‘नयी जनवादी क्रान्ति’ के पास ‘असहमति’ की कोई गुंजाइश नहीं है और जो ‘सहमति’ नहीं होंगे, मारेंगे जाएंगे!

संजय पराते

छत्तीसगढ़ के मीडिया जगत में शुभ्रांशु चौधरी एक जाना-पहचाना नाम है- खास्तौर से आदिवासी क्षेत्रों और दण्डकाञ्चल (बस्तर) से संबंधित रिपोर्टिंग के लिए। एक निर्भीक पत्रकार के रूप में उन्होंने यहाँ के अंदरूनी इलाकों के कई दौरों किये हैं, मागोवाड़ी नेताओं और ग्रामिण आदिवासियों से बातचीत की है... और यह सब करते हुए वे हमेशा पुलिस प्रशासन के निशाने पर रहे हैं, हालाँकि लिंगद्वार कोडापुर की गति को वे प्राप्त नहीं हुए हैं।

एक सजग पत्रकार के रूप में उन्होंने चोकन्नी दृष्टि से इन क्षेत्र के स्थितियों का अध्यायन किया है और इस अध्यायन के निष्कर्षों से उन्होंने किसी भी प्रकार का समंजस नहीं किया, वर्तमान में मीडिया जिसका शिकार है।

ताड़मेटला गाँव के प्रकरण को, जिसमें सलवा जूडूम समर्थकों ने तीन सौ से अधिक घर जला दिये थे, हत्याएं और बलात्कार किये थे, उन्होंने ही उजागर किया था। काफी शोर-शराबा और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।

दण्डकाञ्चल के आदिवासियों के लिए सम्पीक्षित ‘लेट्स कॉल हिम वासु’ का अ...