ईपीएफ लूट में लगी मोदी सरकार-आइपीएफ
ईपीएफ लूट में लगी मोदी सरकार-आइपीएफ
ईपीएफ लूट में लगी मोदी सरकार-आइपीएफ
लखनऊ 26 अप्रैल 2015, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट के प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर ने आज जारी अपनी प्रेस विज्ञिप्ति में मोदी सरकार द्वारा मजदूरों के भविष्य निधि के पैसे को शेयर बाजार में लगाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया कि सरकार कारपोरेट धरानों की मदद के लिए मजदूरों के धन की लूट में लगी है।
आइपीएफ नेता ने कहा कि पहले लम्बे संघर्षो के बाद हासिल मजदूरों की ईपीएफ के तहत मिलने वाली न्यूनतम एक हजार रुपए पेशंन पर रोक और अब ईपीएफ के धन को शेयर बाजार में लगाने का फैसला मजदूरों पर हमला है। सरकार का यह फैसला पहले से ही असुरक्षित जीवन जी रहे करोड़ो असंगठित और ठेका मजदूरों के जीवन को और भी असुरक्षित करने का काम करेगा। जिसके खिलाफ आइपीएफ और उससे जुड़े संगठन हर स्तर पर विरोध करेंगे।
आइपीएफ नेता ने बताया कि मनमोहन सरकार के ही नक्शे कदम पर मोदी सरकार आगे बढ़ रही है। इसके पहले वर्ष 2007 और 2008 में मनमोहन सरकार ने ईपीएफ के धन को शेयर बाजार में लगाने का प्रयास किया था। परन्तु मजदूर संगठनों के देशव्यापी विरोध के कारण उसे कदम पीछे खिचने पड़े थे। अब मोदी सरकार ने मजदूर संगठनों के विरोध को दरकिनार कर ईपीएफ के 5000 करोड़ रुपए का एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स "ईटीएफ" में निवेश करने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार यह अभी शुरूवाती निवेश है आगे ईपीएफ में जमा धन का 15 प्रतिशत तक शेयर बाजार में निवेश किया जायेगा।
आइपीएफ नेता ने बताया कि मेक इन इण्डिया की बड़ी-बड़ी लफ्फाजी और खर्चीली विदेश यात्राओं के बाबजूद मोदी सरकार देश में कोई भी पूंजी निवेश कराने में विफल रही है। इसलिए अब वह देश में मौजूद संरक्षित पूंजी ही को कारपोरेट धरानों की मदद के लिए देने में लगी है। मजदूरों की जीवन सुरक्षा के लिए संरक्षित ईपीएफ के धन को शेयर बाजार में लगाना इसी का नतीजा है।


