यूपी निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को भाकपा ने बताया असंवैधानिक, तत्काल वापस लेने की मांग

लखनऊ- 21 जून 2019 : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) के राज्य सचिव मण्डल ने यूपी केबिनेट द्वारा पारित ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश 2019‘ (Uttar Pradesh Private University Ordinance 2019) जिसका कि उद्देश्य इन विश्वविद्यालयों में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां (Anti-national activities in universities) रोकना बताया जारहा है, को अभिव्यक्ति एवं शिक्षा के आधार …
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यूपी निजी विश्वविद्यालय अधिनियम को भाकपा ने बताया असंवैधानिक, तत्काल वापस लेने की मांग

लखनऊ- 21 जून 2019 : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) के राज्य सचिव मण्डल ने यूपी केबिनेट द्वारा पारित ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अध्यादेश 2019(Uttar Pradesh Private University Ordinance 2019) जिसका कि उद्देश्य इन विश्वविद्यालयों में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां (Anti-national activities in universities) रोकना बताया जारहा है, को अभिव्यक्ति एवं शिक्षा के आधार और अधिकार पर बड़ा हमला बताया है।

भाकपा ने इस अध्यादेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुये इसे रद्द करने की मांग की है।

आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि ऐसा अध्यादेश लाने से पहले राज्य सरकार को बताना चाहिये कि किस निजी विश्वविद्यालय में और क्या राष्ट्रविरोधी गतिविधियां हो रही हैं और यदि हो रहीं हैं तो वे अब तक क्यों जनता के संज्ञान में नहीं लायी गईं? क्यों अब तक उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं की गयी?

उन्होंने कहा कि जेएनयू के कथित टुकड़े-टुकड़े गैंग, जिसकी कि चार्जशीट अदालत द्वारा रद्द की जा चुकी है, का बहाना बना कर थोपे जाने वाले इस अध्यादेश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भाकपा ने कहा है कि इस तुगलकी अध्यादेश के जरिये भाजपा सरकार उन विश्वविद्यालयों में छात्रों एवं शिक्षकों की लोकतान्त्रिक गतिविधियों को कुचलना चाहती है और संघ नियंत्रित छात्र एवं शिक्षक संगठनों को वाक ओवर देना चाहती है।

भाजपा को लोकतान्त्रिक और विपरीत विचार बर्दाश्त नहीं।

डॉ. गिरीश ने कहा कि भाजपा को लोकतान्त्रिक और विपरीत विचार बर्दाश्त नहीं है वह उन्हें कुचलने को तमाम हथकंडे अपना रही है। यह अध्यादेश भी उनमें से एक है। सच तो यह है कि संघ नियंत्रित विद्यालयों और बौध्दिक शिविरों में आबादी के बड़े हिस्से के प्रति घ्रणा और विद्वेष पैदा करने वाली शिक्षा दी जाती है तथा गांधी, नेहरू के प्रति घ्रणा और नाथूराम गोडसे के प्रति श्रद्धा पैदा की जाती है। असल जरूरत उसे रोके जाने की है।

भाकपा ने कहा कि निजी हाथों में सिमटी शिक्षा आज व्यापार बन गयी है। वह गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के लिये सुलभ नहीं है। जरूरत शिक्षा का राष्ट्रीयकरण करने और उसका बजट बढ़ा कर उसे सर्वसुलभ बनाने की है। सभी को समान शिक्षा दिये जाने का निर्देश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कई साल पहले दिया जा चुका है और भाकपा इसे लागू कराने के लिये माननीय राज्यपाल महोदय को तभी ज्ञापन दे चुकी है जब सपा की सरकार थी। लेकिन भाजपा इस बुनियादी सवाल से ध्यान हटाने को ऐसे हथकंडे अपना रही है।

छात्रसंघों के चुनाव कराने से भी कतरा रही भाजपा सरकार

भाकपा ने सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों से अपील की कि वे इस गैर जरूरी और असंवैधानिक अध्यादेश को रद्द किए जाने हेतु आवाज उठाएं।

पाठकों से अपील

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