शेष नारायण सिंह

अमरीका में भारतीय राजनयिक के साथ हो रही ज्यादतियों में भारत सरकार की तरफ से बनाए गए कूटनीतिक दबाव के बाद अमरीकी ज़िद में कुछ कमी आयी है। अमरीकी न्याय विभाग ने भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे के ऊपर वीजा फ्रॉड के आरोप लगाकर उनको परेशान करने का अभियान चला रखा है। उनको गिरफ्तार भी किया गया और उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया जैसे एक अपराधी के साथ किया जाता है। अब मामला बहुत तूल पकड़ गया है।

अमरीकी विदेशमंत्री जान केरी ने भारत के सुरक्षा सलाहकार से बात की।उसके बाद अमरीकी विदेश विभाग के बड़े अफसरों ने भारत में अपने बराबर के अफसरों से संपर्क बनाया हुआ है। आमतौर पर अमरीका के अफसर विकासशील देशों के नागरिकों के साथ अजीबोगरीब तरह से व्यवहार करते रहे हैं और पार पा जाते रहे हैं। भारत के बड़े से बड़े अधिकारी और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को अमरीकी हवाई अड्डों पर अपमानित किया जा चुका है। टॉप फिल्म अभिनेता, शाहरुख खान और भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज़ का मामला सबको मालूम है। भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे के साथ न्यूयार्क में जो कुछ भी हुआ है, उससे बदले की भावना की बू आती है।

सीधा सा मामला है कि देवयानी खोबरगडे ने एक महिला को भारत से ले जाकर अपने घर पर काम पर रखा और उसको सभी नियमों का पालन करते हुए काम दिया। बीच में भारतीय मूल का एक अमरीकी वकील टपक पड़ा। वह वकील वहाँ की सरकार के कानून विभाग में बड़े पद पर है। उसने ऐसा मामला बना दिया जैसे न्यूयार्क के भारतीय मिशन की सबसे बड़ी अधिकारी देवयानी खोबरगडे ने कोई ऐसा अपराध किया हो जिसके लिए बहत बड़े पैमाने पर कानूनी और पुलिस कार्रवाई की ज़रूरत हो। प्रीत भरारा नाम के भारतीय मूल के इस अमरीकी अफसर ने अपनी सरकार को इतनी मुश्किल में डाल दिया है कि अब अमरीका के बड़े बड़े अधिकारी मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय संसद के दोनों सदनों में इस अमरीकी कारस्तानी की घोर निंदा की गयी है। सरकार ने यहाँ काम करने वाले अमरीकी राजनयिकों को दी गयीं बहुत सारी सुविधाएँ खत्म कर दी हैं जो वियना कन्वेंशन के बाहर जाकर दी गयी थीं। उदाहरण के लिए अमरीकी राजनयिकों को भारत के हवाई अड्डों पर आने जाने के लिए विशेष पास दिए गए थे, वे सब वापस ले लिए गए हैं।

अमरीकी विदेश विभाग की बड़ी अफसर वेन्डी शर्मन ने भारतीय विदेश सचिव सुजाता सिंह से बात करके सफाई दी है कि वे अमरीकी वकील प्रीत भरारा के उस बयान से सहमत नहीं है जिसमें उन्होंने कहा है कि मामले में शिकायतकर्ता महिला के पति को भारत से बचाकर लाया गया है। इसके पहले भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने प्रीत भरारा के बयान पर गुस्सा जताया था और भरारा को फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा कि जब भारत में नौकरानी के ऊपर एक मुकदमा चल रहा है तो उसके परिवार को गुपचुप तरीके से अमरीका ले जाना सही नहीं है। प्रीत भरारा ने भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी अभद्र टिप्पणी की थी। बहरहाल अब मामला ऐसे मोड़ पर आ गया है कि प्रीत भरारा की नौकरी तो जायेगी ही, लगता है कि उनको जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

देवयानी खोबरगडे का केस इतना तूल पकड़ चुका है कि अब सरकारों और अन्य व्यक्तियों के बयान ही खबर बना रहे हैं। सारी घटना की जानकारी अब प्रतिक्रियाओं में ही आ रही है। ऐसी हालत में यह ज़रूरी है कि सारी बातों को एक बार सिलसिलेवार तरीके से समझा जाए।

साल भर पहले भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे ने नई दिल्ली में एक नौकरानी को भर्ती किया और उसको साथ लेकर न्यूयार्क पहुँची। करीब सात महीने बाद 23 जून 2013 को वह लड़की घर से बाहर गयी और वापस नहीं आयी। उसके पति से जब पता लगाया गया तो उन्होंने कहा कि उनको नहीं मालूम है कि वह कहाँ है। लेकिन कुछ दिन बाद ही पता लग गया कि वह नौकरानी वहीं न्यूयार्क में ही कहीं है क्योंकि उसने भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे से फोन करके बताया कि वह कहीं और नौकरी करना चाहती है। उसके लिए उसे अनुमति चाहिए। देवयानी ने उसको बता दिया कि यह अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि वह गैरकानूनी होगा। 24 जून 2013 को ही अमरीका में सम्बंधित अधिकारियों को उसे तलाशने के लिए अर्जी दे दी गयी थी। 8 जुलाई 2013 के दिन उसका पासपोर्ट और दूतावास के एतराफ से दिया गया पहचान पत्र रद्द कर दिया गया। न्यूयार्क पुलिस ने भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे की बात को गम्भीरता से नहीं लिया जब उन्होंने अपनी नौकरानी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने की कोशिश की तो उनको बताया गया कि नौकरानी के किसी रिश्तेदार को ही रिपोर्ट लिखाने का हक़ है। लेकिन उसके पति रिचर्ड ने रिपोर्ट लिखाने से मना कर दिया। बहुत कोशिश के बाद न्यू यार्क पुलिस में रिपोर्ट लिखाई जा सकी।

