कश्मीर में पैलेट गन का प्रयोग बंद करो अन्यथा कार्यवाही के लिए तैयार रहो, पांच लाख प्रति व्यक्ति मुआवजे की मांग
नई दिल्ली। स्टेट लीगल एड कमेटी के चेयरमैन एवं मुख्य संरक्षक पैंथर्स पार्टी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. भीमसिंह ने कश्मीर घाटी में पिछले 50 दिन से भारत के बच्चों पर पैलेट गन की बारिश की भर्त्सना करते हुए दुख प्रकट किया, जिसके फलस्वरूप 200 लड़के व लड़कियों की आंखे चली गयी हैं।

प्रो. भीमसिंह ने कहा कि पैलेट गन का प्रयोग उन्होंने पूरी दुनिया का दौरा करते समय सिर्फ इजरायल में फिलस्तीनी बच्चों के खिलाफ देखा है।
आज जंतर मंतर पर स्टेट लीगल एड कमेटी बैठक प्रो. भीमसिंह की अध्यक्षता में हुई, जिसमें अलग-अलग राज्यों से 50 अधिवक्ता उपस्थित थे। स्टेट लीगल एड कमेटी ने फैसला लिया कि वे इस अमानवीय कृत्य का मुकदमा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराएगी।
उन्होंने कहा कि यह कृत्य उल्लेखनीय है कि 1931 में महाराजा हरिसिंह की हुकूमत ने पुलिस की गोलियों से कश्मीर में कई लोग शहीद हुए थे और इसके महाराजा हरिसिंह ने इसकी जांच के लिए 30दिन के अन्दर एक अंग्रेज कमीश्नर को नियुक्त करके लोगों को न्याय दिलवाया था। 100 साल के डोगरा शासन के दौरान ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ और जम्मू-कश्मीर जो भारत का अटूट अंग है, 50 दिन से गोलियों की बरसात हो रही है और पैलेट गन से लगभग 50 बच्चों की आंखें जा चुकी हैं।

लोकतंत्र में पैलेट गन का प्रयोग जघन्य अपराध
प्रो. भीमसिंह ने घोषणा की कि वे इस अमानवीय कृत्य को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष ले जाएंगे, ताकि अपराधियों को उचित सजा मिल सके। उन्होंने लोकतंत्र में पैलेट गन के प्रयोग को जघन्य अपराध बताया, जो लोकतंत्र में स्वीकार हो ही नहीं सकता।
लीगल एड कमेटी की इस बैठक में पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष श्री एस.के. बंदोपाध्याय, तमिलनाडु के अध्यक्ष ए.एम. अम्बेडकर, राजस्थान के अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एम.ए. रिजवी के अलावा स्टेट लीगल एड कमेटी के सचिव एडवोकेट सुप्रीम कोर्ट नवीद हुसैन नायक और राष्ट्रीय महासचिव बी.एस. बिलौरिया प्रमुख थे।
स्टेट लीगल एड कमेटी ने पैलेट गन से प्रभावित होने वाले लोगों को पांच लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा देने के अलावा मुफ्त इलाज देने की मांग की है, चाहे वह भारत के अन्दर हो या बाहर।