मोदीजी 70 सालों में पहले पीएम, जिनका जन्मदिवस युवाओं ने काले कपड़े पहनकर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया

Modiji’s Birthday celebrated as National Unemployed Day by the gift of youth to Prime Minister, wearing black clothes युवाओं का प्रधानमंत्री को तोहफा, काले कपड़े पहनकर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया मोदीजी का जन्मदिवस युवा रहें ललकार, हमको दो रोजगार | मोदी का जन्म दिन या दिवस बेरोजगार हरियाणा के युवाओं ने काले …
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मोदीजी 70 सालों में पहले पीएम, जिनका जन्मदिवस युवाओं ने काले कपड़े पहनकर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया

Modiji’s Birthday celebrated as National Unemployed Day by the gift of youth to Prime Minister, wearing black clothes

युवाओं का प्रधानमंत्री को तोहफा, काले कपड़े पहनकर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया मोदीजी का जन्मदिवस

युवा रहें ललकार, हमको दो रोजगार | मोदी का जन्म दिन या  दिवस बेरोजगार

हरियाणा के युवाओं ने काले कपड़े पहन मोदी जी के जन्मदिन को बेरोजगारी दिवस के रूप में सोशल मीडिया पर दिन भर सेलिब्रेट किया (Haryana youth wearing black clothes celebrated Modi ji’s birthday on social media throughout the day) और मांग कि पिछले दस सालों से लंबित हरियाणा की सभी भर्तियों के परिणाम जारी कर योग्य युवाओं को नौकरी दी जाये।  गौर से देखें तो हरियाणा से उठा बेरोजगार युवाओं का इतना बड़ा आंदोलन आज तक के इतिहास में सबसे बड़ा आंदोलन रहा, जो किसी भी पार्टी लाइन से ऊपर उठकर था। ये आंदोलन था ही नहीं, अभी और गति पकड़ेगा। देश के नंबर वन हरियाणा ने बेरोजगारी में पहला स्थान हासिल कर लिया है तो हरियाणा के युवाओं के पास सड़कों पर उतरने और इस तरह बेरोजगारी दिवस मनाने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं है।)

मोदी जी के जन्म दिन (Modi ji’s birthday) पर जब पूरा देश खुशियां मना रहा है तो हरियाणा के पढ़े लिखे बेरोजगार युवा विश्व नेता के रूप में उभरे हमारे प्रधानम्नत्री जी की खूबियों का बखान करने की बजाय दिन भर सोशल मीडिया पर पूरा दिन काले कपड़ों में आंदोलन करते नज़र आये। काले कपडे पहन हरियाणा के युवाओं ने फेसबुक और ट्विटर पर लाखों वीडियो देश के प्रधानमंत्री एवं हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम शेयर किये।

ट्विटर के ट्रेंड्स में दिन भर खट्टर रोजगार दो, नंबर वन पर रहा। पूरी सोशल मीडिया अमावस्या की तरह काली हो गई। देखें वही हरियाणा सरकार को जगाने की बात स्टेटस पर थी कि हरियाणा व केंद्र सरकार बेरोज़गारी एवं बेरोज़गारों पर संज्ञान लें, भर्ती प्रक्रिया में सुधार करें, युवाओं की सुध लें।

आंदोलनरत युवाओं का सबसे बड़ा गुस्सा सालों से लंबित भर्ती परीक्षाओं के परिणाम (Results of recruitment examinations pending for years) और वर्तमान सरकार द्वारा ग्रुप सी एवं डी भर्ती में लगाए गए सोसिओ इकनोमिक क्राइटेरिया पर फूटा.

देखें तो हरियाणा में साल 2015 में निकली सैकड़ों भर्तियों के अंतिम परिणाम आना बाकी हैं, जिनमें से अधिकांश की लिखित परीक्षा हो चुकी है और डॉक्यूमेंटेशन रहती है।

सोसिओ इकॉनमिक को लेकर भी युवा आंदोलन में जुड़ते नज़र आये। हरियाणा की वर्तमान भाजपा सरकार ने सरकारी नौकरी में जिन घरों में सरकारी नहीं है, मतलब जिस आवेदक के माता-पिता या भाई -बहन या पति -पत्नी में से कोई सरकारी नौकरी में नहीं, उन्हें अतिरिक्त पांच अंक देने का प्रावधान किया है। इन अंकों से आज की गला-काट प्रतियोगिता में जहां बिना नौकरी वाले घरों के आवेदक की नौकरी पक्की हो जाती है तो बाकी केवल फॉर्म भरने वाले बनकर रह जाते हैं. इन अतिरिक्त पांच अंक (Results of recruitment examinations pending for years, additional five marks) की वजह से  हर भर्ती के रिटन टॉपर तक बाहर हो जाते तो बाकी की क्या मजाल?

