वंज़ारा के लिए भी ये डरने का वक़्त है

आप लोग बेकार में संघ और विहिप के एक साथ मेंबर बन जाते हैं!! या तो तोगड़िया के पक्ष में हो जाओ और संघ से लड़ो या फिर संघ के साथ होकर विहिप से.

दिलीप खान

1. पुलिस की डर से अगर तोगड़िया भागा तो वो बेहोश कैसे हो गया? भागने के दौरान तो लोग सबसे ज़्यादा चौकस रहते हैं. पार्क में पहुंचकर उच्च क्वालिटी का कोई पदार्थ ले लिया क्या?

2. तोगड़िया के पास ऐसा क्या है कि बीजेपी उसको मरवाना चाहती है? कुछ तो मैटिरियल है?

3. तोगड़िया के मुताबिक़ जो पुलिस उसको मारने आई थी उसी ने उसे जान बचाने का मौक़ा दिया और कहा कि भाग जाओ नहीं तो पुलिस मार देगी? पुलिस तोगड़िया के लिए काम करती है कि सरकार के लिए?

4. ये साबित हो गया कि तोगड़िया डरपोक आदमी है. शेर-वेर नहीं है. मोदी जी की तरह रोंदू है. दोनों ख़ुद को शेर बुलाते हैं.

5. हिंदुत्व के उन्मत्त पैदल सिपाहियों को कुछ समझ में आ रहा है कि नहीं? ऊपर बहुत खेल है. आप लोग बेकार में संघ और विहिप के एक साथ मेंबर बन जाते हैं!! या तो तोगड़िया के पक्ष में हो जाओ और संघ से लड़ो या फिर संघ के साथ होकर विहिप से. एक से लड़ लो पहले.

6. इकोनॉमी वगैरह तो डूबी ही, मोदी जी के राज में हिंदुओं का अंतरराष्ट्रीय शेर भी सुरक्षित नहीं है. हिंदुत्व वालों, अब क्या करोगे? तोगड़िया को आडवाणी की तरह निकाल बाहर फेंकोगे?

डी जी वंज़ारा भी प्रवीण तोगड़िया से जाकर मिल लिया. क़रीब छह महीने पहले वंज़ारा को सोहराबुद्दीन शेख हत्याकांड मामले में रिहाई मिली थी. जेल से छूटते ही बंदा फूल माला पहनकर एक मंच पर तलवार लहराने लगा.

सोहराबुद्दीन शेख मामले में मोदी-शाह की भूमिका पर लोगों को भयानक शक है. जज लोया भी इसी मामले की सुनवाई के दौरान अपनी जान गंवा बैठे.

वंज़ारा सोहराबुद्दीन शेख मामले की सारी हक़ीक़त जानता है. वो तुलसीराम प्रजापति, क़ौसर बी, इशरत जहां, सादिक़ जमाल हर मामले को जानता है.

वंज़ारा के लिए भी ये डरने का वक़्त है कि तोगड़िया की जान को अगर बीजेपी सरकार की तरफ़ से ख़तरा है तो उसकी जान को भी हो सकता है. राज़ दफ़्न कराने के लिए फ़िल्मों में अमरीश पुरी गुलशन ग्रोवर की जान तक ले लेता था.

हरेन पंड्या की मौत की गुत्थी आजतक नहीं सुलझी. तोगड़िया से बढ़िया वंज़ारा जानता है ये सब. डरो गुलशन ग्रोवर डरो. नहीं तो मिलकर रहो.

दिलीप खान के फेसबुक स्टेटस का समुच्चय साभार