कला के माध्यमों से महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद
कला के माध्यमों से महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद
लखनऊ, 31 जुलाई। आज शाम 6 बजे से हज़रत गंज में मल्टी लेवल पार्किंग के सामने एक cultural evening सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें गीतों, पोस्टर, जादू और कला के अन्य माध्यमों से महिलाओं के प्रति हिंसा के खिलाफ आवाज बुलंद की गयी। देवर्ष धार और जीवन ने अपने गीतों से तो वहीँ हर्षित, इलियास और गर्विता ने अपने पोस्टर के द्वारा महिलाओं के ऊपर हिंसा के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।
लगातार लड़कियों, औरतों, बच्चियों, पर बढ़ते हमले..... छेड़छाड़ से लेकर वीभत्स यौन हिंसा और क्रूरतम हत्याओं तक....... सिलसिला थमता नहीं दिखता, सिर्फ कड़े कानून इसको रोक सकेंगे... ? कानून बनाने वालों के ज़ेहन भी अलग नहीं बल्कि ऐसी ही हिंसा से गुंथे हुए हैं...... और ये आये दिन आने वाले उनके बयानों से झलकता भी रहता है..... इन हालातों में किसी भी ज़िंदा इंसान के माथे पर बल पड़ना..... उसकी मुट्ठियों का सख्त हो जाना लाज़िमी ही है.....
मोहनलाल गंज की घटना के बाद..... फेसबुक पर सक्रिय लखनऊ के कुछ छात्र, नौजवान, शिक्षक, कलाकार, साहित्यकार एकजुट हुए...... मिले..... बातचीत हुयी.... सीने के दर्द और आग को साझा किया..... और तय हुआ कि बस..........अब और नहीं......!!! किसी भी तरह..... कैसे भी..... कुछ भी करके...... हालात को बदल के रहेंगे...... और इस तरह पैदा हुयी मशाल को नाम दिया गया.... “बदलाव के लिए” मशाल की तरह धधकते इस समूह ने तय किया कि जहाँ एक तरफ लोगों की सोच को बदलने के लिए सोशल साइट्स सहित विभिन्न ज़रियों से व्यापक अभियान चलाया जायेगा वही ऐसी किसी हिंसा की घटना पर पीड़िता के पक्ष में सड़क पर भी लड़ाई लड़ी जाएगी...
इस कार्यक्रम में भारी तादात में नौजवान, छात्र छात्राएं शामिल थे।


