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मुद्दा

बेगुनाह, आजमगढ़ और सपा सरकार

By | May 16, 2012 at 2:01 pm | No comments

अखिलेश भैया, जो ज़ख्म बहन जी की पुलिस ने दिए उन पर मरहम तो लगाओ !   राजीव यादव 2008 के अगस्त महीने में आजमगढ़ के अबुल बशर की गिरफ्तारी और उसके बाद सपा के अबू आसिम आजमी और इमाम बुखारी की खरेवां मोड़ सरायमीर पर की गई आम सभा और उसके बाद बशर के घर [...]

सियासत

मुसलमानों की नई दावेदारी से कांग्रेस परेशान

By | May 16, 2012 at 3:00 pm | No comments

सत्ता और संगठन में मुस्लिमों को हिस्सेदारी नहीं मिलने से नाराज होकर पूर्व केन्द्रीय मंत्री असलम शेर खां ने नई पार्टी बना कर गुटबाजी को हवा दी तो दूसरी तरफ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन गुफराने आजम ने कांग्रेसियों को चिंदी कह कर बखेड़ा खड़ा कर दिया है। रमेश कुमार ‘‘रिपु‘‘ मध्यप्रदेश में तेरह फीसदी अल्पसंख्यक [...]

हस्तक्षेप

सचमुच यू.पी.ए सरकार ‘नीतिगत लकवे’ की शिकार है?

By | May 17, 2012 at 11:08 pm | No comments

आनंद प्रधान कार्पोरेट हितों को आगे बढ़ने का यह सुनियोजित प्रचार अभियान है‘नीतिगत लकवे’ का निहितार्थ मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक में ३.५ फीसदी की गिरावट की खबर आते ही इस गिरावट के लिए यू.पी.ए सरकार के ‘नीतिगत लकवे’ को जिम्मेदार ठहराते हुए सामूहिक रुदन और तेज हो गया है. इसके साथ ही [...]

चौथा खम्भा

हाँ, साम्प्रदायिक सद्भाव के पैरोकार थे प्रभाष जी

By | May 17, 2012 at 8:10 am | No comments

देवेन्द्र सुरजन श्री जगमोहन फुटेला जी, श्री राजीव मित्तल और श्री शम्भू नाथ शुक्ल और कुरबान अली (जिन्होंने स्व. प्रभाष जोशी के चेलों को हिदायत दी है कि प्रभाष जी को भगवान का दर्जा ना दिए जाये). यह मानिए कि मैं आप चारों को नहीं जानता. आप किस अखबार से जुड़े हैं, आप प्रभाष जी [...]

बात बोलेगी हम नहीं

वैमनस्य की राजनीति पर माया और अखिलेश

By | May 10, 2012 at 5:28 am | One comment

अमलेन्दु उपाध्याय उत्तर प्रदेश में सत्ता में आते ही समाजवादी पार्टी के सुल्तान अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि मायावती सरकार में बने पार्कों में बनीं मूर्तियों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। चुनाव परिणाम आते ही उनके इस बयान को प्रदेश में स्वस्थ राजनीति की शुरूआत के रूप में देखा गया था और [...]

शब्द

दिल्ली दरबार के कारिंदों ने भोपाल के दर्द को १९८९ में बेच लिया था

By | May 19, 2012 at 9:20 am | No comments

शेष नारायण सिंह भारत के इतिहास  में अस्सी के दशक को एक ऐसे कालखंड के रूप में याद किया जाएगा जिसमें आजादी की लड़ाई के मुख्य मूल्यों और मान्यताओं को  तिलांजलि देने का काम शुरू हो गया था. धर्मनिरपेक्ष राजनीति और सामाजिक बराबरी का लक्ष्य हासिल करना  स्वतंत्रता संगाम का स्थायी भाव था .१९२० से १९४७ तक चली आज़ादी की [...]

मीडिया

जनसत्ता और विक्रम राव का जलेबीलेखन

By | May 15, 2012 at 2:44 pm | 2 comments

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जनसत्ता अपनी प्रगतिशीलता विरोधी मुहिम में एक कदम आगे बढ़ गया है. उसने के.विक्रम राव का जनसत्ता के 13मई 2012 के अंक में “न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद” शीर्षक से लेख छापा है। यह लेख प्रगतिशील लेखकों और समाजवाद के प्रति पूर्वाग्रहों से भरा है। यह सच है राव साहब की लोकतंत्र [...]

