गाज़ा पर बर्बर इज़रायली हमले के खिलाफ विरोध मार्च, बेगुनाहों का क़त्लेआम तुरंत बंद करने की मांग
गाज़ा पर बर्बर इज़रायली हमले के खिलाफ विरोध मार्च, बेगुनाहों का क़त्लेआम तुरंत बंद करने की मांग
गाज़ा के साथ एकजुट भारतीय जन
लखनऊ, 13 जुलाई 2014। फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता और इजराइल की बर्बरता के खिलाफ विरोध सभा आयोजित की गयी जिसकी अध्यक्षता सेण्टर ऑफ इण्डियन ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष आर0 एस0 बाजपेई ने की। इस विरोध सभा का आह्वाहन भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), इस्लामिक सेण्टर ऑफ इण्डिया, वेलफेयर पार्टी ऑफ इण्डिया, रिहाई मंच, जनवादी लेखन संघ, प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी महिला समिति, जनवादी नौजवान सभा आदि ने संयुक्त रूप से किया था।
सभा को संबोधित करते हुए भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जिला कमेटी सदस्य प्रशांत त्रिवेदी ने कहा कि विडम्बना यह है कि अमेरिका की शह पर इजराइल द्वारा लगातार फिलिस्तीन की जमीन पर कब्जा किया गया है, उसके ऊपर लगातार हमले किए गए हैं और अभी फिर पिछले कुछ दिनो से बर्बरता पूर्वक हमले, बमबारी करके मासूम बच्चों, औरतों और नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। शर्म की बात है कि हमारी सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। हर अमन पसन्द आदमी को इजराइल के इस कृत्य के खिलाफ सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
सभा को संबाधित करते हुए राष्ट्रवादी कांगे्रस पार्टी के नेता प्रो0 रमेश दीक्षित ने कहा कि पासीवादी ताकतों का चरित्र एक सा है, चाहे वो हिटलर के द्वारा यहूदियों पर हमला हो या 2002 में मुसलमानों पर या इजराइल का फिलिस्तीन पर। संयुक्त राष्ट्र संघ को तुरन्त हस्तक्षेप कर इजराइल के इन हमलों पर रोक लगवानी चाहिए।
सभा को इनके अतिरिक्त अतहर हुसैन, इस्लामिक सेण्टर ऑफ इण्डिया के मौलाना मुस्ताक, वेलफेयर पार्टी आॅफ इण्डिया के मो0 खालिद, रिहाई मंच के शहनवाज, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जिला मंत्री छोटे लाल पार, कलम विचार मंच के दीपक कबीर, प्रगतिशील लेखक संघ के शकील सिद्दीकी, सैफ बब्बर, जनवादी लेखन संघ के नलिन रंजन सिंह, क्ल्थ्प् के पीयूष मिश्रा, अखिल विकल्प, जनवादी महिला समिति से सीमा राना, राहुल फाउण्डेशन से कात्यायनी आदि ने भी संबोधित किया।
इस विरोध सभा में भारी तादात में नौजवान, महिलाएं, छात्र और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
गाज़ा के आम नागरिकों पर पिछले पांच दिनों से जारी इज़रायल के हमलों को बेगुनाहों का क़त्लेआम करार देते हुए नागरिकों, बुद्धिजीवियों, कलाकारों, छात्रों-युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आज यहां विरोध मार्च निकाला और गाजा पर हमले को तुरंत बंद करने की मांग की। शाम 5 बजे सरोजिनी नायडू पार्क से शुरू हुआ मार्च हज़रतगंज से होते हुए और रास्ते में पर्चे बांटते हुए जीपीओ पहुंचा।
'गाज़ा के पक्ष में एकजुट भारतीय जन' के बैनर तले आम इंसाफपसंद नागरिकों की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में कवयित्री व स्त्री मुक्ति लीग से जुड़ी कात्यायनी ने कहा कि दुनियाभर में जारी विरोध के बावजूद इज़रायली हुक़ूमत हमले जारी रखने पर अड़ी हुई है और दुनिया की सरकारें चुपचाप इस जनसंहार को देख रही हैं। पांच दिनों में 152 लोग मारे गये हैं और 1000 से अधिक बुरी तरह घायल और विकलांग हो गए हैं। इनमें करीब आधे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हैं। फिर भी बेशर्मी से यह इज़रायली तर्क दुहराया जा रहा है कि उसने यह हमला "आत्मरक्षा" के लिए किया है। फिलिस्तीनी संगठन हमास द्वारा इज़रायल में दागे जाने वाले चंद एक रॉकेटों से खुद को बचाने के लिए ही उसे मजबूरन दुधमुंहे बच्चों, बूढ़ी औरतों और अस्पतालों में भरती मरीज़ों तक की जान लेनी पड़ रही है। इज़रायल का यह सरकारी आतंकवाद संयुक्त राष्ट्रसंघ को नज़र नहीं आ रहा।
जागरूक नागरिक मंच के सत्यम ने कहा कि कहा कि इस सदी के इस बर्बरतम जनसंहार पर भारत सरकार और तमाम पार्टियों की चुप्पी निंदनीय है। पश्चिम एशिया में अमेरिकी शह पर इज़रायली गुंडागर्दी पर रोक नहीं लगाई गई तो वहां कभी शांति क़ायम नहीं हो सकती। प्रदर्शन में भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन पारित किया गया जिसे कल जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा जाएगा। ज्ञापन में मांग की गई है कि भारत सरकार इज़रायल के हमले की निंदा करे और गाजा पट्टी में बेगुनाहों का कत्लेआम रोकने की मांग करे। यदि इज़रायल ऐसा नहीं करता है तो भारत सरकार को इज़रायल के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त कर लेने चाहिए। इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक बुलाने का प्रस्ताव भी भारत सरकार को रखना चाहिए।


