बहन जी दलितों की देवी नहीं दलितों की मित्र बनिये
बहन जी दलितों की देवी नहीं दलितों की मित्र बनिये
बहन जी दलितों की देवी नहीं दलितों की मित्र बनिये, भगाना जाइए, गुजरात जाइए, रोहित वेमुला के घर जाइए
लाल जी निर्मल
बहन मायावती जी ने कहा कि बसपा सामाजिक आन्दोलन का पर्याय भी है।
उनका यह भी कथन था कि वे दलित समाज की देवी हैं।
दलित समाज का होने के नाते उनके इस कथन पर प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।
हिन्दू देवी देवताओं को हमारे लोग नहीं मानते और यह देवी देवता अम्बेडकरी आन्दोलन का हिस्सा नहीं हो सकते, क्यों कि यह सब दलित विनाशक रहे हैं। रही सामाजिक आन्दोलन की बात तो इस कोढ़ युक्त समाज में परिवर्तन कैसे आएगा।
जहाँ तक मेरी समझ है समाज के दबे कुचले लोगों की बृहद् एकता से सामाजिक बदलाव आएगा
और इन्हीं के बल पर प्राप्त की गई सत्ता से ही जाति विनाश का उपाय हो सकता है।
दलितों, पिछड़ों, प्रगतिशील ताकतों के बल पर प्राप्त सत्ता के सहारे ही न्यायपालिका और सेना में भागीदारी मिलेगी और शक्ति के समस्त श्रोतों में वंचितों की उपस्थिति होगी जिसमें मीडिया भी शामिल है। इसके इतर आप तो उनको प्रमोट करने में लगे हो जिनके लोगों ने बौद्ध धर्म को देश से निकाल दिया था। आप क्या सोचते हो ये लोग दलितों को सर्वांगींणता में भागीदारी होने देंगे।
याद कीजिये यह वही लोग हैं जिन्होंने रामासामी नायकर की प्रतिमा नहीं लगने दी थी, जब कि आप सत्ता में थे। यह वही लोग हैं जो आपसे दलित एक्ट को निष्प्रभावी करा दिया था। यह वही लोग हैं जिन्होंने पिछड़े वर्गों को ठेकेदारी में आरक्षण देने से रोका था।
यह वही लोग हैं जिन्होंने मंडल की संस्तुति के अनुरूप पिछड़े वर्गों के प्रोन्नति पर विचार का प्रस्ताव केंद्र को भेजने से रोका था। यह वही लोग हैं जिन्होंने प्रोन्नति में आरक्षण समाप्त करने के हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी थी जब कि हाई कोर्ट ने यह आदेश किया था कि राज्य सरकार चाहे तो आंकड़े एकत्र कर प्रोन्नति में आरक्षण का नवीन आदेश जारी कर सकते है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी का पदावनत भी नहीं किया जाएगा।
यह वही लोग हैं जिन्होंने आपको पी एम का ख्वाब दिखा कर बहुजनों से दूर कर दिया।
यह वही लोग हैं जोआपका भाषण लिखते हैं और जान का भय दिखा कर दलितों से मिलने से मना करते हैं।
समय तेजी से बदल रहा है सर्वजन का मोह छोड़ना होगा और हवाई चप्पल पहन कर आम लोगों से मिलना होगा जैसे कांशीराम जी मिलते थे, जैसे बाबा साहब मिलते थे।
बहन जी दलितों की देवी नहीं दलितों की मित्र बनिये उनके सुख दुःख मान अपमान को महसूस कीजिये। भगाना जाइए, गुजरात जाइए, रोहित वेमुला के घर जाइए। मीडिया, न्यायपालिका, जमीन, सेना में भागीदारी, समाप्त हो रहे आरक्षण के खिलाफ जन आन्दोलन का नेतृत्व कीजिये।
वंचित वर्गों को देवी देवता की नहीं वरन बहुजन मित्र नायक की जरूरत है।
लाल जी निर्मल की फेसबुक टाइमलाइन से साभार


