“Every day of his life one should hear a little song, read a good poem, see a fine picture, and if it were possible, speak a few reasonable words in order that worldly cares may not obliterate the sense of the beautiful which God has implanted in the human soul.”
—-Johann Wolfgang von GOETHE.
यह लिखने वाले जर्मन भाषा के शेक्सपीयर गोएथे हैं जिनका 28 August 1749 जन्मदिन है। उनकी अति प्रसिद्ध प्रेम कविता “Willkommen und Abschied” का मैंने हिन्दी अनुवाद करने का प्रयास किया है। गोएथे ने यह कविता दो बार लिखी, यह अनुवाद प्रथम संस्करण (1771) का है। गोएथे की यह कविता सिर्फ कविता नहीं, अपितु जर्मन कविता के साहित्यिक काल/युग “Sturm und Drang” (Storm and Stress) का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैI इसके बिना जर्मन कविता का वह युग अधूरा हैI
- प्रतिभा उपाध्याय

“मिलन और विदाई”
(Willkommen und Abschied)
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धड़क रहा था दिल मेरा, तेजी से घोड़े की ओर

और आगे था जंगल, युद्ध में नायक की तरह,

संध्या की बाँहों में पहले ही झुकी थी भूमि

और पहाड़ों पर लटक रही थी रात I

कोहरे के वस्त्रों में लिपटा खड़ा था बलूत (Oak Tree)

एक महाकाय दैत्य की तरह

जहाँ झाड़ी से निकलकर अन्धकार ने

देखा अपनी सैकड़ों काली आँखों से II

चाँद ने बादलों के पहाड़ से

देखा धुंध से अलसाते हुए I

हवा ने झुलाया परों को हलके से

भयंकर बड़बड़ाते हुए मेरे कानों के चारों ओर

रचे निशा ने हज़ारों दैत्य

हालांकि था हज़ार गुना साहस मेरा

थी मेरी आत्मा मलबा आग का

गर्मी से पसीज रहा था पूरा दिल मेरा II

तुमको देखा मैंने और देखी सौम्य खुशी

छलक पड़ी वह मेरी मधुर दृष्टि से I

रमा था मेरा पूरा मन तुममें

और थी हर सांस तुम्हारे लिए

गुलाबी रंग की बसंत ऋतु

छा रही थी सुन्दर चेहरे पर

और थी कोमलता मेरे लिए, ओ देव,

की थी मैंने आशा ऎसी, था नहीं मैं इसके योग्यII

बिछुड़ने से छलनी हो गया ह्रदय मेरा

तुम्हारी आँखों से बोल रहा था दिल तुम्हारा I

तुम्हारे चुम्बन में था कैसा प्यार

ओ कैसा आनन्द , कैसा दर्द !

चली गईं तुम , खड़ा रहा मैं ज़मीन को देखता हुआ

और देखा मैंने तुमको भीगी हुई आँखों से,

क्या ही खुशी है प्यार पाने में !

और क्या ही खुशी है प्यार देने में, हे देव!