राज्यसभा में CISF की तैनाती पर विपक्ष का विरोध: खरगे ने उपसभापति को लिखा कड़ा पत्र,जयराम रमेश ने किया सार्वजनिक

नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश को पत्र लिखा है। उन्होंने सदन में सीआईएसएफ कर्मियों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई है। खरगे ने इसे लोकतंत्र के अधिकारों का हनन बताया है। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है।

राज्यसभा में हालिया घटनाक्रमों ने संसद के इतिहास में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने आज राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा राज्यसभा के उपसभापति को लिखे गए एक पत्र को सार्वजनिक किया। यह पत्र न केवल सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव को दर्शाता है, बल्कि संसद की गरिमा और प्रक्रियाओं पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

खरगे के पत्र में राज्यसभा में CISF की तैनाती पर नाराज़गी

खरगे का यह पत्र सीधे तौर पर 1 अगस्त 2025 को राज्यसभा में हुई उस असाधारण घटना से जुड़ा है, जब विपक्षी सांसद महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और उसी दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को राज्यसभा के वेल (Well) क्षेत्र में प्रवेश करने दिया गया।

अपने पत्र में इस कदम को खरगे ने "अत्यंत आपत्तिजनक" करार देते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने लिखा कि यह केवल आज नहीं, बल्कि इससे एक दिन पहले भी देखा गया था कि जब सदस्य जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे थे, तब सुरक्षा बलों की मौजूदगी के माध्यम से उस विरोध को दबाने की कोशिश की गई।

सभापति के इस्तीफे के बाद उठे सवाल

खरगे का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अचानक और अभूतपूर्व तरीके से अपना इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा स्वयं में एक बड़ी राजनीतिक हलचल का कारण बना, और उसके तुरंत बाद सदन में सुरक्षा बलों की तैनाती ने विपक्ष के संदेहों को और गहरा कर दिया।

मीडिया के समक्ष इस पत्र को प्रस्तुत करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और उसमें सुरक्षा बलों का इस तरह से वेल में प्रवेश कराना संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर एकजुट है और सभी विपक्षी दल इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।

खरगे की मांग : वेल में CISF की तैनाती पर लगे रोक

मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्र में यह स्पष्ट मांग रखी है कि भविष्य में जब सदस्य किसी गंभीर जनहित के मुद्दे को उठा रहे हों, तो उस दौरान CISF जवानों को वेल में नहीं भेजा जाना चाहिए। उन्होंने इसे सदन की गरिमा के विरुद्ध बताया और कहा कि ऐसा करना संसद की गरिमा और स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं संभावित

इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को आगामी सत्र में जोरशोर से उठाएगा। कुछ सूत्रों के अनुसार, यह मामला संसद की कार्यवाही में व्यवधान डाल सकता है और विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करेगा।

राज्यसभा में CISF जवानों की तैनाती और सभापति के अचानक इस्तीफे ने भारतीय संसद की परंपराओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि सरकार की चुप्पी और भी सवाल खड़े कर रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सड़क दोनों पर राजनीतिक तापमान बढ़ना तय है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि संसदीय मर्यादाओं और प्रक्रियाओं को लेकर आज भी हमारे लोकतंत्र में चिंतन और सजगता की आवश्यकता है। सदन की गरिमा को बनाए रखने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की है, और जब भी यह संतुलन बिगड़ता है, उसका असर देश की लोकतांत्रिक नींव पर पड़ता है।