1 जुलाई 2013 को मामला खुल गया जब नौकरानी की वकील ने धमकी भरा फोन किया और कहा कि भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे के ऊपर नौकरानी ने मुकदमा करने की योजना बना ली है और दावा किया है कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार हुआ। मुकदमे से बचने के लिए कुछ शर्तें रखी गयीं। शर्तें थीं कि देवयानी खोबरगडे उस नौकरानी संगीता रिचर्ड के साथ हुए नौकरी के कांट्रेक्ट को रद्द कर दें,उसको सरकारी वीजा के बजाय एक साधारण वीजा दिलवाएं और 19 घंटे रोज के हिसाब से बकाया वेतन दें। देवयानी ने मना कर दिया और कहा कि जो भी फोन कर रही थी वह अपना नाम बताए। लेकिन उसने फोन काट दिया। 8 जुलाई 2013 के दिन देवयानी खोबरगडे को इमीग्रेशन मामलों के एक वकील के दफ्तर में समझौता करने के लिय बुलाया गया। वे अपने अधिकारियों के साथ वहाँ गयीं। वहाँ संगीता रिचर्ड पहले से ही मौजूद थीं। उनसे दस हज़ार डॉलर की माँग की गयी। इसके अलावा यह भी कहा गया कि सरकारी पासपोर्ट के जगह पर एक साधारण भारतीय पासपोर्ट बनवाया जाए और अमरीका में रहने के लिए इमीग्रेशन विभाग में मदद की जाए। भारतीय अफसरों ने नौकरानी संगीता रिचर्ड को साफ़ बता दिया कि उनको गैरकानूनी तरीके से अमरीका में नहीं रहना चाहिए, उनको वापस भारत चले जाना चाहिए और अगर तनखाह के बारे में कोई विवाद है तो उसको दूतावास में आकर तय कर लेना चाहिए। संगीता रिचर्ड ने साफ़ मना कर दिया और कहा कि वे अमरीका में ही रहना चाहती हैं।

भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरगडे ने इस सारे मामले की सूचना न्यू यार्क पुलिस को दे दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। देवयानी खोबरगडे ने भारत में भी इस केस में जो भी कानूनी तौर पर ज़रूरी था, सब किया। अब तक के सारे घटनाक्रम को देखने से पता चलता है कि संगीता रिचर्ड और उनके पति फिलिप रिचर्ड एक योजना के तहत काम कर रहे थे।

इस बीच भारत में भी घरेलू नौकरों के लिए काम करने वाले संगठनों ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार की अधिकारी देवयानी ने अपने घर में काम करने वाली महिला की मजदूरी को हड़पने की कोशिश की और जब बात खुल गयी तो उसको राजनीतिक ताक़त के बल पर कूटनीतिक अधिकारो का मामला बताने की कोशिश की जा रही है। केन्द्र सरकार इस तरह की आलोचना से चिंतित नहीं है। विदेशमंत्री सलमान खुर्शीद ने संसद में बयान दिया है कि कि अमरीका की जोर ज़बरदस्ती की कूटनीति को भारत के हितों के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देंगे और देवयानी के साथ न्याय करेगें। अब जब अमरीकी अधिकारी नरमी से बात करने लगे हैं, भारत के अधिकारी साफ़ कहने लगे हैं कि जब तक अमरीकी प्रशासन माफी नहीं माँगता तब तक बात संभलने वाली नहीं है। सही मायनों में अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों के नए प्रतिमान शुरू हो चुके हैं। कोल्ड वार के बाद की राजनीति में अमरीका पहले से कमज़ोर हुआ है और भारत मज़बूत हुआ है। आज अमरीका के हुक्मरान भारत की बात को आसानी से नज़र अंदाज़ नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में भारत ने भी सख्त रुख अपना लिया है। अब सरकारी तौर पर कहा गया है कि जब तक अमरीका माफी नहीं माँग लेता तब तक भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आयेगा।

अमरीका की आदत पड़ी हुयी है कि वह भारत को भी अन्य विकासशील देशों की तरह समझे। अभी पांच साल पहले तक तो वह भारत और अमरीका को एक ही बराबर मानता रहा था लेकिन अब अमरीका को भी मालूम है कि वह भारत को नाराज़ नहीं कर सकता। ऐसी हालत में देवयानी के मामले में उसको झुकना पड़ेगा लेकिन माफी माँगने की बात शायद बड़ी बात है। माफी माँगने की बात तो नहीं संभव लगती लेकिन इतना तय है कि आगे वाले समय में अमरीकी अधिकारी भारत के बारे में संभल कर बात किया करेंगे।