कबीरदास को तब भी कलबुर्गी की तरह मजहबी लफंगों ने ही मारा
कबीरदास को तब भी कलबुर्गी की तरह मजहबी लफंगों ने ही मारा
मैडम क्रिस्टी
जैसी खूबसूरत कोई सुपर मॉडल या विश्वसुंदरी या दिलों को लूटने वाली सुपर हीरोइन भी नहीं!
आज सविता बाबू से सुबह-सुबह मैंने कहा कि साहिबेकीता नहीं हैं और कोई टोप हैं और न नोबेलिया कोई, लेकिन गलत मत समझना मेरी एकात भी कोई कम नहीं है। मेरे पास मेरे टीचर हैं।
ताराचंद त्रिपाठी ने लिखा है, कबीरदास को तब भी कलाबुर्गी की तरह मझहबी लफों ने ही मारा। उनके खिलाफ इब्राहीम लोधी से सजाएमौत की गुहार लगाने वाले जैसे तमाम पंडित थे, वैसे ही मौलवी भी थे तमाम।
मेरे मरने के बाद किसी को मेरी याद आए तो मेरे शिक्षकों और शिक्षिकाओं को याद जरूर कर लें। मुझ पर उनका जो कर्जा है अनंत अनंत, शायद इस बेनिमिसाल पूंजी से अबाध पूंजी के इस मुल्क का थोड़़ा विकास हो जाए!
पलाश विश्वास
मेरे मरने के बाद किसी को मेरी याद आए तो मेरे शिक्षकों और शिक्षिकाओं को जरूर याद कर लें। मुझ पर उनका जो कर्जा है अनंत अनंत, शायद इस बेनिमिसाल पूंजी से अबाध पूंजी के इस मुल्क का थोड़ा विकास हो जाए!
मेरे कोई कालजयी बनने का शौक नहीं है, लेकिन जिनने भी मुझे कोई सबक पढ़ाया वे मेरे टीचर का कालजयी हो जाएं, तो अपनी बुरी तरह फैल जिन्दगी का मुझे कोई अफसोस न होगा।
मुझे सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि इस देश में शायद वैसे शिक्षकों और वैसी शिक्षिकाएं अब नहीं हैं, जिनने अपने खून पसीने और संपूर्ण दिलोदिमाग से हमारी पीढ़ी को इंसानियत का सबक पढ़ाया है।
नसीब का गुलाम नहीं हूं। फिर भी कहना होगा कि हमारे बच्चे बेहनद बदनसीब हैं कि उन्हें हमारे टीचरों जैसे टीचरों से कोई वास्ता नहीं पढ़ाया। वरना उनके क्या मजाल कि वे यूं अंधेरों में भटक रहे होते। वे होते तो काबिल होकर उन्हें रास्ते पर ले आते।
आज सविता बाबू से सुबह-सुबह


