जब अफ़ग़ान महिलाओं और लड़कियों से छिन गया इंटरनैट — रेडियो फ़ेमे की खामोशी और शिक्षा पर संकट
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार द्वारा लगाए गए इंटरनेट प्रतिबंध से महिलाओं और लड़कियों की ज़िंदगी पर गहरा असर पड़ा है। रेडियो फ़ेमे जैसे महिला-प्रेरित शिक्षामंच बंद हो गए, जिससे हज़ारों महिलाएँ शिक्षा, रोज़गार और आत्मनिर्भरता से वंचित हो गईं। यूएन संस्थाओं का साफ कहना है कि यह केवल इंटरनेट पर रोक नहीं, बल्कि महिलाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास है...

When Afghan women and girls lost access to the internet, the silence of Radio Femme and the threat to education
रेडियो फ़ेमे : अफ़ग़ान महिलाओं की आवाज़ और उम्मीद का मंच
- तालेबान का इंटरनेट प्रतिबंध और महिलाओं पर असर
- डिजिटल शिक्षा से आत्मनिर्भरता तक — अफ़ग़ान महिलाओं की संघर्षगाथा
- यूएन एजेंसियों की चेतावनी : डिजिटल दुनिया तटस्थ नहीं है
अफ़ग़ानिस्तान की सुबहें अब पहले जैसी नहीं रहीं। जहाँ कभी रेडियो फ़ेमे की आवाज़ें — शिक्षा, समानता और उम्मीद के संदेशों के साथ — घर-घर तक पहुँचती थीं, वहाँ अब सन्नाटा पसरा है। यह वही रेडियो स्टेशन है जिसे महिलाओं ने अपने दम पर खड़ा किया था, ताकि पढ़ने, सीखने और आत्मनिर्भर बनने का अधिकार बचा रहे। लेकिन 30 सितम्बर 2025 को, जब तालेबान प्रशासन ने अचानक पूरे देश में इंटरनेट और फ़ोन नेटवर्क काट दिया, तब यह आवाज़ भी खामोश हो गई।
आज, जब अफ़ग़ान महिलाएँ स्कूल और विश्वविद्यालयों से पहले ही बेदख़ल हैं, तब डिजिटल दुनिया से उनका रिश्ता टूट जाना केवल एक तकनीकी अवरोध नहीं — बल्कि अस्तित्व की जद्दोजहद है। संयुक्त राष्ट्र समाचार की इस ख़बर से जानिए किस तरह यह कहानी सिर्फ़ एक रेडियो स्टेशन की नहीं, बल्कि उन हज़ारों महिलाओं की है जो सीखना, बोलना और जीना चाहती हैं — और जिनकी आवाज़ अब एक क्लिक में बंद कर दी गई है....
जब अफ़ग़ान महिलाओं, लड़कियों से इंटरनैट छीन लिया जाए तो
अफ़ग़ानिस्तान में लगभग 70 हज़ार महिलाएँ ‘रेडियो फ़ेमे’ को सुनती हैं. यह पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित एक ऑनलाइन और पारम्परिक रूप से प्रसारित रेडियो स्टेशन है जो पूरे क्षेत्र में महिलाओं व लड़कियों में शिक्षा और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाता है. मगर सीखने के इस सफ़र में एक भारी रुकावट उत्पन्न हो गई...
ऐसे समय में जब महिलाओं पर स्कूलों और विश्वविद्यालयों में जाने पर पहले से ही प्रतिबन्ध लगा हुआ था, रेडियो फ़ेमे ने, अन्य तरीक़ों से शिक्षा मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाई है.
यह रेडियो केन्द्र, महिलाओं और लड़कियों को सीखने व अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए एक बहुत अहम मंच प्रदान करता है, जहाँ आठ शिक्षक, गणित से लेकर विज्ञान तक के विषयों में पाठ पढ़ाते हैं.
लेकिन फिर सत्तारूढ़ तालेबान अधिकारियों ने, अचानक 30 सितम्बर (2025) को, बिना किसी तत्काल स्पष्टीकरण के, पूरे देश में इंटरनैट व फ़ोन नैटवर्क काट दिए, जिससे रेडियो फ़ेमे का प्रसारण बन्द हो गया.
इस रेडियो स्टेशन का अस्थाई रूप से बन्द होना इस बात का एक छोटा सा उदाहरण है कि देशव्यापी इंटरनैट पर पाबन्दी से महिलाएँ किस तरह प्रभावित हुई हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी क्षेत्र में आए भूकम्प, उत्तरी इलाक़े में जारी सूखे और पड़ोसी देशों से निकाले गए लाखों शरणार्थियों की वापसी के साथ-साथ, इंटरनैट पर पाबन्दी ने, देश में महिलाओं और लड़कियों के लिए जीवन को और भी कठिन बना दिया है.
अफ़ग़ानिस्तान में, यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के देश प्रतिनिधि अराफ़ात जमाल कहते हैं, "यह, मौजूदा संकट के ऊपर एक और संकट है. इस तरह की रुकावट बिल्कुल ज़रूरी नहीं है, और इसका असर अफ़ग़ान लोगों के जीवन पर पड़ेगा."
महिलाओं के लिए इंटरनैट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
समा जैसी महिलाओं ने यूएन वीमेन के साथ एक बातचीत में बताया कि इंटरनैट, किस तरह से काम करने, छोटे व्यवसाय शुरू करने और उत्पाद बेचने के लिए एक दुर्लभ अवसर प्रदान करता है.
उन्होंने कहा, "मैं, अपनी ऑनलाइन दुकान के ज़रिए, प्रसिद्ध हो गई. मैं धन अर्जित कर रही हूँ, अपनी आर्थिक समस्याओं का समाधान कर रही हूँ और आत्मनिर्भर बन रही हूँ."
फिर भी, जब इंटरनैट पर पाबन्दी लगी तो, समा से भी, कई अन्य महिलाओं की तरह, रातोंरात अपनी आय का एकमात्र स्रोत छूट गया.
UN Women की रिपोर्ट के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में इंटरनैट और फ़ोन पर पाबन्दी का असर महिलाओं व लड़कियों पर ज़्यादा पड़ता है.
"यह (प्रतिबन्ध) बहुत से लोगों के लिए सीखने, आय अर्जित करने और अन्य लोगों के साथ सम्पर्क जोड़ने के अन्तिम साधन को ख़त्म कर देता है."
अफ़ग़ानिस्तान में वैसे तो इंटरनैट की पहुँच काफ़ी हद तक बहाल हो गई है, लेकिन सन्देश स्पष्ट है: महिलाओं और लड़कियों के लिए सीखने, अभिव्यक्ति व सेवाओं का यह मूल्यवान प्रवेश द्वार, किसी भी समय बन्द हो सकता है.
यूएन महिला संस्था के अनुसार, यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि डिजिटल दुनिया तटस्थ नहीं है.
एजेंसी का कहना है कि महिलाओं की शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और आजीविका, सभी दाँव पर हैं.


