जस्टिस रघुवेन्द्र सिंह राठौर को किस उद्देश्य से एनजीटी में लाया गया वह धीरे-धीरे स्पष्ट हो जायेगा.

पुष्परंजन

बात दिसंबर 2013 की है. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पुलिस को निर्देश दिया कि जयपुर हाईकोर्ट के एक जज की बेटी को हाज़िर किया जाये, जिसे उसके पिता ने घर में नज़रबंद कर रखा है.

30 साल की इस लड़की ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे ईमेल सन्देश में कोर्ट से गुहार लगायी थी कि उसे उसके पसंद के लड़के से शादी में अदालत मदद करे. विजातीय से विवाह रोकने के वास्ते उस लड़की के रसूखदार जज पिता ने नज़रबंद कर रखा था. पुलिस सुरक्षा में उस लड़की को जज साहब के घर से बरामद कर सुप्रीम कोर्ट में हाज़िर किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एच एल दत्तू और सी नागप्पन की बेंच से उस लड़की ने गुहार लगायी कि अदालत उसे उसके प्रेमी सिद्धार्थ मुखर्जी से शादी करने में मदद करे. ऐसा इसलिए उसके पिता ने किया क्योंकि उसका प्रेमी उसकी जात का नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उस लड़की की शादी उसके मनचाहे लड़के से हो पायी.

यह मामला एक बालिग लड़की को नज़रबंद रखने, उसे उसकी पसंद के लड़के से विवाह करने में बाधा पैदा करने जैसे गंभीर अपराध का था. मगर, बात एक हाइकोर्ट के जज की प्रतिष्ठा की थी, सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुलह-सपाटे के आधार पर निपटा दिया.

आप लोगों को पता है, ये जज साहब कौन थे ?

इनका नाम है न्यायमूर्ति रघुवेन्द्र सिंह राठौर. 16 जनवरी 2016 को जस्टिस रघुवेन्द्र सिंह राठौर को एनजीटी का ज्यूडिशियल मेंबर बनाया गया था. न्यायपालिका में ऐसे लोगों से निष्पक्ष निर्णय की अपेक्षा हम कैसे कर सकते हैं ? जस्टिस रघुवेन्द्र सिंह राठौर को किस उद्देश्य से एनजीटी में लाया गया वह धीरे-धीरे स्पष्ट हो जायेगा.

अब देखिये क्या संयोग है, इसी जस्टिस रघुवेन्द्र सिंह राठौर और एनजीटी के एक्सपर्ट मेंबर सत्यवान सिंह गरब्याल ने जंतर-मंतर को "धरना-प्रदर्शन मुक्त क्षेत्र" घोषित किया था ! भारतीय वन सेवा से रिटायर सत्यवान सिंह गरब्याल 13 जनवरी 2016 को एनजीटी के एक्सपर्ट मेंबर बने थे !

है न शानदार मैच फिक्सिंग ?

पुष्परंजन की एफबी टाइमलाइन से