भारत से शांति बनाये रखना पाकिस्तान के वजूद के लिये बुनियादी शर्त- बीना सरवर
भारत से शांति बनाये रखना पाकिस्तान के वजूद के लिये बुनियादी शर्त- बीना सरवर
अमन की आशा- बीना सरवर का खिताब
टोरंटो, 1 सितम्बरI साऊथ एशियन पीपुल्स फोरम के एक आयोजन में ‘अमन की आशा’ की प्रतिनिधि, प्रख्यात पाकिस्तानी मीडिया कर्मी, फिल्मकार बीना सरवर ने 2012 में भारत-पाक हुकूमत द्वारा किये गए समझौते को लागू करने की मांग की है जिससे दोनों देशों के मध्य जनता के आवागमन में हो रही दिक्कतों को खत्म किया जा सके। ध्यान रहे उक्त समझौते में दोनों देशों ने वीज़ा नियमों को सरल बनाने पर सहमति बनी थी।
बीना सरवर ने मिसिसागा में उपस्थित प्रवासी भारतीय और पाकिस्तानी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि इन देशों को फ़्रांस और जर्मनी से बहुत सीखने की जरूरत है जिन्होंने अपने व्यापारिक हितों के मद्देनज़र अपनी परम्परागत पुरानी दुश्मनी को ताक पर रख कर यूरोपीय समुदाय की स्थापना की। उन्होंने कहा कि व्यापार और आवाम द्वारा एक दूसरे के देशों में आवागमन को बढ़ा कर दोनों देश अपनी प्रगति कर सकते है और जनता का जीवन स्तर ऊँचा उठा सकते हैं। उन्होंने हाल में सीमा पर चल रही कशीदगी पर चुटकी लेते हुए कहा कि इस कशीदगी का सबसे बुरा असर वहां की जनता पर पड़ रहा है और सीमा पर लड़ रहे सिपाहियों को बिलावजह शहादतें देनी पड़ रही है। दोनों देश एक दूसरे पर बच्चों की तरह सीज फायर तोड़ने का इलज़ाम लगा रहे हैं, इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
उपस्थित स्थानीय चुनिन्दा और मशहूर शख्सियतों को ख़िताब करते हुए बीना सरवर ने कहा कि हिन्दुस्तान पकिस्तान के सियासतदान यहाँ जब यहाँ दौरे पर आते हैं और आपसे बातचीत करते हैं तब उन्हें भारत-पाक के दरम्यां चल रही सियासी कशमकश को बंद करने की बात जरूर कहनी चाहिए ताकि उन्हें आपकी बातों का अहसास हो। उन्होंने कहा कि भारत से शांति बनाये रखना पाकिस्तान के वुजूद के लिय बुनियादी शर्त है। भारत पाक से बाहर पूरी दुनिया में बसे इन लोगों के दरम्यां जब कोई कशीदगी नहीं है तब इन पड़ोसी देशों में चल रही कशीदगी को भी ख़त्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान पाक प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने चुनाव प्रचार में आवाम से यह वायदा किया था कि उन्हें भारत के साथ अमन कायम करना है। पाकिस्तान में बहुत कम ऐसी शक्तियां है जो अमन नहीं चाहतीं, लेकिन आवाम के एतबार से भारत के साथ अमन कायम करने के सवाल पर आम सहमति है। उन्होंने कहा कि उनकी पहचान साऊथ एशियन है न कि मध्य पूर्वी अरब। हमें अपनी आवाम को उनकी जड़ों से जुड़ने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाना ही होगा।
हार्वड शिक्षित बीना सरवर कराची में पैदा हुईं लेकिन इनका ताल्लुक इलाहाबाद से है, इनके वालिद डाक्टर सरवर, एक मकबूल तरक्कीपसंद सियासत के सतून थे जो 1948 में कराची चले गए थे।
मीडियाकर्मी ताहिर असलम गोरा ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि कनाडा की 35 मिलियन आवाम में साऊथ एशियन तीन फीसदी हैं, पंजाबी पांचवे दर्जे की जुबां है। हम लोगों की तहज़ीब, सोच, ज़ुबानें एक हैं और यहाँ कोई मसला हमारे दरम्यां पैदा नहीं होता। आज जरूरत है इसी जज़्बे को भारत पाक में भेजने की ताकि वहां कि सियासत को बदला जा सके।
फ़ोरम के अध्यक्ष बेरिस्टर हमीद बशानी खान जिनका ताल्लुक कश्मीर से है, इस मौके पर ख़िताब करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिश करते हुए कश्मीर के सवाल पर न रुका जाए। कश्मीर कोई जमीन का टुकड़ा नहीं है जिस पर कोई अपने अपने कब्ज़े के लिए लड़े। कश्मीर में इंसान रहते हैं वे अपनी समझ और सोच रखते हैं। कश्मीर का सवाल कश्मीरियों को स्वतंत्र रूप से हल करने की आजादी दी जानी चाहिए। पिछले 67 सालों से कश्मीर में चल रहे तानाज़े के कारण उसके दुष्परिणाम आम कश्मीरियों को भुगतने पड़ रहे है, इस सियासी जद्दोजहद के चलते साऊथ एशिया में कश्मीर ही ऐसा खित्ता है जो सबसे ज़्यादा पिछड़ा हुआ है क्योकि मौजूदा सूरते हाल के चलते वहां कोई भी बिजनिस इदारा इन्वेस्ट नहीं करना चाहता। कश्मीरियों को अपना भविष्य चुनने की आज़ादी तत्काल दी जानी चाहिए।
इस आयोजन में टोरंटो स्थित भारतीय दूतावास के काउन्सिल जनरल अखिलेन्द्र मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। किसी सियासी झंझट में पड़े बगैर उन्होंने इंसानी रिश्तों को साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने की पुरज़ोर वकालत की। ‘अमन की आशा’ भारत के टाइम्स और पाकिस्तान के जंग समाचार पत्र समूहों का एक संयुक्त प्रोजेक्ट है जिसकी स्थापना 2010 में हुई थी, इसके अंतर्गत अभी तक दोनों देशों के बहुत से शहरों में दर्जनों सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े कार्यक्रम, सेमीनार आदि हो चुके हैं।
(टोरंटो से शमशाद इलाही शम्स की रिपोर्ट)