खोज खबर

लोकतंत्र की उलटबांसी : माओवाद तो बहाना है.जल, जंगल, जमीन निशाना है

By | May 18, 2012 at 10:14 pm | No comments

राजीव यादव नयी आर्थिक नीतियों के लागू होते जाने के साथ कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का अर्थ किस तरह बदलता गयाए झारखंड इसका मिसाल बन गया है। एक स्थानीय आदिवासी नेता के शब्दों में कहें तो सरकार अब टाटा और मित्तल को सबसे गरीब और भूमिहीन मान कर मुफ्त में जमीन देने लगी है जबकि [...]

राज्यनामा

जिसने पीठ थपथपाई, उसी की पीठ में खंजर नहीं भोंका वसुंधरा ने?

By | May 16, 2012 at 10:00 pm | No comments

-तेजवानी गिरधर जीते जी जो शख्स दुश्मन होता है, वहीं दिवंगत हो जाने के बाद कैसे महान दिखाई देने लग जाता है, इसका ताजा उदाहरण पेश किया है पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा सिंधिया ने। सीकर जिले के खाचरियावास गांव में पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर आयोजित आदमकद मूर्ति अनावरण समारोह में उन्होंने इतना [...]

मुठभेड़

पूंजीपतियों को दिये जाने वाले अनुदान का आधा भी नहीं है, आम आदमी को दिया जाने वाला अनुदान

By | May 15, 2012 at 8:36 am | No comments

लखनऊ 14 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नवनिर्वाचित महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग एवं भाजपा नीत राजग के खिलाफ एक कार्यक्रम आधारित वाम लोकतांत्रिक विकल्प के निर्माण के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी गंभीर प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों गठबंधन नव [...]

आस-पड़ोस/सरहद

अमरीकी गुलामी – असर शुरु

By | May 16, 2012 at 8:18 pm | No comments

रणधीर सिंह सुमन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी हिंदुस्तान यात्रा पर आई थी और उन्होंने भारतीय संघवाद के विपरीत आचरण प्रदर्शित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सीधे मुलाकात की और अमेरिकी एजेंडे को संसद में पास कराने के लिये विचार विमर्श किया। उस में मुख्य रूप से यह बात भी शामिल थी कि [...]

दुनिया

बोले अहमदीनेजाद- इस्राईल के विनाश के लिए शस्त्र उठाने की आवश्यकता नहीं है

By | May 14, 2012 at 8:00 am | No comments

रणधीर सिंह सुमन अमेरिकी साम्राज्यवाद के पिट्ठू देश इजराइल को समाप्त करने के लिये किसी युद्ध की आवश्यकता नहीं है. यह बात कहकर ईरानी राष्ट्रपति ने इजराइल व उसके आका अमेरिका की असली हालत बता दी है। यह बात सही है कि यदि तीसरी दुनिया के मुल्क अमेरिका व इजराइल से अपने आर्थिक सम्बन्ध समाप्त [...]

आन्दोलन सरोकार

Please Join: VANDANA SHIVA to Release the National Appeal on Koodankulam at the India Gate THIS SUNDAY

By | May 19, 2012 at 10:22 am | No comments

An Urgent Appeal to the Conscience of the Nation on Koodankulam: Please Sign!! Vandana Shiva, the prominent Indian eco-feminist scholar and activist, would be releasing the  “Appeal to the Conscience of the Nation on Koodankulam” this Sunday – May 20th at 6 PM at the India Gate in New Delhi. The appeal, endorsed by eminent [...]

बात बोलेगी हम नहीं

वैमनस्य की राजनीति पर माया और अखिलेश

By | May 10, 2012 at 5:28 am | One comment

अमलेन्दु उपाध्याय उत्तर प्रदेश में सत्ता में आते ही समाजवादी पार्टी के सुल्तान अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि मायावती सरकार में बने पार्कों में बनीं मूर्तियों से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। चुनाव परिणाम आते ही उनके इस बयान को प्रदेश में स्वस्थ राजनीति की शुरूआत के रूप में देखा गया था और [...]

