जवान और किसान दोनों के साथ किसान का घटिया मज़ाक चल रहा है

राजीव मित्तल

संजीव के उपन्यास ..जंगल जहां से शुरू होता है..का ज़रा सा हिस्सा....

“पुलिस डाकुओं का साथ दे रहे आदमी को पकड़ उस पर जुल्म ढा रही है, हथियारों का पता लगाने को मार-मार कर उसकी चमड़ी उतार दी गयी है। इतनी मार कि वो आजिज़ आ कर पाखाने में घुस मुहं में गू के कौर भरना शुरू कर देता है। किसी तरह पुलिस के जवान उसे बाहर निकालते हैं और संडासी से उसकी उँगलियों से नाख़ून खींचना चालू कर देते हैं। वो किसी जानवर सा डकरा रहा है। होश में आता है तो पुलिस को हथियार वाली जगह बता देता है। दो जवान उसे टांग कर उस जगह ले जाते हैं.. अब उसे गोली मारने को जवानों में होड़ मचती है।“

क्या हमारे किसानों के साथ यही नहीं हो रहा है? आज वो पेशाब पी रहे हैं कल अपनी विष्ठा खाएंगे, लेकिन सरकार के कान में जूं नहीं रेंगेगी।

सच बात तो ये है कि निर्मम विकास और निष्ठुर बाजार ने उदारवादी व्यवस्था के परखच्चे उड़ा दिए हैं। ऐसा न होता तो ट्रम्प जैसा इंसान अमेरिका का राष्ट्रपति न बनता और मोदी जैसे हृदयहीन इंसान को इस कदर बहुमत न मिलता। अभी कुछ दिन पहले जंतरमंतर पर फौजियों के साथ घटिया मज़ाक चल रहा था और अब किसान अपनी अस्मिता को दांव पर लगा एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है।

हमारे देश के नेताओं ने उद्योगपतियों, पूंजीपतियों और अमेरिका को खुश करने के लिए किसान को किस बदतर हालत में पहुंचा दिया है। इसका असर इस अभागे देश पर पड़ना शुरू हो गया है। हमने किसान से उसका पशुधन छीना, उसकी खाद छीनी, उसका पानी छीना। सुख चैन तो किसान का हज़ारों साल से इस देश में छिना हुआ है, लेकिन अब उसकी आखिरी रोटी भी छीनने जा रहे हैं हम।

किसान का इतना अपमानजनक हाल तो ज़मींदारी व्यवस्था में भी नहीं था, जितना इस लोकतान्त्रिक देश में उसके साथ हो रहा है। हज़ारों किसान हर साल आत्महत्या कर रहा है, क्योंकि क्या बैंक क्या खाद क्या बीज और क्या पानी, हर कोई उसकी जान लेने पर तुला है।

बैंक जिस निर्ममता से किसान से वसूली करता है उसका एक फीसदी कड़ापन भी वो ठग पूंजीपतियों के प्रति नहीं दिखाता.. और किसान को प्रताड़ित करने में हर सरकारी अमला बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता है।

सरकार को चाहिए कि वो किसानों के लिए कंसंट्रेशन कैम्प खोल दे, जहाँ उसकी चमड़ी से साबुन तो बन ही सकता है।

निराला जी.. आज क्या .. आह ग्राम्य जीवन जैसी कविता लिख पाते!! आह की जगह हाय का इस्तेमाल करते...