मुलायम सिंह बिजली के ऐसे नंगे तार हैं जिन्हें दोस्ती में छूने पर भी जान चली जाती है...
सोलहवें दिन भी जारी रहा खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये रिहाई मंच का अनिश्चित कालीन धरना...
लखनऊ 6 जून 2013/ मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी, आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर सरकार एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी कर दोषी पुलिस व आईबी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करने की माँग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चित कालीन धरना सोलहवें दिन भी जारी रहा। आज क्रमिक उपवास पर आजमगढ़ रिहाई मंच के नेता आरिफ नसीम, पूर्वांचल छात्र संगठन के अध्यक्ष मिर्जा शाने आलम बेग और अबू साद बैठे।

धरने को सम्बोधित करते हुये भाकपा माले के वरिष्ठ नेता व इन्कलाबी मुस्लिम काँफ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने कहा कि जब किसी बेगुनाह युवक चाहे वो खालिद-तारिक हों या फिर दरभंगा के फसीह महमूद का सवाल हो तब उनकी रिहाई पर चाहे प्रदेश की सपा सरकार हो या फिर केन्द्र की काँग्रेस सरकार सबको देश में साम्प्रदायिकता बढ़ने का खतरा सताने लगता है। पर किसी लाल कृष्ण आडवाणी या वरुण गांधी पर से मुकदमा हटाने का सवाल हो तब उन्हें साम्प्रदायिकता बढ़ने का खतरा नहीं सताता। जिस वरुण ने पीलीभीत में मुसलमानों को बीमारी कहा था उसको सपा के ही एक मन्त्री रियाज अहमद और वहाँ के एसपी ने किस तरह साँठ-गाँठ करके मुकदमा हटवाया वह हमारे सामने है। जब भी किसी निर्दोष के छूटने की आस बड़ती है तो सपा के ही लोग अदालतों में जनहित याचिकायें दाखिल कर देते हैं जो स्वीकार भी हो जाती हैं। जो साबित करता है कि सपा किसी भी हद तक जाकर बेगुनाहों को रिहा नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह बिजली के ऐसे नंगे तार हैं जिन्हें दोस्ती में छूने पर भी जान चली जाती है। खालिद मुजाहिद की हत्या इसी का उदाहरण है।

धरने के समर्थन में केरल से आये सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इण्डिया के नेता नौशाद ने कहा कि यूपी की सपा हुकूमत हो या दिल्ली या केरल की काँग्रेस हुकूमत आतंकवाद के नाम पर निर्दोष मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी और उत्पीड़न पर सभी सरकारें अपना आपसी मतभेद भुलाकर एक ही तरह की मुस्लिम विरोधी एजेण्डे पर चलती हैं। इसीलिये किसी मौलाना खालिद मुजाहिद की यूपी में हुयी हत्या और काँग्रेस शासन में पुणे की यर्वदा जेल में हुयी कतील सिद्दीकी की हत्या सब एक जैसी दिखती हैं।

वहीं मणिपुर से आये सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इण्डिया के नेता रफी शाह ने कहा कि भारत के लोकतान्त्रिक ढाँचे पर आज सबसे ज्यादा प्रहार काले कानूनों के जरिये किया जा रहा है। सरकारों को पुलिस के मनोबल गिरने की ज्यादा चिन्ता है पर जनता के मनोबल की नहीं। आज इरोम शर्मीला पिछले एक दशक से ज्यादा समय से जनता के मनोबल, उसके लोकतान्त्रिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। वही हाल यूपी का भी है जहाँ खालिद के हत्यारे पुलिस वालों को बचाने के लिये खालिद को न्याय से वंचित किया जा रहा है। आज इन बेगुनाहों की रिहाई का यह आन्दोलन लोकतान्त्रिक अधिकारों की रक्षा का आन्दोलन बन गया है।

रिहाई मंच के महासचिव और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एसआर दारापुरी ने कहा कि निमेष कमीशन की रिपोर्ट कानून के राज की बात करती है। इसीलिये निमेष कमीशन ने साफ कहा है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। निमेष कमीशन की रिपोर्ट के दोषी पुलिस अधिकारियों पर पहले से भी खालिद मुजाहिद की हत्या का मुकदमा दर्ज है। ऐसे में हत्या चाहे वो किसी ने किया हो चाहे वो पुलिस के उच्च अधिकारी ही क्यों न हों उनकी गिरफ्तारी होनी जरूरी है। क्योंकि ऐसा न होने से प्रदेश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी और कानून का राज स्थापित करने वाले ही कानून तोड़ने लगेंगे। इसलिये प्रदेश की कानून व्यवस्था को बरकरार रखने के लिये आतंकवाद के नाम पर झूठे तरीके से तारिक-खालिद को फँसाने वाले और फिर खालिद का कत्ल करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करानी चाहिये।

आजमगढ़ से आये पूर्वांचल छात्र संगठन के अध्यक्ष मिर्जा शाने आलम बेग ने कहा कि तारिक-खालिद के इंसाफ की लड़ाई आजमगढ़ से शुरू हुयी थी और इनकी बेगुनाही का सबूत निमेष कमीशन की जिस रिपोर्ट को अखिलेश सरकार ने दबाये रखा और फिर हत्या करवा दी, इस सरकार ने मुसलमानों के पीठ में छुरा भोंकने का काम किया है।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली के रिवोल्यूशनरी कल्चरल फ्रंट अनिश्चित कालीन धरने के समर्थन में विधान सभा धरना स्थल पर 8 जून 2013 शनिवार को बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ कांड पर आधारित ‘बाटला हाउस’ नाटक का मंचन करेगा। 8 जून को ही साम्प्रदायिकता विरोधी अभियान से जुड़ी मानवाधिकार नेता शबनम हाशमी और मानषी भी धरने के समर्थन में आयेंगी।

धरने का संचालन आजगढ़ रिहाई मंच के नेता तारिक शफीक ने किया। धरने को दिल्ली से आये पत्रकार शिवदास प्रजापति, बहराइच से आये एसडीपीआई नेता मो0 सलमान, मो0 रईस, मकसूद अहमाद, सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, शुएब, कमरुद्दीन कमर, सैयद अली मुशीर जैदी, नेशनल पीस फेडरेशन के डॉ. हारिश सिद्दीकी, शाने इलाही, सादिक खान, मो. रिजवान, आईएनएल के मो. समी, मुस्लिम संघर्ष मोर्चा के अबू जर, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद, वकारुल हसन, स्मार्ट पार्टी के शहजादे मंसूर, आजमगढ़ से अबू साद, आरिफ नसीम, मुसन्ना, अलीगढ़ से आये हासिम अली सिद्की, अब्दुल मोईद, असदुल्ला खान, शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने सम्बोधित किया।