भर्ती परीक्षा में लिखित परीक्षा (written examination in recruitment examination), के बाद किसी को एक्स्ट्रा पांच मार्क्स का प्रावधान मेहनती बच्चों पर जुल्म है. जहां आधे -आधे नंबर की प्रतियोगिता हो वहां पांच मार्क्स बहुत बड़ा अंतर पैदा कर देते हैं। आरक्षण के ऊपर आरक्षण संवैधानिक और नैतिक नहीं है।

युवाओं ने मांग की कि सोसिओ के मार्क्स आरक्षण वाले युवाओं के लिए ख़त्म किये जायें और जो सामान्य वर्ग में ले रहे हैं उनके लिए एक या दो किये जायें ताकि मेहनती उम्मीदवारों के साथ इंसाफ हो।

हरियाणा में सालों से लंबित भर्तियों वाले 2015 की भर्तियां, एस.बी.सी., इ.बी.पी.जी.सी.की पेंडिंग भर्तियां, आई.टी.आई. अनुदेशकों की दस साल से पेंडिंग सात बार पुनः विज्ञापित भर्ती, आठ सालों से इंतज़ार में हरियाणा शिक्षक पात्रता पास जे.बी.टी. की भर्ती, ग्राम सचिव, पी.टी.आई., स्टेनो, आरोही, टीचर्स, एवं पी.जी.टी एवं टी.जी.टी. भर्ती के लाखों युवा सब साथ रहे.. और सब एक सुर में अपनी बात कहते हुए सॉइल मीडिया पर आयेl

युवाओं का नेतृत्व कर रही श्वेता ढुलने ने युवाओं की बात को संक्षेप में कहा कि हमें भर्तियों संबंधित हर मुद्दे का समाधान चाहिए. इसके साथ में जो हरियाँ में वर्तमान में ये डी .सी. रेट, डेपुटेशन पर भर्तियां करने की कवायद शुरू हुई है इसकी खिलाफत करते हैंl हमें बुनियादी सुधार जैसे कि केलिन्डर ऑफ़ एग्जाम (calendar of exam,), डिफाइंड सिलेबस, त्रुटिहीन प्रश्नपत्र और कोर्ट केसेस में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग जानबूझकर लटकाने की बजाये जवाब देकर युवाओं की मुश्किलें दूर करे।

मौन समर्थन एवं काले कपड़े पहनकर हरियाणा का युवा बेरोज़गारी की गंभीर समस्या से गुज़र रहा है व समाधान चाहता है आश्वासन नहीं, बेरोज़गारी एक समस्या “है” इस पर संज्ञान ले सरकार l

माननीय प्रधानमंत्री जी के जन्म दिवस पर लाखों युवाओं का इस तरह बेरोजगारी दिवस मनाना वास्तव में उस देश के प्रधान सेवक पर प्रश्न चिन्ह और राज्यों सरकारों की नाकामी है. अगर नाकामी न होती तो पूर्व घोषित इस आंदोलन पर सरकार संज्ञान लेती और अपना पक्ष रखती. क्या सरकार को इस बात का अंदाजा नहीं था कि सारा देश इसे इस तरह #राष्ट्रीय_बेरोज़गारी_दिवस के रूप में मनाएगा?

Issue of unemployment | Unemployment is a serious problem in the country
मोदीजी 70 सालों में पहले पीएम, जिनका जन्मदिवस युवाओं ने काले कपड़े पहनकर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस के रूप में मनाया
प्रियंका सौरभ Priyanka Saurabh
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार.

आंदोलन के आग पकड़ने से पहले केंद्र एवं राज्य सरकारों को समझना होगा कि देश में बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या है इससे सरकार को तुरंत काबू में करना चाहिए और लगातार भर्ती होती रहनी चाहिए ताकि पढ़े-लिखे युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं,अगर देश के भावी युवा काले रंग के कपड़े पहनेंगे और आंदोलन करेंगे तो देश कौन संभालेंगा।

“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़सद नहीं,मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए !” को अपना प्रेरणास्त्रोत बताने वाले आंदोलनरत युवाओं ने कहा कि उनका आंदोलन सरकार का बेवजह विरोध नहीं है। हमारी समस्याएं जायज हैं उनको पूरा किया जाये। सरकार को विपक्ष का मुद्दा बनने से पहले युवाओं के हित में प्रयास करने से अब गुरेज नहीं करना चाहिए अन्यथा पासा पलटने में किसी भी सत्ता के लिए अहम  इक्का साबित हो सकते हैं।

प्रियंका सौरभ 

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