कुछ इधर उधर की

तो बहन जी का कर्ज़ उतारने आई थीं हिलेरी

By | May 14, 2012 at 2:30 pm | No comments

अमेरिका की मेहरबानी के मतलब अमित पाण्डेय 7 मई 2012, रविवार को बांग्लादेश से कोलकाता पहुँची हिलेरी क्लिंटन ने दिल में दफन मोहब्बत से मगरबी बंगाल के सचिवालय 1, राईटर्स बिल्डिंग को सराबोर कर दिया वे बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी से ऐसे मिलीं मानो कितनी चिर-कांक्षित मुलाकात हो! ममता ने भी गर्मजोशी से [...]

राज दरबार

मनमोहन के आर्थिक उदारीकरण का जो चाबुक प्रणव मुखर्जी ने चलाया है, कैसे मान लें कि वह एक अच्छे राष्ट्रपति भी साबित होंगे?

By | May 17, 2012 at 2:15 pm | No comments

दयानंद पांडेय कभी अध्यापक और फिर पत्रकार भी रहे प्रणव मुखर्जी अपनी सारी विद्वता और विनम्रता के बावजूद जिस तरह इन दिनों लगातार झुकने का रिकार्ड बनाए जा रहे हैं, वह एक निष्पक्ष राष्ट्रपति भी बन कर दिखाएंगे, मन में संदेह खड़ा करता है। क्यों कि आज कल जिस तरह वह लगातार झुक रहे हैं, [...]

विज्ञप्ति

Boycott the substandard Cinese Goods- Rashtriya Sainik Sanstha

By | May 17, 2012 at 4:21 pm | No comments

17th May, Jantar Mantar, New Delhi : A three day long fast was started today by the Ajmer, Rajasthan Unit of the Rashtriya Sainik Sanstha at Jantar Mantar. It was attended by a group of Ladies form the Mahila Brigade of the Rashtriya Sainik Sanstha besides a number of other Patriots and Ex-Servicemen.   The [...]

नये हस्त्ताक्षर

कम्पनियों के दबाव में मलेरिया से सरकार बीमार

By | April 27, 2012 at 7:34 pm | No comments

क्यों नहीं खत्म हो रहा है मलेरिया ? डा.ए.के. अरुण   मुम्बई देश की आर्थिक राजधानी है। जाहिर है विकास के नाम पर देश मुम्बई पर बहुत ज्यादा खर्च करता है। ताजा खबर यह है कि इस अति आधुनिक शहर में विगत  वर्ष जुलाई के अन्त तक मलेरिया जैसे सामान्य रोग से कोई 31 लोगों [...]

धर्म – मज़हब

कट्टरपंथी अपने ही संप्रदाय के दुश्मन !

By | April 25, 2012 at 9:25 am | One comment

तनवीर जाफरी पूरी दुनिया में इन दिनों उदारवाद बनाम कट्टïरपंथ रूपी एक विश्वव्यापी बहस छिड़ी हुई है। तमाम कट्टरपंथी व रूढ़ीवादी अपने अपने स प्रदायों (धर्मों)को सर्वोच्च या सर्वोपरि बताने की होड़ में लगे हैं। वैसे तो इस बात में कोई हर्ज भी नहीं है यदि कोई व्यक्ति अपने धर्म, विश्वास अथवा संप्रदाय को उत्तम [...]

कुछ बातें बेमतलब

अथ असिस्टैंट कथा दचब

By | April 26, 2012 at 10:00 pm | No comments

जुगनू शारदेय कितने सौ साल पूरे हो रहे हैं हमारे देश में । मुझे अचरज हुआ जान कर सिनेमा का भी हमारे देश में सौ साल पूरा हो गया है । हमारे बचपन में सिनेमा देखना एक साहसिक कार्य था । हम तो पढ़ाई के बहाने घर से भाग कर नई फिल्में देखने बनारस, क्षमा [...]

संस्मरण

संघियों ने नहीं बनने दिया था बाबू जगजीवन राम को प्रधानमंत्री!

By | May 17, 2012 at 10:18 am | No comments

चंचल ब्रज भाई ने मधु लिमये पर लिखी एक पुस्तक के विमोचन के सन्दर्भ में कहा कि उन्हें मधु जी का लिखा आखिरी हिस्सा ‘कांग्रेस का नाश, देश का विनाश होगा ‘ पसंद नहीं आया… और आखिर में भाई खंडेलवाल कहते हैं कि मधु जी शायद सोवियत संघ के सहयोग से प्रधान मंत्री बनना चाहते [...]