जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्रसंघ प्रस्तावों और निर्देशों का उल्लंघन कर रहा और भाजपा सरकार खामोश है !

जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान का संयुक्त राष्ट्रसंघ में वक्तव्य

जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्रसंघ महासचिव वक्तव्य पर पैंथर्स सुप्रीमो की प्रतिक्रिया

नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक, राष्ट्रीय एकता परिषद के पूर्व सदस्य एवं 15 साल तक जम्मू-कश्मीर विधानसभा सदस्य रहे प्रो. भीमसिंह ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के जम्मू-कश्मीर के सम्बंध में पूरी तरह झूठे और नकारात्मक वक्तव्य पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपने वक्तव्य में कहा है कि भारत को स्थानीय लोगों की इच्छाओं के अनुसार तथाकथित कश्मीर समस्या का हल किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले को संयुक्त राष्ट्रसंघ महासचिव श्री एंटीनियो गुतरस के सामने पिछली शाम संयुक्त राष्ट्रसंघ मुख्यालय न्यूयार्क में भी उठाया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ भी भारत के अटूट अंग जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थिति और तथ्यों के सम्बंध में जवाब देने में नाकाम रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर बोलने से पहले संयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद प्रस्तावों का अध्ययन करना जरूरी है।

पैंथर्स सुप्रीमो ने याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने ब्रिटिश संसद में कानून के मुताबिक बाकी 575 रियासतों की तरह 26 अक्टूबर, 1947 को भारत संघ के साथ विलयपत्र पर हस्ताक्षर किये थे। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ पाकिस्तान से सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन कराने में नाकाम रहा, जिसमें पाकिस्तान को निर्देश दिया गया था कि वह जम्मू-कश्मीर के सभी कब्जाए क्षेत्रों को खाली करे।

पैंथर्स सुप्रीमो ने केन्द्र में वर्तमान भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ प्रस्तावों और निर्देशों का उल्लंघन करने पर खामोश रहने पर आश्चर्य प्रकट किया।

उन्होंने भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के अन्तर्गत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने और जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक दलों की आपात बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने घोषणा की कि पैंथर्स पार्टी संयुक्त राष्ट्रसंघ महासभा में इस मामले को उठाने के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ में विशेष प्रतिनिधिमंडल नियुक्त करेगी।

प्रो.भीमसिंह इस पहले भी संयुक्त राष्ट्रसंघ मुख्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए काम करने वाली गैरसरकारी संगठनों के समक्ष इस मामले को कई बार उठा चुके हैं।

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