दलित मुक्ति मोर्चा ने की छत्तीसगढ़ दलित महिला सरपंच पर हुए सामाजिक बहिष्कार की निंदा
दलित मुक्ति मोर्चा ने की छत्तीसगढ़ दलित महिला सरपंच पर हुए सामाजिक बहिष्कार की निंदा
पिछले दिनों दलित मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ने ग्राम पंचायत करौवाडीह के महिला सरपंच पर हुए सामाजिक बहिष्कार एवं भेदभाव की घटना पर एक सात सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग दल गठित किया था. इस दल ने गत २ जुलाई को घटनास्थल ग्राम करौवाडीह का भ्रमण किया. दल ने छानबीन के आधार पर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की है
रायपुर
जुलाई ५, २०११
दलित मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ दलित महिला सरपंच पर हुए सामाजिक बहिष्कार की निंदा करती है
दलित मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत करौवाडीह के महिला सरपंच पर हुए सामाजिक बहिष्कार एवं भेदभाव की घटना की निंदा करती है. गत २८ जून को यह घटना तब सामने आई जब सरपंच और गाँव के कुछ अन्य लोग इसकी जानकारी देने के लिए जांजगीर एस पी से मिलने आये. घटना के सन्दर्भ में दलित मुक्ति मोर्चा ने एक सात सदयस्य दल गठित किया जिसमे विभीषण पत्रे, संध्या बोधलेकर, बून्द्कुवर बंजारे, पीताम्बर निराला, धनंजय जांगडे, संतोष घितोरे एवं गोल्डी एम. जार्ज शामिल थे. यह दल गत २ जुलाई को घटनास्थल ग्राम करौवाडीह का भ्रमण किया.
दल ने अपने जांच पड़ताल में कई सारे मासले पाये . सरपंच कविता मनहर के अनुसार वर्त्तमान के समस्याओ का आरम्भ तब हुआ जब पिछले साल गाँव में सी सी रोड के निर्माण कार्य चल रहा था तब उपसरपंच के लड़के ने ५००००/- रुपये घूस के रूप में माँगा जिसको हमने देने से इनकार कर दिया. इसके बाद से वे लोग गाँव के पुराने गौटिया के इशारे पर काम कर रहे है. पंचंयत के कामो में काफी बाधा डालन आरम्भ कर दिए. उपसरपंच भी उनके साथ मिलकर उनके निर्देशों का पालन करता हे.
जांच के दौरान दल ने पाया कि करौवाडीह में पहले भी कई दफा इस प्रकार के सामाजिक बहिष्कार और जातीभेद की घटना हुई है. घुरुवा टंडन ने बताया कि पिछले साल उनके साथ ऐसा ही गाँववालो ने किया था ओर राजकुमार साहू ने उनसे कहा कि पहले तुम ५००००/- रूपया जमानत दो फिर तुम्हारे मसले पर चर्चा होगी. कारण केवल इतना था कि वह अपने जमीन पर घर बना लिया था. वह इस राशि का भुगतान नहीं कर पाया और आज भी उसका हुक्का पानी गाँव में बंद हे.
पानुराम सतनामी ने बताया कि बा २५०००/- रुपये की राशि जमा किया ओर इसका कारण भी वही था गृहनिर्माण. वह नरेगा सहायक के रूप में पदस्थ हे, इस वजह से बात उसके पद के छीनने तक पहुछी जिसके वजह से दबाव में आकर उसने पैसा जमा कर दिया. पानुराम ने बताया कि पिछले वर्ष शिवप्रसाद शिवे, परसराम मनहर, घुरवा टंडन, देवलाल मनहर और ध्वजा कुमार सिदार के घरो को तोड़ने की फतवा गुडी पंचायत ने निकाला था. यह सब लीलाधर चंद्रा ओर राजकुमार साहू के इशारे पर गुडी बैठक के माध्यम से चलाया जा रहा हे.
