अंधविश्वास के विरुद्ध सतत बहुआयामी अभियान आवश्यक

Continuous multidimensional campaign against superstition necessary मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के एक गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए कुएं में फेंक दिया क्योंकि उसने लगातार तीन बेटियों को जन्म दिया और पुत्र प्राप्ति की उसकी इच्छा की पूर्ति नहीं की। उसने पत्नी के साथ अपनी दो बेटियों को भी कुएं में …
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अंधविश्वास के विरुद्ध सतत बहुआयामी अभियान आवश्यक

Continuous multidimensional campaign against superstition necessary

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के एक गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए कुएं में फेंक दिया क्योंकि उसने लगातार तीन बेटियों को जन्म दिया और पुत्र प्राप्ति की उसकी इच्छा की पूर्ति नहीं की। उसने पत्नी के साथ अपनी दो बेटियों को भी कुएं में फेंक दिया। एक बच्ची इसलिए बच गई क्योंकि वह नाना के यहां थी। इसी तरह कुछ दिन पहले लॉकडाउन के बावजूद हजारों लोग, विशेषकर महिलायें,  भीड़ बनाकर जमा हो गई उन दो महिलाओं का दर्शन करने के लिए जिन्हें माता आई थी। इस तरह की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। इसका कारण अंधविश्वास है।

कोरोना की दूसरी लहर का अंधविश्वास से संबंध | Superstition related to the second wave of Corona

कोरोना की दूसरी भयावह लहर आने के बाद मैंने एक लेख लिखा था जिसमें मैंने दूसरी लहर आने के मुख्य कारण बताए थे। पहला कारण था अनुशासनहीनता व दूसरा अंधविश्वास। अंधविश्वास के कारण ही देश के लाखों लोग हरिद्वार में हुए कुंभ में गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जो भी कुंभ के दौरान गंगा में डुबकी लगाएगा उसे कोरोना होगा ही नहीं। कोरोना की पहली लहर के ठंडा पड़ने के बाद सारे देश में अनेक धार्मिक आयोजन हुए। इन आयोजनों में सरेआम कोरोना प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया। चुनाव हुए। चुनाव प्रचार के दौरान बंगाल में हुई एक आमसभा के दौरान एकत्रित हुई भारी भीड़ को अद्भुत बताते हुए प्रधानमंत्री ने उसकी प्रशंसा की। मध्यप्रदेश में संपन्न हुए उपचुनाव के लिए भीड़ भरी सभाएं आयोजित की गईं।

We do not touch Dalits because of superstition.

अंधविश्वास के कारण हम दलितों को स्पर्श नहीं करते। अंधविश्वास के कारण समान गोत्र के युवक-युवती विवाह के बंधन में नहीं बंध सकते। अंधविश्वास के चलते हम ऐसे व्यक्ति के मुंह में गंगाजल डाल देते हैं जो मरणासन्न होता है क्योंकि हम मानते हैं  कि ऐसा करने से उसे स्वर्ग मिलेगा।

हमारी एक चुनी हुई सांसद कहती हैं कि गौमूत्र कोरोना का रामबाण इलाज है। इस तरह की सैकड़ों मान्यताएं हैं जिनके चलते देश और समाज को अनेक प्रकार के नुकसान होते हैं। हालत तो यहां तक है कि हमारे रक्षा मंत्री राफेल विमान की विधिवत पूजा करते हैं और दशहरे के दिन पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं।

कुल मिलाकर अंधविश्वास हमारे विकास व समाज में सद्भावना स्थापित करने में सबसे बड़ी बाधा है और उसे दूर करना एक राष्ट्रीय आवश्यकता है।

इस दिशा में बड़े पैमाने पर अभियान नहीं चला है। हमारे संविधान में नीति निदेशक तत्वों व नागरिकों के कर्तव्यों की सूची में वैज्ञानिक समझ उत्पन्न करने को सम्मिलित किया गया है। परंतु इन प्रावधानों को लागू करने के लिए कानून नहीं बनाए गए हैं। इक्का-दुक्का राजनैतिक दलों ने ही अंधविश्वास के विरूद्ध जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता को अपने चुनाव घोषणा पत्रों में शामिल किया है।

कोरोना की मुसीबत से निपटने का सबसे सशक्त और स्थायी हथियार है वेक्सीनेशन। इसके बावजूद कई लोग उसके विरूद्ध दुष्प्रचार कर रहे हैं। जैसे यह अफवाह फैलाई जा रही है कि टीका लगवाने से लोग नपुंसक हो जाते हैं। और भी कई प्रकार की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। ऐसी अंधविश्वासी अफवाहें फैलाने वालों में कुछ निहित स्वार्थी वर्ग भी होते हैं।

यह अत्यंत दुःखद है कि पिछले दिनों अंधविश्वासों के विरूद्ध अभियान चलाने वाली गौरी लंकेश की कर्नाटक में तथा गोविंद पंसारे व नरेन्द्र दाभोलकर की महाराष्ट्र में हत्या कर दी गई। जांच करने पर यह पाया गया कि इनके हत्यारे दक्षिणपंथी तथाकथित हिन्दुत्ववादियों के समर्थक थे। कई स्थानों पर कट्टर इस्लाम के प्रचारकों ने भी अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने वालों पर हमले किए। जैसे अफगानिस्तान में तालिबानियों ने पोलियो के विरूद्ध चलाए गए अभियान के विरूद्ध दुष्प्रचार किया एवं दवा पिलाने वालों की हत्या तक की।

Campaign against superstition is the biggest need of today’s modern world and civilized society.

अंधविश्वास के विरूद्ध अभियान आज की आधुनिक दुनिया एवं सभ्य समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जवाहरलाल नेहरू ने इसका महत्व समझा था। इसलिए वे अपने भाषणों में वैज्ञानिक समझ की आवश्यकता पर जोर देते थे। अंधविश्वास के विरूद्ध लड़ाई दो मोर्चों पर लड़ी जा सकती है। पहला कानून बनाकर तथ दूसरा पाठ्यपुस्तकों में इसके महत्व को दर्शाने वाले पाठ शामिल कर। इसके साथ ही इसके विरूद्ध सतत जन अभियान भी चलाया जाना होगा।

महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में अंधविश्वास विरोधी कानून बनाए गए हैं। लेकिन ये कानून कमजोर हैं व इनमें कई कमियाँ हैं। मध्यप्रदेश में भी एक कड़ा अंधविश्वास विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए। 

एल. एस. हरदेनिया

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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