ऐसा समझा जा सकता है कि मध्यप्रदेश के लोग यदि 15 साल से भाजपा को ही जिताये जा रहे हैं तो वे बड़ी भयंकर भूल किये जा रहे हैं ! क्योंकि यदि यहाँ भी बिहार की तरह ही गैर भाजपा की सरकार होती तो उसे हराने के लिए भी मोदी जी शायद बिहार की तरह ही मध्यप्रदेश को भी कब की मुँह मांगी मुराद भी दे चुके होते।
यह सर्वविदित है कि मोदी जी विगत 15 महीने से मध्यप्रदेश के मुद्दों को अटकाए हुए हैं। केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हर बार दिल्ली से घोर निराशा और रुसवाई ही हाथ लगी है। पहले तो केंद्र में कांग्रेस की सरकार का बहाना हुआ करता था, लेकिन अब तो मोदी जी के नेतृत्व में दिल्ली में एनडीए की सरकार है। सैयां भये कोतवाल फिर भी नतीजा ठनठन गोपाल।
मध्यप्रदेश में कोई भी फौरी या दूरगामी विकास योजना अब तक फलीभूत नहीं हो पाई है। निवेश का नाटक खूब खेल गया किन्तु धेला हाथ नहीं आया। केवल आंकड़ों की बाजीगरी में या डीमेट - व्यापम कांडों में ही एमपी आगे है, वर्ना विकास की असलियत यह है कि मध्यप्रदेश में बेहद महंगी बिजली भी अब बड़े शहरों तक ही सिमट कर रह गयी है। गाँवों तो बिजली पानी सड़क हर चीज के मामले में पहले से भी ज्यादा बर्बादी की कगार पर हैं। बड़े शहरों में ही जब सड़क बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य बदहाल है, तो गाँव और कस्वों की हालत का क्या कहना ?
मध्यप्रदेश की इतनी बुरी हालत तो कांग्रेस के ज़माने में भी नहीं थी। क्या मोदी जी 'आरा' की तरह यहाँ तभी कुछ नजर - ऐ -इनायत फरमाएंगे ? क्या यहाँ भी तभी कुछ हो सकेगा जब भाजपा को मध्यप्रदेश की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा ? क्या तभी कोई सवा लाखिया पैकेज नमूदार होगा ?
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