योगीराज : एक बिस्सा वाले को बना दिया भू-माफिया

मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, बेदखली की कार्यवाही पर रोक की अपील स्वराज अभियान ने दिया मदद का आश्वासन सोनभद्र, 24 अगस्त 2017, म्योरपुर ब्लाक के कुण्ड़ाडीह गांव के जिस भगवानदास उर्फ प्रह्लाद को 2012 में वन विभाग ने एक बिस्सा वन भूमि पर कब्जे का दोषी मानते हुए जबाब देने का नोटिस जारी किया …
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मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, बेदखली की कार्यवाही पर रोक की अपील

स्वराज अभियान ने दिया मदद का आश्वासन

सोनभद्र, 24 अगस्त 2017, म्योरपुर ब्लाक के कुण्ड़ाडीह गांव के जिस भगवानदास उर्फ प्रह्लाद को 2012 में वन विभाग ने एक बिस्सा वन भूमि पर कब्जे का दोषी मानते हुए जबाब देने का नोटिस जारी किया था उसे जिला प्रशासन ने भू-माफिया घोषित कर उसके विरूद्ध म्योरपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी और गैगस्टर लगाने की धमकी दी जा रही है। जिसके खिलाफ प्रहलाद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जिलाधिकारी को बेदखली की कार्यवाही पर रोक लगाने और भू-माफिया की कार्यवाही को निरस्त करने की गुहार लगायी है। प्रह्लाद ने पत्र की कापी स्वराज अभियान के राज्य कार्यसमिति सदस्य दिनकर कपूर को भी दी है। जिस पर दिनकर कपूर ने मदद का आश्वासन दिया है।

भगवानदास उर्फ प्रह्लाद ने मुख्यमंत्री को दिए पत्र में कहा है कि उसके पूर्वज रिहन्द बांध के विस्थापित है और तात्कालीन सरकार के निर्देश पर वह हरहोरी के जंगल में बसे थे और तभी से आबाद है। मकान बनाकर रहते है, खेतीबारी करते है। उस समय यह जमीन वन विभाग के प्रबंधन में ग्रामसभा की थी। बाद में धारा 4 में वन विभाग ने इसे प्रकाशित किया और उसने सर्वे में इस जमीन पर कब्जे के आधार पर अधिकार के लिए प्रयास किया। जिसका मुकदमा अभी भी वन बंदोबस्त अधिकारी, ओबरा के यहां लम्बित है। इतना ही नहीं वनाधिकार कानून के तहत अधिकार के लिए उपजिलाधिकारी के यहां दावा दाखिल किया गया है। जिसका अभी तक निस्तारण नहीं किया गया है। वनाधिकार कानून की धारा 5 के अनुसार बिना दावा निस्तारण के किसी को बेदखल नहीं किया जा सकता। इस सम्बंध में आदिवासी वनवासी महासभा की जनहित याचिका में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया गया कि प्रार्थी जिस जमीन पर काबिज है उस पर वह पनिकर हर वर्ष देता है और उसने कोई भी नई कटान जंगल की नहीं की है। बाबजूद इसके भूमाफिया धोषित करना और बेदखली की कार्यवाही करना नैसर्गिक न्याय के विरूद्ध है तथा र्दुभावना से प्रेरित है। इसलिए निवेदन किया गया है कि तत्काल हस्तक्षेप कर जिलाधिकारी को उत्पीड़न की कार्यवाही पर रोक लगाने का निर्देश देने का कष्ट करें।

पत्र की कॉपी

सेवा में,

माननीय मुख्यमंत्री जी,

उत्तर प्रदेष षासन

लखनऊ।

विशय-  प्रार्थी भगवान दास उर्फ प्रह्लाद पुत्र रामसुधार निवासी ग्राम-कुण्डाडीह, पो0-म्योरपुर, तहसील दुद्धी, जिला सोनभद्र को भू-माफिया चिन्हित कर उसके अधिभोगाधीन पुस्तैनी वन-भूमि से बेदखल करने की कार्यवाही पर रोक लगाने के संदर्भ में प्रार्थना पत्र।

महोदय,

निवेदन के साथ अवगत कराना है कि आपके के पत्रांक संख्या 585/आर.सी. एंटी भू-माफिया/2017 दिनांक 07.07.2017 एवं प्रभागीय वनाधिकारी रेनुकूट वन प्रभाग के पत्रांक 111/रेनुकूट/33 दिनांक 07.07.2017 द्वारा प्रार्थी को भू-माफिया चिन्हित कर दिया गया है और प्रार्थी की अधिभोगाधीन पुस्तैनी कब्जे की वनभूमि पर दिनांक 18.08.2017 को बिना किसी सूचना और लिखित नोटिस के वन विभाग, राजस्व विभाग व पुलिस प्रषासन की संयुक्त टीम द्वारा नापी करायी गयी और प्रार्थी समेत अन्य उमाषंकर, सन्तराम पुत्रगण रामसुधार, रीपावती देवी पत्नी तिलकधारी व लीलावती पत्नी रामकेष के बने हुए मकानों को गिराने का मौखिक निर्देष दिया गया। इस सम्बन्ध में प्रार्थी निम्नलिखित तथ्य आप महोदय के संसन में लाना चाहता है:-

