गुजरात को उत्तर प्रदेश में दोहराने की तैयारी बहुत सोची समझी तरीके से चल रही है, सणभलिए और अपनी निष्पक्षता और खोखले activism से बाहर निकलिए
राजनीति की समझ और प्रतिबद्धता तय करना।
यह काम जितना आसान लगता है उतना है नहीं। कुछ लोग इस मुश्किल काम से घबरा कर अपने को ऐसे बाल भाव से पेश करते हैं कि वो किसी दल के साथ कोई लेना देना नहीं और जो सही समझते है वही कहते लिखते हैं। यह मात्र मति भ्रम है और बौद्धिक रूप से राजनीतिक अपरिपक्वता की निशानी है।

सच यह है कि जब हम सार्वजनिक विषयों पर कुछ भी लिखते कहते या सोचते हैं, तो हम राजनीतिक प्रतिबद्धता से बच ही नहीं सकते। भले ही हम अपने को निष्पक्ष दिखाने की कितनी भी कोशिश करें।

गुजरात को उत्तर प्रदेश में दोहराने की तैयारी बहुत सोची समझी तरीके से चल रही है। जो लोग उत्तर प्रदेश को नफरत और दंगों की स्थली में नहीं झोंकना चाहते, उन्हें तमाम कडुवे घूंट पीकर भी अपनी राजनीतिक पक्षधरता बनानी ही पड़ेगी, क्योंकि नफरत पसंद लोगों ने किसी भी कीमत पर यूपी हथियाने की गोटें बिछाना शुरू कर दिया है।

सम्भले रहिये। वर्ना वो हमें आपको भी कही अपना प्यादा न बना दें और हम अपनी निष्पक्षता और खोखले activism में ही मस्त रहे और उनके आगमन की जमीं बना दें।

आलोक बाजपेयी

आलोक बाजपेयी एक इतिहासकार एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।