दल का यह भी समाज बना हे कि जैजैपुर पुलीस भी काफी दोषी है. पुलीस को इस पूरी घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद उसने कोई भी उचित कानूनी कार्यवाही नहीं किया जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. इस मामले में पुलीस की नकारात्मक रवैय्या उसे संदेह के दायरे में लाती हे. यदि पहली दफा ही इस सामाजिक बहिष्कार के क्रम को रोका होता तो आज यह नौबत नहीं आती कि स्वयं पंचायत के सरपंच का ही बहिष्कार किया जा रहा हो. जब पुलीस से इस बार में बातचीत किये तो वे बड़े ही केजुअल होकर हँसी मजाक की तरह इस मसाले को किये. वे दल को ऐसा बताये कि उस गाँव में स्तिथि ऐसा कुछ नहीं है. गाँव में दोनों पक्ष को बिठाकर रजामंदी करवा दिए है ओर अब ऐसा कुछ भी नहीं.
लेकिन जांच दल के समक्ष गाँववालो ने अलग गाथा सुनाई. सरपंच कविता मनहर ने बताया कि वे काफी डर में जी रही हे और उन्हें जान-माल का खतरा भी हे. पंचायत के सभी कामो में बाधा डालते रहते हे और वह खुले आम घूम फिर नहीं पा रही है. कई लोगो ने यही कहा कि गाँव के दलितों के बीच डर का माहौल है. पिछले वर्ष नरेगा काम के दौरान गुडी बैठक करके नरेगा काम में नहीं जाने की फरमान जारी की गयी थी. ऐसा नहीं करने पर ५०००/- रुपये का जुर्माना रखा गया था. सुश्री मनहर के अनुसार उस काम को बड़े मुश्किल से पूरा किया था. वह कहती हे कि परिस्तिथि ऐसी हे कि मेरे ऊपर किसी भी समय ये लोग अविश्वास प्रस्ताव भी ला सकते हे ओर इसी वजह से मेरे काम में बाधा पंहुचा रहे है.
घटनाक्रम को क्रमबार अध्ययन करे तो यह समाज में आता हे कि पुलीस कि इस प्रकार के मुद्दों में पीड़ित को न्याय दिलाने की नहीं है. यह घटना पुनः पुलीस और प्रशाशन का दलितों पर हो रही जाती भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के प्रति संवेदनहीन होने का प्रमाण देती है. इस सन्दर्भ में दलित मुक्ति मोर्चा सरकार से मांग करती है की वे -
अ) ग्राम करौवाडीह में हुए सामाजिक बहिष्कार एवं जाती भेदभाव के सभी घटनाओं का संपूर्ण जाँच करे एवं उसपर क़ानूनी कार्यवाही करे.
ब) दलित महिला सरपंच को कार्य करने हेतु भयमुक्त वातावरण का निर्माण करे.
स) ग्राम करौवाडीह में सामाजिक बहिष्कार एवं जाती भेदभाव के अन्य पीडितो को क्षतिपूर्ती, राहत एवं न्याय दिलाये.
द) पुलीस और प्रशाशन उचे जाती के लोगो के एजेण्ड की तरह व्यवहार करना बंद करे. ऐसा करके अपराधिक तत्वों को सह देने के सामान हे और न ही पुलीस किसी प्रकार के समझौते को दबाबपूर्वक ना अंजाम दे. ऐसा करके दलितों का पक्ष को कमजोर ना करे. इस सन्दर्भ में सरकार आवश्यक दिशा निर्देश पुलीस प्रशाशन को देवे.
इ) सरकार दलितों, आदिवासिओ और कमजोर वर्गों पर हो रही जाती आधारित भेदभाव, छुआछुत के मसले, हिंसक घटनाये, सामाजिक बहिष्कार इत्यादि घटनाओ को रोकने के लिए सामजिक संघठनो के सहयोग से "पीपल्स विजिलांस कमिटी" का गठन प्रदेश भर में करे.
फ) सभी प्रकार के सामाजिक बहिष्कार पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाया जावे और ऐसे घटनाये होने पर सकत से सकत कार्यवाही की जावे.
दलित मुक्ति मोर्चा इस सन्दर्भ में एक संपूर्ण जाँच प्रतिवेदन शीघ्र ही निकलेगा और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आयोग एवं राज्य स्तर के आयोगों को भी इसका प्रतिवेदन देगी.
मधुकर गोरख- अध्यक्ष ,विभीषण पात्रे - महासचीव, संध्या बोधालेकर- कार्यकारी संयोजक


