राहुल की नागरिकता का मुद्दा : सर्वोच्च न्यायालय में सिर्फ खारिज ही नहीं हुआ, बल्कि दस्तावेजों को बताया था फर्जी

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा (Congress President Rahul Gandhi‘s citizenship issue) पहले भी उठ चुका है और उन्होंने इस मुद्दे पर उस समय जोरदार तरीके से बचाव किया था, जब इसे संसद की आचार समिति (Parliamentary Ethics Committee) के समक्ष उठाया गया था। लालकृष्ण आडवाणी हैं संसद की आचार समिति …
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राहुल की नागरिकता का मुद्दा : सर्वोच्च न्यायालय में सिर्फ खारिज ही नहीं हुआ, बल्कि दस्तावेजों को बताया था फर्जी

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा (Congress President Rahul Gandhi‘s citizenship issue) पहले भी उठ चुका है और उन्होंने इस मुद्दे पर उस समय जोरदार तरीके से बचाव किया था, जब इसे संसद की आचार समिति (Parliamentary Ethics Committee) के समक्ष उठाया गया था।

लालकृष्ण आडवाणी हैं संसद की आचार समिति के अध्यक्ष LK Advani is the President of the Ethics Committee of Parliament

वर्ष 2016 में इस मामले को संसद की आचार समिति में उठाया गया था, जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं। राहुल गांधी उस समय कांग्रेस अध्यक्ष नहीं थे, और उन्होंने कथित तौर पर समिति के समक्ष कहा था कि वह चकित हैं कि उनकी ब्रिटिश नागरिकता की शिकायत का संज्ञान लिया गया है, जबकि यह व्यवस्थित भी नहीं। उन्होंने यह भी कहा था कि इस तरह का कोई आवेदन ब्रिटिश गृह विभाग में उपलब्ध होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्री गांधी ने कहा था कि उन्होंने कभी भी ब्रिटिश नागरिकता पाने की कोशिश नहीं की और यह शिकायत उनकी छवि खराब करने की एक साजिश का हिस्सा है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाया था राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा Subramaniam Swamy raised Rahul Gandhi’s citizenship issue

गांधी की नागरिकता का मुद्दा भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाया था। इस पर कांग्रेस नेता ने उस समय शिकायतकर्ता को चुनौती दी थी कि वह अपने आरोप के समर्थन में उनके ब्रिटिश पासपोर्ट की संख्या और प्रासंगिक दस्तावेज पेश करे। रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले को भाजपा सांसद महेश गिरी ने भी उठाया था।

भाजपा नेताओं ने कहा था कि ब्रिटेन स्थित बैकॉप्स के वार्षिक रिटर्न में राहुल को एक ब्रिटिश नागरिक घोषित किया गया है। राहुल को इस कंपनी से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस नेता ने बाद में इसे ‘अनजाने में हुई गलती’ और ‘लिखने में हुई गलती’ बताया था।

There was no meeting of Parliament’s Ethics Committee in the last two years.

बताया जाता है कि पिछले दो वर्षो में संसद की आचार समिति की कोई बैठक नहीं हुई। कहा जा रहा है, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस मसले पर सुनवाई होने पर उल्टे सुब्रमण्यम स्वामी पर कार्रवाई हो सकती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वामी ने इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह कहते हुए लिखा था कि कांग्रेस नेता की नागरिकता समाप्त कर दी जाए। उन्होंने पत्र में कहा था कि गांधी ने लंदन में एक निजी कंपनी चलाने के लिए खुद को 2003-2009 की अवधि में ब्रिटिश नागरिक घोषित किया है।

पत्र में कहा गया था, “कंपनी का नाम बैकॉप्स लिमिटेड है और इस कंपनी के निदेशक और सचिव मौजूदा लोकसभा सदस्य राहुल गांधी हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके बाद दिसंबर 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता के संबंध में पेश किए गए सबूतों को खारिज कर दिया था। याचिका वकील एम.एल. शर्मा ने दायर की थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी बताया था। न्यायालय ने उस समय दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए थे।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा था, “आपको कैसे पता कि ये दस्तावेज प्रामाणिक है?”

शर्मा द्वारा सुनवाई पर जोर दिए जाने पर न्यायमूर्ति दत्तू ने शर्मा से कहा था, “मेरी सेवानिवृत्ति के बस दो दिन शेष बचे हैं। आप मुझे मजबूर मत कीजिए कि मैं आपके ऊपर जुर्माना लगा दूं।”

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