य सरकार इन्हें रोकने में नाकाम रही है। ऐसे में राज्य की भूमिका कटघरे में खड़ी है।
 द्वितीय दिवस (24-03-2014)
             अधिवेशन के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की शुरुआत सुप्रसिद्ध सामाजिक चिन्तक व ऑल इण्डिया सेक्युलर फ़ोरम के सचिव प्रोफ़ेसर राम पुनियानी ने 14 राज्यो के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुये अपने सारगर्भित भाषण में देश के सामने उपस्थित खतरों की विस्तृत जानकारी दी। उनका कहना था कि कुछ ताकतें जानबूझकर लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की बुनियाद को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में जो भी हो रहा है उससे फासीवाद का खतरा संभावित नजर आ रहा है। फासीवाद के लक्षण हैं आम लोगों में डर की भावना पैदा करना, संकीर्ण राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना, फासीवाद को बढ़े कार्पोरेट घरानों का समर्थन प्राप्त रहता है, फासीवाद के नेता मीडिया पर पूरा नियंत्रण स्थापित करते हैं, अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर वे समाज में घृणा की भावना फैलाते हैं और ऐसा वातावरण पैदा करते हैं जिससे समाज में विभाजन की रेखाएं और गहरी हो जाएं। न सिर्फ अल्पसंख्यक बल्कि सांप्रदायिक ताकतों से दलित और आदिवासियों के हितों पर भी प्रतिकूल असर होता है। इस तरह की रणनीति विश्व के सबसे खूंखार तानाशाह हिटलर ने जर्मनी में अपनाई थी। संघ हिटलर को अपना आदर्श मानता है। सत्ता में आने पर मोदी यह सब कुछ कर सकते हैं।
  अधिवेशन के दौरान फ़ोरम के राष्ट्रीय संयोजक एल0 एस0 हरदेनिया द्वारा लिखित पुस्तक ’’राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा देश की एकता के लिये सबसे बड़ा ख़तरा’’ का लोकार्पण भी किया गया। पुस्तक में संघ के प्रकाशित साहित्य में से उद्धरण देकर इस खतरे को रेखांकित किया गया है।
  उत्तर प्रदेश के रणधीर सिंह सुमन ने बताया कि मोदी की लहर सिर्फ मीडिया में है। वह एक ऐसा गुब्बारा है जो कभी भी फूट सकता है। उन्होंने कहा कि न सिर्फ मीडिया का एक बड़ा हिस्सा वरन् न्यायपालिका और कार्यपालिका में बैठे अनेक लोग मोदी और भाजपा की नीतियों को प्रश्रय दे रहे हैं।
  अधिवेशन के दूसरे सत्र में उत्तराखण्ड राज्य के मुनीश कुमार, ने कहा कि सबके प्रयासों से उत्तराखंड में एक भी दंगा नहीं होने दिया गया है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि वामपंथी आलोचना तो करते हैं पर दंगे रोकने के लिये मैदान में नहीं उतरते हैं। अपने देश की स्वंतत्रता, समानता एवं बंधुता को बचाये रखने हेतु हमें पुनः एक बार जाति-धर्म, सम्प्रदाय एंव क्षेत्रीयता से ऊपर उठकर पहल करनी होगी तथा उन शक्तियों का पहचानना होगा जो हमें अपने राजनीतिक फायदे के लिये बांटती है।
अधिवेशन में बोलते हुये मध्यप्रदेश के शिरीष हरदेनिया ने मध्यप्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री समेत अनेक मंत्री, अनेक वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार में शामिल हैं यहां तक कि छोटे-छोटे कर्मचारियों के यहां भी छापे पड़ने पर करोड़ों रूपयों की संपत्ति निकलती है। मेडिकल कॉलेज, डेन्टल कॉलेज, पुलिस की भर्ती समेत ऐसा कौन सा क्षेत्र है जिसमें भ्रष्टाचार न हो?
    झारखण्ड राज्य की प्रतिनिधि डा0 शांति खेलखो ने बताया कि, किस प्रकार झारखण्ड में मुसलमानों और आदिवासियोंके बीच साम्प्रदायिक द्वेष पैदा कराकर वोट की राजनीति की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें उन साम्प्रदायिक ताक़तो, मानव अधिकारों का हनन करने वालों, वास्तविक मुद्दों को नज़रअन्दाज़ करने वालों को चिन्हित करके उन्हें पराजित करने का काम करना होगा। तभी हमारा लोकतन्त्र सुरक्षित रह पाएगा।
  हिमाचल प्रदेश के सुरेश कुमार और सिक्कम के हेमंत यादव ने इन राज्यों में साम्प्रदायिक ताक़तों के बढ़ते प्रभाव पर चिन्ता व्यक्त की, और इनके उन्मूलन के लिये धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों को और अधिक तीव्रता से करने पर बल दिया।
  आन्ध्रप्रदेश के प्रतिनिधि एस0 क्यू 0 मसूद ने बताया कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा योजनाबद्ध तरीके से झूठ का प्रचार कर रहा है और सच को दबा रहा है। मीडिया में किस हद तक सच दबाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उनका मत था कि तथाकथित जनमत सर्वेक्षण पूरी तरह से बोगस हैं और केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
  उत्तरप्रदेश के प्रतिनिधियों ने मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में दंगों की विस्तृत जानकारी दी और यह आरोप लगाया कि वहां कि समाजवादी सरकार दंगों को रोकने में असफल रही है। ये आरोप भी लगाया गया कि भाजपा ने योजनाबद्ध तरीके से जाट और मुसलमानों के बीच में फूट डालने का प्रयास किया। सम्मेलन में यह बताया गया कि भाजपा का यह दावा कि वह भ्रष्टाचार के विरूद्ध संघर्ष छेड़े हुये है, खोखला है।
   इसके अतिरिक्त अधिवेशन को इरफ़ान इन्जीनियर, डा0 लेनिन रघुवंशी, श्रुति नागवंशी, शुभोजीत, आनन्द प्रकाश तिवारी सहित विभिन्न प्रदेशों से आय 80 प्रतिभागियों ने सम्बोधित किया।
राष्ट्रीय अधिà¤