पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदी की मौत
पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदी की मौत
पैंथर्स सुप्रीमो की पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय कैदियों को संयुक्त राष्ट्र से सुरक्षा देने की मांग
नई दिल्ली। नेशनल पैंथर्स पार्टी के संरक्षक और स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन प्रो.भीमसिंह ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, जिसका संचालन संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में किया जाता है से मांग की कि अतंर्राष्ट्रीय कानून के नियम एवं दायरे के तहत पाकिस्तानी जेलों में सड़ रहे भारतीय कैदियों को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए।
पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि 2013 में पाकिस्तानी की लाहौर जेल में सजा काट रहे एक भारतीय कैदी, श्री सरबजीत सिंह की हत्या जेल की अंदर कर दी गयी थी और अब कुछ दिन पहले कोट लखपत जेल में एक अन्य भारतीय कैदी किरपाल सिंह (50) को मृत घोषित कर दिया गया, जो 1992 से पिछले 24 वर्षों से पाकिस्तानी जेल में सजा काट रहा था।
भारत और पाकिस्तान में सजा काट रहे भारतीय तथा पाकिस्तानी कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाली लीगल एड समिति के चेयरमैन प्रो.भीमसिंह ने कहा कि उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप से लगभग 450 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया गया है।
प्रो.भीमसिंह को दो पहले पाकिस्तानी कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता देने के लिए पाक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन लाहौर द्वारा पुरस्कार से सम्मानित भी किया था।
प्रो. भीमसिंह ने भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों और पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय कैदियों के लिए भारत-पाक वकीलों की मुफ्त लीगल एड समिति का भी गठन किया है, जिसके अध्यक्ष हाईकोर्ट के वकील जुल्फिकार अली जहांगीर और चेयरमैन प्रो. भीमसिंह हैं।
पैंथर्स अध्यक्ष ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से अपने एक संदेश में कहा है कि वह पाकिस्तान सरकार को निर्देश दें कि पाकिस्तानी जेलों में बंद सभी भारतीय कैदियों की सूची मुहैया कराए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पर जोर दिया कि पाकिस्तानी जेलों में बंद गैर-सहायता प्राप्त भारतीय कैदियों को भारत से अपने वकील को चुनने की अनुमति देने के लिए हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा कि भारत-पाक लीगल एड समिति पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय कैदियों के लिए सभी प्रकार की कानूनी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
प्रो.भीमसिंह ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे इस मामले को संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाएंगे।


