भगत सिंह और आज का भारत

Bhagat Singh and today’s India मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों को रिहा करने के लिए जनांदोलन छेड़ने की जरूरत मंदसौर (मध्य प्रदेश) 25 नवम्बर 2020. अंग्रेजी शासन के दौरान देश में संभावित विद्रोह को दबाने के लिए शासकों ने रोलेट एक्ट जैसा दमनकारी कानून लागू करना तय किया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह को …
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भगत सिंह और आज का भारत

Bhagat Singh and today’s India

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों को रिहा करने के लिए जनांदोलन छेड़ने की जरूरत

मंदसौर (मध्य प्रदेश) 25 नवम्बर 2020. अंग्रेजी शासन के दौरान देश में संभावित विद्रोह को दबाने के लिए शासकों ने रोलेट एक्ट जैसा दमनकारी कानून लागू करना तय किया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह को देश की आजादी हेतु संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। भगत सिंह तर्कशीलता और वैज्ञानिक सोच के आधार पर नास्तिक थे। उसी प्रगतिशील परंपरा का निर्वहन बाबूलाल माली विषपायी और कमल जैन जैसे साथियों ने किया था।

ये विचार व्यक्त किए प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने। वे प्रलेस की मंदसौर इकाई द्वारा श्री विषपायी एवं कमल जैन की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

“रोलेट एक्ट, भगत सिंह और आज का भारत” विषय पर अपने संबोधन के पूर्व विनीत ने श्रीमाली विषपायी एवं कमल जैन के साथ संबंधों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। विषय पर बोलते हुए उन्होंने अंग्रेज शासकों द्वारा देश में रोलेट एक्ट लागू करने की परिस्थितियों का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति पर अंग्रेजों की ओर से लड़ चुके भारतीय सैनिकों की देश में अवहेलना हुई। युद्ध से लौटे सैनिकों में गुस्सा था, किसी संभावित विद्रोह की आशंका को दबाने के लिए अंग्रेजों ने रोलेट एक्ट जैसा दमनकारी कानून लागू करना चाहा, इसका सारे देश में विरोध होने लगा। जलियांवाला बाग में रौलट एक्ट के विरोध तथा गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग रखी गई थी। जिसे जनरल डायर ने निर्ममता पूर्व गोलियां चलाकर हत्याकांड में बदल दिया।

विनीत तिवारी ने बताया कि इस हत्याकांड की जांच में जनरल डायर ने गवाही देते हुए अपने कृत्य को उचित ठहराने का प्रयास किया। वह निर्दयता की पराकाष्ठा थी। इस हत्याकांड के विरोध में महाकवि रविंद्र नाथ ठाकुर ने अंग्रेज शासकों द्वारा उन्हें प्रदान की गई “सर” की उपाधि को लौटा दिया था।

विनीत ने बताया कि भगत सिंह जब परिवार द्वारा बनाए शादी के दबाव से घर छोड़कर कानपुर पहुंचे थे तब वहां मिलों के मजदूर आंदोलन से जुड़े और समाजवाद की विचारधारा को समझा। उसी दौरान देश में पहला श्रम संगठन “एटक” का गठन भी हुआ। दस हजार मजदूरों ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहुंचकर नेताओं से कहा कि देश को पूर्ण स्वराज्य मिले इस हेतु प्रस्ताव पारित किया जाए।

उस वक्त आज़ादी के संघर्ष में तीन तरह की धाराएँ थीं जिनमें से एक गाँधी जी के नेतृत्व में थी, दूसरी बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर भारत में सशस्त्र क्रान्ति करना चाहते थे और तीसरी भारत में मौजूद वामपंथी धारा थी जो काँग्रेस के साथ मिलकर देश में जनांदोलन के जरिए क्रान्ति लाना चाहते थे।

इन धाराओं के सम्मलित प्रभाव से ही देश आज़ाद हुआ और आज़ादी के आंदोलन में तीनों की भूमिका रही।

अंत में विनीत ने आज का संदर्भ देते हुए कहा कि रौलेट एक्ट की तरह ही आज बहुत सारे कानून देश के नागरिक और श्रमिक वर्ग पर देश के शासक वर्ग द्वारा लागू किए गए हैं जो पूरी तरह से संविधान विरोधी एवं अलोकतांत्रिक हैं।

कॉमरेड विनीत ने भगतसिंह को याद करते हुए सभी सुनने वालों से अपील की कि वरवर राव, आनंद टेलतुंबड़े, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज आदि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों को रिहा करने के लिए जनांदोलन छेड़ना जरूरी है।

विषपायी जी को याद करते हुए वरिष्ठ अभिभाषक मोहन सिंह चौहान ने बताया कि किस तरह रेलवे की नौकरी के बावजूद वे समाजवादी आंदोलन से जुड़े रहते थे।

कृषि वैज्ञानिक एवं पर्यावरण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय नरेंद्र सिंह सिपानी ने कमल जैन के साथ बिताए 45 वर्षों के समय को याद किया। उन्होंने बताया कि नगर के तेलिया तालाब संरक्षण एवं कृषि महाविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार हेमेंद्र त्यागी के नेतृत्व में चलाई गई मुहिम में कमल जैन का महत्त्वपूर्ण योगदान रहता था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरनाम सिंह ने कहा कि उन पर अपने दिवंगत साथियों की स्मृतियों का कर्ज है और ये स्मृतियाँ उन्हें बैचेन करती रहती हैं। वे इन स्मृतियों की विरासत  प्रलेस इकाई के नौजवान साथियों को सौंपना चाहते हैं।  कार्यक्रम के प्रारंभ में हूरबानो सेफी एवं  निखिलेश शर्मा मोनू के निर्देशन में जन गीत प्रस्तुत किए गए।

अतिथियों का स्वागत चंद्रशिला गुप्ता, हूरबानू सैफी, दिनेश बसेर, नरेंद्र भावसार, कीर्तिनारायण कश्यप, नरेंद्र अरोरा, संजय परिहार, हेमन्त कछावा ने किया। अतिथि परिचय इकाई के सचिव दिनेश बसेर ने प्रस्तुत करते हुए विनीत तिवारी के मंदसौर से रहे संबंधों को स्मरण किया। कमल जैन की कुछ कविताओं का वाचन नरेंद्र भावसार ने किया।

विषय की रूपरेखा एवं संचालन प्रगतीशील लेखक संघ की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य असद अंसारी ने किया। आभार माना वरिष्ठ साथी प्रकाश गुप्ता ने।

कार्यक्रम के अंत में इप्टा इकाई के सदस्यों हेमन्त कछावा, तरुण चौधरी, मनीष सोनी, देवेन्द्र गेहलोद, अमित सैनी ने प्रदीप शर्मा के निर्देशन में ‘जन सेवकों का बाजार” नाटक की प्रस्तुति दी। आयोजन में कोविड नियमों का पालन करते हुए बड़ी तादाद में नगर के प्रबुद्धजनों, कमल जैन , विषपायी परिवार के सदस्यों एवं उज्जैन के कहानीकार शशीभूषण ने शिरकत की। आयोजन में प्रेमचंद जयंती पर विद्यार्थियों के लिए आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं कीनू संखला, वंशिका सोनगरा, सुनील सैन, राहुल पाटीदार, रवीना राठौर, अज़हर हुसैन, देव् सेठिया, कनुप्रिया माली, भूपेंद्र सिंह चन्द्रावत, रवि पाटीदार, ध्रुव जैन, काश्वि राय को नगद धनराशि, पुस्तकों एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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