1.            यह कि प्रार्थी के पूर्वज रिहन्द डूब क्षेत्र से विस्थापित होने के बाद तात्कालीन सरकार व प्रषासन के निर्देष पर ग्राम-हरहोरी में आराजी नं0 121, 120, 119 में आकर बस गये और यहीं उन्होंने खेती-बारी षुरू की व मकान बनाकर रहने लगे। उस समय यह भूमि श्रेणी 5-3-क (1) ग्राम सभा थी जो वन विभाग के प्रबन्धन में थी बाद में वन विभाग ने इसे रक्षित वन घोशित करने के लिए धारा-4 के अन्तर्गत प्रकाषित किया। अवगत हो कि दुद्धी तहसील में धारा-4 में प्रकाषित जमीनों को कब्जे के आधार पर भूमिधरी करने के लिए जनहित याचिका बनवासी सेवा आश्रम बनाम उत्तर प्रदेष सरकार मु0 सं0 374/1987 व एस.सी.आर. (वन) 336/1987 में मुख्य न्यायाधीष सुप्रीम कोर्ट पी0एन0 भगवती ने आदेष दिया था। जिस पर बकायदा सर्वे सेटलमेन्ट प्रक्रिया षुरू की गई थी और प्रार्थी के पूर्वजों समेत गाँव के अन्य लोगों ने भी कब्जे के आधार पर भौमिक अधिकार देने की अपील की थी। किसी कारणवष प्रार्थी समेत अन्य लोगों का नाम नहीं चढ़ा था। जिसके कारण प्रार्थी व प्रार्थी के भाई उमाषंकर समेत अन्य लोगों ने वन बन्दोवस्त अधिकारी, सोनभद्र के न्यायालय में वाद संख्या 253 दाखिल किया। यह वाद अभी भी लम्बित है। (वाद के सम्बन्ध में सूचना की छायाप्रति संलग्न)

2.            यह कि प्रार्थी ने इस जमीन पर भौमिक अधिकार के लिए अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के तहत ग्राम सभा की वनाधिकार समिति को दावा प्रपत्र जमा किया था। (दावा प्रपत्र की छायाप्रति संलग्न है) इस दावे पर ग्राम सभा ने जांचकर स्वीकृति प्रदान करते हुए उपखण्ड स्तरीय समिति दुद्धी को द्वारा लेखपाल अपनी संस्तुति दावा प्रपत्रों के साथ भेजी थी (सूची संलग्न है) इस दावे के सम्बन्ध में अभी तक प्रार्थी को कोई लिखित या भौमिक सूचना नहीं दी गई। आपको अवगत करा दें कि वनाधिकार कानून की संषोधित नियमावली 2012 की धारा 12क की उपधारा-3 के तहत दावेदार को व्यक्तिगत रूप से ससुंचित किया जाना अनिवार्य है। जिससे वह उच्चतर स्तर की समिति में 60 दिन के अन्दर अपील कर सके। इसी धारा की उपधारा-5 कहती है कि ‘किसी व्यथित व्यक्ति की याचिका को तब तक निपटाया नहीं जायेगा, जब तक कि उसे अपने दावे के समर्थन में कुछ प्रस्तुत करने का युक्ति युक्त अवसर न प्रदान कर दिया गया हो’। वहीं उपधारा-7 कहती है कि दावे को स्वीकार न करने के कारण का ब्यौरा वार लिखित रूप से अभिलेख बद्ध किया जायेगा और दावाकर्ता को कारणों के साथ उपलब्ध कराया जायेगा। (नियमावली 2012 की छायाप्रति संलग्न है) इस सम्बन्ध में यह भी अवगत करा दें कि मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने जनहित याचिका संख्या 27063/2013 आदिवासी वनवासी महासभा बनाम भारत सरकार में दिनांक 05.08.2013 में सरकार को नियमावली 2012 के तहत दावा निस्तारण का निर्देष दिया है। (मा0 उच्च न्यायालय आदेष की छायाप्रति संलग्न है) इन विधिक प्रावधानों और मा0 उच्च न्यायालय के आदेष के अनुरूप अभी तक प्रार्थी के दावे का निस्तारण नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में वनाधिकार कानून के अध्याय-3 की धारा-5 के अनुसार बिना दावा निस्तारण के किसी भी दावेदार को उसके अधिभोगाधीन भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता है। अतः प्रार्थी की बेदखली की कार्यवाही नैसर्गिंक न्याय के विरुद्ध है। (वनाधिकार कानून की छायाप्रति संलग्न)।

3.            प्रार्थी ने कोई भी नया कब्जा वनभूमि पर नहीं किया है और न ही कोइ्र नयी कटान की है। जिस भूमि पर प्रार्थी के पूर्वज आबाद थे वहीं प्रार्थी व अन्य लोग अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। इस भूमि पर जो खेती की जाती है उसका बकायदा पनिकर जिलेदारी बन्धी प्रखण्ड दुद्धी, राबटर््सगंज, सोनभद्र को प्रतिवर्श जमा किया जाता है (खसरे की नकल की छायाप्रति संलग्न है)।

महोदय,

उपरोक्त तथ्यों और विवरण से स्वतः स्पश्ट है कि प्रार्थी के ऊपर भू-माफिया के तहत लगाये गये आरोप तथ्यहीन, विधि के विरुद्ध, मनगढ़न्त और दुर्भावना से पे्ररित है। प्रार्थी अनुसूचित जाति का गरीब व्यक्ति है जो अपनी पुष्तैनी अधिभोगाधीन भूमि के जरिये अपने परिवार का जीविको-पार्जन करता है।

अतः निवेदन है कि जिलाधिकारी सोनभद्र को प्रार्थी के पूर्वजों की अभिभोगाधीन भूमि से बेदखली की कार्यवाही पर तत्काल रोक लगाने और प्रार्थी को भू-माफिया चिन्हित करने के आदेष को निरस्त करने का निर्देष दिया जाय। आपकी महति कृपा होगीं

दिनांक…………………..

प्रार्थी

(भगवान दास उर्फ प्रह्लाद)

पुत्र रामसुधार

ग्राम-कुण्डाडीह, पो0-म्योरपुर,

तहसील दुद्धी, जिला सोनभद्र