शेष नारायण सिंह

मुलजिम रमाशंकर यादव विद्रोही वल्द गरीबी, साकिन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ,नयी दिल्ली की पेशी २१ जनवरी को नयी दिल्ली के आई टी ओ के पास स्थित गाँधी पीस फाउंडेशन के हाल में होगी . उन पर मुक़दमा चलेगा .उनके ऊपर अभियोग यह है कि उन्होंने इस पूंजीवादी ,शोषक देश में गरीब आदमी की बात की . शोषित पीड़ित जनता को लाठी उठाने केलिए भड़काया और मध्य वर्ग की उन मजबूरियों को दुत्कार दिया जिनके चक्कर में मेरे जैसे लोगों ने अनंत समझौते किये हैं . इस मुक़दमे में विद्रोही जी ही मुद्दई भी होंगें और मुंसिफ भी .आप भी आइयेगा लेकिन केवल तमाशबीन की हैसियत में . क्योंकि इस मुक़दमें में और किसी रूप में शामिल होने की किसी की हैसियत नहीं है .

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र रमाशंकर यादव विद्रोही को १९८३ में निकाल दिया गया था लेकिन वे निकले नहीं, वहीं जम गए. कवितायें कीं और कैम्पस के निवासी बने रहे. उन कविताओं में से कुछ का संकलन एक किताब के रूप में किया गया है. छपी हुई इस किताब का २१ जनवरी को विमोचन होगा . विद्रोही को बहुत लोग नहीं जानते लेकिन अगर उनके पूरे दोस्त असरार खां की चली तो लगता है कि पूरी दुनिया जान जायेगी. असरार खां कम्युनिस्ट हैं . और उन्होंने ही विद्रोही को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एस एफ आई में भर्ती किया था. असरार चाहते हैं कि विद्रोही को जे एन यू से डाक्टरेट की उपाधि दी जाए . इन सारी बातों पर चर्चा के लिए २१ जनवरी को गाँधी पीस फाउंडेशन आइये, दोपहर दो बजे के बाद. फिर देखिये एक बागी कवि अपने आप को किन कठिन परिस्थितयों में डालकर कविता करता है ,अपना फ़र्ज़ निभाता है