पेलेट गन का प्रयोग केवल कश्मीर में ही क्योंॽ
पेलेट गन का प्रयोग केवल कश्मीर में ही क्योंॽ
पेलेट गन का प्रयोग केवल कश्मीर में ही क्योंॽ
मसीहुद्दीन संजरी
उग्र भीड़ को काबू में करने के लिए पेलेट गन सबसे अच्छा विकल्प है। दूसरी स्थिति में सुरक्षा बलों और पुलिस को रायफल का प्रयोग करना पड़ेगा, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ेगी।
यह बातें सीआरपीएफ द्वारा कश्मीर हाईकोर्ट में दाखिल एक हलफनामें में कही गई हैं।
सवाल यह पैदा होता है कि उग्र भीड़ को नियिंत्रत करने के लिए पेलेट गन का प्रयोग केवल कश्मीर में ही क्यों, भारत के अन्य भागों में क्यों नहीं जहां भीड़ उग्र हो जाती है और जान–माल और करोड़ों की सरकारी व निजी सम्पत्ति नष्ट हो जाती है। राह चलती महिलाओं के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों पर दंगाई बलात्कार तक करते हैं।
सीआरपीएफ को ऐसे दंगों को नियंत्रित करने के लिए भी लगाया जाता रहा है।
ऐसी हालत में यह सवाल उठना स्वभाविक है।
सीआरपीएफ को ऐसा ही पत्र गृहमंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को भी लिखना चाहिए और उग्र–दंगाई भीड़ को काबू करने के लिए पेलेट गन जैसे बेहतरीन विकल्प की वकालत करनी चाहिए।
एक बार हरियाणा के जाट आंदोलन या राजस्थान के गूजर आंदोलन जैसी उत्पात मचाती भीड़ को काबू में करने के लिए पैलेट गन का प्रयोग उसी तरह करना चाहिए जैसे वह कशमीर में कर रही है। उसके बाद न केवल पेलेट गन के प्रयोग पर बहस को अधिक सकारात्मक दिशा मिलेगी बल्कि सीआरपीएफ के ऐसे हलफनामों की असलियत भी सामने आ जाएगी।
नशे में धुत जवानों ने कश्मीर में एक प्रोफेसर को उसके घर के सामने पीट-पीट कर मार डाला। अब इस हत्या पर प्रदर्शन करने वालों का पेलेट गन लेकर इन्तेज़ार कर रहे हैं क्योंकि वह भीड़ का काबू करने का सबसे बेहतरीन ....।


