लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी। कांग्रेस (Congress) यूपी को लेकर काफ़ी गंभीर है इसका प्रमाण उसने प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को सक्रिय राजनीति (Active Politics) में लाकर दिया कांग्रेस ने संदेश देने की कोशिश की है कि वह अब बैकफ़ुट (Backfoot) पर नही फ़्रंटफुट (Frontfoot) पर खेलेगी। अब जो ख़बर कांग्रेस सूत्रों से आ रही है उसके मुताबिक कांग्रेस यूपी को दो हिस्सों में बाँटकर पार्टी को मज़बूत करना चाहती है। पूर्वी यूपी (Eastern UP) और पश्चिमी यूपी (Western UP) में इसके अलग-अलग अध्यक्ष होंगे।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक पूर्वी यूपी का अध्यक्ष ललितेश पति त्रिपाठी (Lalitesh Pati Tripathi) को बनाया जाएगा, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं दिग्गज कांग्रेस नेता कमला पति त्रिपाठी Kamala Pati Tripathi के पौत्र हैं। कमला पति त्रिपाठी का उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों में बहुत सम्मान है। यह चर्चा आम है कि स्व. त्रिपाठी ने वी.पी. सिंह को लेकर स्व. राजीव गांधी को आगाह किया था जो बाद में सच साबित हुआ। ललितेश को पूर्वी यूपी का कमान सौंपकर कांग्रेस यूपी में ब्राह्मणों की घर वापसी कराएगी। वहीं पश्चिम यूपी की कमान मोदी की बोटी-बोटी के बयान से सुर्ख़ियों में आए सहारनपुर के इमरान मसूद (Imran Masood) को देने जा रही है।

इमरान ऐसे नेता हैं जो मोदी की भाजपा के लिए हमेशा मुफ़ीद रहे हैं। हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ी आसानी से मोदी की भाजपा के पक्ष में हो जाएगा इससे इंकार नही किया जा सकता है।

हमारे कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने यूपी को दो भागो में बाँटने की तैयारी कर ली है। पूर्वी यूपी के अध्यक्ष को लेकर कोई हैरानी नहीं हो रही है, लेकिन पश्चिम यूपी के अध्यक्ष को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अगर सूत्रों पर यक़ीन किया जाए कि कांग्रेस ऐसा करने जा रही है और ऐसा हो भी जाता है तो इस नियुक्ति से मोदी की भाजपा को हिन्दू वोटों को अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करने में आसानी होगी। मोदी ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में भी सहारनपुर के इमरान मसूद के बोटी-बोटी वाले बयान का इस्तेमाल किया था। 2014 के लोकसभा के आमचुनाव में भी कांग्रेस को गुजरात राजस्थान आदि हिन्दी भाषी प्रदेशों में नुक़सान हुआ था। इमरान के विवादित बयान से मोदी की भाजपा को काफ़ी लाभ हुआ था इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस यूपी में खड़ी होने के लिए हर वो कोशिश कर रही है जिससे वह यूपी में खड़ी हो सके लेकिन इमरान के पश्चिम का अध्यक्ष नियुक्त करने की उसकी कोशिश बहुत ही नुक़सान दायक रहने की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता।

इमरान मुसलमानों में असरअंदाज हो सकते हैं, लेकिन सपा-बसपा के गठबंधन के बाद उसके भी चांस बहुत कम हैं। उनसे कांग्रेस को जो नुक़सान होंगे उसका शायद कांग्रेस की रणनीति बनाने वाले ध्यान नहीं दे रहे हैं या कहे कि जानबूझकर अंदेखा कर रहे हैं।

प्रदेश को दो भागों में बाँटना कांग्रेस के रणनीतिकारों का सही फ़ैसला हो सकता है, क्योंकि यूपी बहुत बड़ा प्रदेश है। एक साथ पूरे प्रदेश पर फ़ोकस नहीं किया जा सकता है। इस लिए दो भागो में बाँटने का फ़ैसला लिया जा रहा है। पूर्वी और पश्चिमी यूपी के अलग-अलग अध्यक्ष होंगे।

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