Security officer caught smuggling and robbery
राजीव मित्तल

इस देश में भारतीय सेना को गाय मान कर पूजने की परम्परा है और वह पुजती भी है....लेकिन जैसे-जैसे गाय को लतियाना बढ़ता जा रही है...गांवों से पशुधन लापता होता जा रहा है....भारतीय सेना के अंदर का पवित्र भाव छीजता जा रहा है....
पिछले कई वर्षों में जैसे जैसे भ्रष्टाचार धार्मिक अनुष्ठान में परिवर्तित हुआ है भारतीय सेना के अफसर बहती गंगा में हाथ धोने के बजाय गंगा में डुबकी लगाने का मौका तलाशने में जुटे रहते हैं....
उन शहरों में जहां सेना की छावनी होती हैं, वहां सिविलियन सीईओ और सेना का प्रमुख अफसर मिल कर छावनी की बेहद प्रोटेक्टिव ज़मीन का मिल कर तियापांचा करते हैं ....एक हिस्सा शहर के प्रभावशाली नेता को मिलता है.... आज़ादी के बाद से अब तक लाखों करोड़ रुपये की छावनी ज़मीन अवैध रूप से बेची जा चुकी है....
आए दिन सुरक्षा बलों के अफसर तस्करी और डकैती में पकड़े जा रहे हैं तो सेना के बड़े अफसर विदेशों से आयात हथियारों की डील में फंस रहे हैं, जिनमें एक बार में करोड़ों रुपये हाथ लगते हैं.... कैंटीन के खराब माल पर कमीशनखोरी भी कम बड़ा खेल नहीं....

अब सेना की कफ़नचोरी पर एक नज़र...
सेना की भर्ती देश के कई हिस्सों में हर साल होती है़....जिसमें जगह जगह हज़ारों युवक हिस्सा लेते हैं....इस भर्ती के इंतज़ामात इस क़दर लचर होते हैं कि अक्सर भर्ती के दौरान भगदड़ की ख़बर पढ़ने को मिलती है.. जिनमें चार पांच की मौत तो तय है.....

अब भर्ती के खेला पर आएं....
मुज़फ्फरपुर में रहते हुए एक दिन ख़बर छपी कि अदालत में पेशी पर आए सेना के अफ़सरों पर हमला...बुरी तरह ज़ख्मी ....इत्यादि....
ख़बर की तासीर ज़रा अलग किस्म की थी, इसलिये थोड़ा छानबीन की ... पता चला कि अदालत में सेना के दो अफ़सरों पर हमला जवान भर्ती के दलालों ने करवाया था....

अब ये दलाल कहां से आ गए तो सुनिये......
भर्ती का काम आमतौर पर कर्नल रैंक के अफ़सर के सुपुर्द होता है... शारीरिक जांच के लिये सेना के ही डॉक्टर.... जिस इलाके में यह काम होना है वहां बिचौलियों को ख़बर भेज दी जाती है.... बिचैलिया विधायक से लेकर रिक्शा तांगे वाला कोई भी हो सकता है... बिचौलिये अपने मुर्गे तलाश कर... जो सैकड़ों में होते हैं... उनसे मोटी रकम वसूल कर अपनी-अपनी केंडीडेट लिस्ट के साथ भर्ती के कर्ताधर्ता को सौंप देते हैं.... उसके बाद अख़बारों में भर्ती का विज्ञापन निकलवाया जाता है... दसियों हज़ार युवक शामिल होते हैं लेकिन रखना तो लिस्टवालों को ही है, जिनकी लाखों की राशि जेब गर्मा रही है.... सो..बाकियों को छांटने के लिये मिनी भगदड़ का आयोजन बेहद ज़रूरी है....
दिक्कत तब आती है जब लिस्ट वालों की संख्या भर्ती लिमिट से ज्यादा हो जाती है ....तब होता है अदालत कचहरी...खून खराबा.....