कल होगा लखनऊ में सरकार और रिहाई मंच का अफ्तार मुकाबला
कल होगा लखनऊ में सरकार और रिहाई मंच का अफ्तार मुकाबला
देखना है कि कौन सड़क के इस पार है और कौन उस पार ?
हमें इन्साफ चाहिए न कि खोखले वादे - संजरी
लखनऊ। क्या यह महज इत्तेफाक है या सूबे की हुकूमत पर काबिज समाजवादी पार्टी का कोई नया पैंतरा कि ऐन उसी दिन उसी वक्त रोज़ा अफ्तार कराया जा रहा है जिस वक्त कचहरी बम विस्फोटों के कथित आरोपी मौलाना खालिद मुजाहिद की पुलिस स्कॉर्ट में हत्या के खिलाफ पिछले 75 दिनों से विधानसभा के सामने धरने पर बैठे रिहाई मंच ने अफ्तार का एलान किया है।
रिहाई मंच खालिद मुजाहिद के हत्यारोपी पुलिस और आईबी अफसरों की गिरफ्तारी की व आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को रिहा किये जाने के सपा के चुनाव पूर्व वादे को पूरा किये जाने की माँग को लेकर पिछले 75 दिनों से विधानसभा के सामने धरने पर बैठा है। मंच ने काफी पहले ही घोषणा कर दी थी कि धरने के 75 वें दिन नमाज-ए-मगरिब, संयुक्त दुआ एवं रोज़ा अफ्तार का आयोजन किया जायेगा। आश्चर्य इस बात का है कि प्रशिक्षु आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल का इस आरोप कि उन्होंने एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार गिरवाई, में निलंबन करने वाली सरकार पिछले 75 दिनों में एक बार भी इस धरने की न तो सुध ले पायी है, न किसी हत्यारोपी की गिरफ्तारी करवा पायी है और अब रोज़ा अप्तार भी उसी दिन करवा रही है जिस समय रिहाई मंच इसका आयोजन कर रहा है।
4 अगस्त लखनऊ की तारीख में एक अहम दिन बनने जा रहा है। विधानसभा मार्ग के एक तरफ तो वे लोग रोज़ा अफ्तार कर रहे होंगे जो खालिद मुजाहिद के हत्यारों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर 75 दिन से धरने पर बैठे हैं और सड़क के उस पार होने वाले रोज़ा अप्तार में उन लोगों के भी शामिल होने की उम्मीद है जिन पर इल्जाम आयद हैं। चर्चा बहुत जोरों पर है कि देखना है कि कौन सड़क के इस पार है और कौन उस पार ?
रिहाई मंच के संयोजक मोहम्मद शुएब कहते हैं कि खालिद मुजाहिद की हत्या के बाद अखिलेश यादव ने ऐसी तत्परता नहीं दिखायी जैसी दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में दिखाई बल्कि और अपने पुलिस और आईबी अधिकारियों को बचाने में लग गये, जो साबित करता है कि सपा सरकार के लिये मुसलमान सिर्फ एक ढाल हैं जिसे जब चाहे तब सरकार इस्तेमाल कर सकती है।
मंच के प्रवक्ता राजीव यादव और शाहनवाज आलम कहते हैं कि एक तरफ तो सपा सरकार मुसलमानों की रहनुमा बनने का छलावा कर रही है और दूसरी ओर उसका सांप्रदायिक चेहरा बेनकाब हो जाता है जब सपा नेता अबू आसिम आजमी का पुतला फूँकने पर मुसलमानों पर मुकदमे कायम हो जाते हैं।
आजमगढ़ के मानवाधिकार कार्यकर्ता मसीहुद्दीन संजरी बताते हैं कि अलविदा की नमाज के बाद दुआ में यूपी के तमाम शहरों मसलन कानपुर, लखनऊ, आजमगढ़ फैजाबाद, प्रतापगढ़ में जेलों में बंद और आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए मुसलमान भाइयों की रिहाई और उनको इन्साफ दिलाने के लिए अल्लाह की बारगाह में दुआ की गयी जो यह साफ़ करती है कि मुसलमान अपने बेगुनाह भाइयों के लिए कितना फिक्रमंद है ! हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि जेलों में बरसों से बंद बेगुनाहों की रिहाई की दुआ कबूल करे और हमारी सरकारों को तौफीक अता करे कि वे इन्साफ और जम्हूरियत के उसूलों पर मुल्क पर हुकुमत करें ना कि मुल्क को तकसीम करने की जेहनियत से काम करे। हम ये भी दुआ करते हैं कि अल्लाह हमारे हुक्मरानों और अदालतों को इन्साफ करने कि तौफ़ीक अता करे। उन्होंने अपील की कि ईद की नमाज़ में बेगुनाहों की रिहाई के लिए ज़रूर दुआ करें और मुल्क में अमन चैन के लिए दुआ करें और जिस तरह से मुसलमानों को फंसाया जा रहा है उसके विरोध में ईद की नमाज़ में लोग काली पट्टी बाँधे और किसी भी सरकारी नुमाइंदे से न मिले क्योंकि जो सरकार इन्साफ नहीं दे सकती उससे गले मिलने का कोई मतलब नहीं है। हमें इन्साफ चाहिए न कि खोखले वादे।
संजरी कहते हैं कि यह एक बड़ी लड़ाई है। हम सब को मिल कर इस नाइंसाफी के खिलाफ और जम्हूरियत को बचाने के आगे आना होगा !


